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जुड़वाँ को अलग करने से जुड़े नैतिक सवाल
आपस में जुड़े जुड़वाँ बच्चों को अलग करने के लिए ऑपरेशन का फ़ैसला करने वाले परिवारों और चिकित्सकों को भारी नैतिक सवालों का सामना करना पड़ता है. मिस्र के दो वर्षीय जुड़वाँ बच्चों अहमद इब्राहिम और मोहम्मद इब्राहिम के परिजनों और चिकित्सकों को भी काफी असमंजस का सामना करना पड़ा. उन्हें इस बात का जायज़ डर था कि ऑपरेशन से एक या दोनों बच्चों की जान न चली जाए. इसी जुलाई महीने में ईरान की बहनों की ऐसे ही एक ऑपरेशन के दौरान मौत हो गई थी. हालाँकि अहमद और मोहम्मद के परिजन यह भी मान कर चल रहे थे कि दोनों बच्चों को अलग नहीं किया गया तो उनकी स्थिति बिगड़ती ही जाएगी. अहमद और मोहम्मद को अलग करने का फ़ैसला निश्चय ही ऐसे अन्य मामलों से अलग किस्म का था. वे मात्र दो साल के हैं. यानी वे ख़ुद अपने बारे में कोई फ़ैसला करने की स्थिति में नहीं हैं. दूसरी ओर ईरानी बहनें 29 साल की थीं और उन्होंने अलग होने के प्रयास में मौत के ख़तरे का स्वीकार कर लिया था. धार्मिक सवाल जुड़वों को अलग करने से जुड़े धार्मिक सवाल भी हैं. तीन साल पहले माल्टा से आए एक रोमन कैथोलिक परिवार में परस्पर जुड़ी जुड़वाँ लड़कियों का जन्म हुआ. उनके माता-पिता ने उन्हें अलग करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. बाद में हाई कोर्ट के आदेश पर ग्रेसी और रोज़ी नामक बहनों को अलग करने के लिए ऑपरेशन किया गया, जिसमें रोज़ी की मौत हो गई. उस समय बच्चों के माता-पिता ने अदालत की आलोचना करते हुए कहा था कि किसी को ईश्वर की भूमिका निभाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. |
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