|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
औरांग उटान लुप्त होने की कगार पर
एशिया की मशहूर वानर प्रजाति औरांग उटान के अगले बीस वर्षों में पूरी तरह लुप्त हो जाने की आशंका है. पर्यावरण संस्था वर्ल्ड वाइल्डलाइफ़ फंड का कहना है कि पिछली शताब्दी में बोर्नियो और सुमात्रा में औरांग उटान की संख्या में 91 प्रतिशत तक की कमी आई है. संस्था का कहना है कि अभी हाल ही में यानी 1987 तक इनकी संख्या 45 से 60 हज़ार के बीच आँकी जा रही थी. लेकिन 2001 तक यह संख्या लगभग आधी ही रह गई और अब दुनिया भर में सिर्फ़ 25 से 30 हज़ार तक औरांग उटान ही बचे हैं. ये प्रजाति अब आमतौर पर बोर्नियो और सुमात्रा में ही पाई जाती है और सुमात्रा में विशेषतौर पर ये लोप होने की कगार पर है जहाँ इसके केवल नौ हज़ार सदस्य ही मौजूद हैं. जंगलों की कटाई इनको सबसे बड़ा ख़तरा वनों के विनाश से है. इनका शिकार भी होता है और इन्हें पालतू बनाने के लिए पकड़ा भी जाता है. इसके अलावा औरांग उटान को जंगलों में लगने वाली आग से भी ख़तरा रहता है. लगभग 60 प्रतिशत औरांग उटान उनके लिए आरक्षित जगहों से बाहर रहते हैं और वे ज़्यादा ख़तरे का सामना करते हैं. मादा औरांग उटान बारह साल की उम्र में बच्चे को जन्म देने योग्य हो जाती है और उसकी औसत आयुदर 40 साल है. लेकिन उसकी प्रजनन दर वानरजाति में सबसे कम है. यानी एक गर्भ से दूसरे के बीच औसतन आठ साल का अंतर होता है. डब्ल्यू डब्ल्यू एफ़ का कहना है कि इनके अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कमी आई है क्योंकि ताइवान ने अपने आयात नियम कड़े कर दिए हैं लेकिन अभ भी इंडोनेशिया में औरांग उटान की पालतू जानवर के तौर पर भारी मांग है. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||