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दो सिर वाली बच्ची ऑपरेशन के बाद मरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कैरेबियाई देश डॉमिनिकन रिपब्लिक में दो सिर वाली उस बच्ची की मौत हो गई है जिसका 10 घंटे तक ऑपरेशन के बाद एक सिर अलग किया गया था. इसे दुनिया का अब तक का सबसे मुश्किल और अपनी तरह का अकेला ऑपरेशन माना जा रहा था. रेबेका मार्तिनेज़ नाम की लगभग दो महीने की बच्ची दो सिरों के साथ पैदा हुई थी. डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर उसके एक सिर को हटा दिया था और उन्हें पूरी उम्मीद थी कि बच्ची की जान बचा ली जाएगी. मगर चिकित्सकों ने बताया कि ऑपरेशन के बाद बच्ची की हालत बिगड़ने लगी जिससे उसे दिल का दौरा पड़ा और उसकी जान चली गई. यह सिर उस जुड़वाँ बच्चे का था जो बच्ची के माँ के गर्भ में ही अविकसित रह गया था. यह जटिल ऑपरेशन लगभग 10 घंटे तक चला और जिसके बाद रेबेका को अगले दस दिनों तक गहन निगरानी में रखा जाना था. डॉक्टरों ने ऑपरेशन के बाद कहा था कि रेबेका स्वस्थ है और उसने अपने पैर हिलाने शुरू कर दिए हैं. जटिलता यह ऑपरेशन जीवन और मौत का सवाल था जिसमें डॉक्टरों को रेबेका का अविकसित सिर काटकर हटाना था. इतना ही नहीं, उसकी सारी नसों, धमनियों और शिराओं को सही जगह पर लगाने के बाद सिर को दोबारा सिलना था. ऑपरेशन राजधानी सांतो दोमिंगो में हुआ जिसमें 18 डॉक्टरों ने जॉर्ज लैज़रेफ़ के नेतृत्व में हिस्सा लिया, डॉक्टर लैज़रेफ़ ने 2002 में भी ग्वाटेमाला के जुड़वाँ बच्चों को सफलतापूर्वक अलग किया था. इस ऑपरेशन का ख़र्च लगभग 55 लाख रूपए आया जिसका इंतज़ाम क्योर इंटरनेशनल नाम की एक चैरिटी ने किया. चैरिटी के एक प्रवक्ता ने बताया कि जब डॉक्टर ऑपरेशन करने के बाद बाहर आए तो सभी की यही राय थी कि ऑपरेशन पूरी तरह कामयाब रहा है. प्रवक्ता माइक स्वैगर ने कहा, "ऑपरेशन का हर हिस्सा सफलतापूर्वक पूरा हो गया, नसों को सही जगह पर लगाने से लेकर बच्ची के सिर के ख़ाली हिस्से को भरने तक." प्रवक्ता ने कहा था कि डॉक्टरों के विश्लेषण के मुताबिक़ बच्ची के जीवित बचने की संभावना अब काफ़ी बेहतर हो गई है. ख़ुशी रेबेका के पिता ने कहा, "हम इतने ख़ुश कभी नहीं हुए, हम यही चाहते थे और यही हुआ." रेबेका दो सिरों के साथ पैदा होने वाली दुनिया की आठवीं बच्ची है, बाक़ी सात शिशुओं की मौत जन्म के बाद ही हो गई. रेबेका के दूसरे सिर में भी जान थी लेकिन वह इतना विकसित नहीं था कि कुछ महसूस कर सके. कई बार दूसरे सिर में भी हरकत देखी गई थी. डॉक्टर लैज़रेफ़ का कहना था कि अविकसित सिर तेज़ी से बड़ा हो रहा था जबकि रेबेका की गर्दन से लगा हुआ सिर धीरे-धीरे बढ़ रहा था इसलिए यह ऑपरेशन करना ज़रूरी हो गया था. डॉक्टर का कहना था कि रेबेका का ऑपरेशन नहीं हुआ होता तो उसका हिलना-डुलना असंभव हो जाता और उसकी जान नहीं बच पाती. |
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