सौर ऊर्जा से चलने वाले विमान ने भरी पहली उड़ान

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- Author, जोनाथन एमोस
- पदनाम, विज्ञान संवाददाता, बीबीसी न्यूज के लिए
सौर ऊर्जा से चलने वाले एक विमान ने सोमवार को अपनी पहली उड़ान भरी.
विमान ने स्विट्ज़रलैंड के पेयर्न हवाई अड्डे से उड़ान भरी और दो घंटे की यात्रा के बाद वापस लौटा. इस विमान को सोलर इंपल्स 2 वीइकल कहा जा रहा है.
<link type="page"><caption> सोलर इंपल्स 2</caption><url href="http://live.solarimpulse.com/" platform="highweb"/></link> ने भारतीय समयानुसार नौ बजकर पांच मिनट पर उड़ान भरी.
ये विमान साल 2015 में पूरी दुनिया की यात्रा पर भेजा जाएगा.
पिछले साल पूरे अमरीका का चक्कर लगाने वाले सौर ऊर्जा से संचालित विमान का यह बड़ा और उन्नत संस्करण है. इस विमान का नियंत्रण बर्ट्रेंड पिकार्ड और आंद्रे बोर्शबर्ग ने किया था.
इस पहली उड़ान के लिए कॉकपिट में पायलट मार्कस शेरडेल बैठे हुए थे.
<link type="page"><caption> सूरज के बूते अमरीका के पार उड़ा जहाज़</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/07/130708_solar_plane_across_america-rd.shtml" platform="highweb"/></link>
चालक विमान को छह हजार फ़ुट की ऊंचाई तक ले गए और इसकी दक्षता को परखने के लिए कई तरह की कलाबाज़ियां भी लगाईं.
शेरडेल ने कुछ शुरुआती झटकों की बात बताई, लेकिन पूरा अभियान काफ़ी सकारात्मक रहा.
वैश्विक उड़ान
बर्टेंड पिकार्ड ने बताया, ''सोलर इंपल्स की टीम के सभी सदस्यों के लिए यह एक यादगार दिन था.''
उड़ान से पहले लंबे समय तक विमान का ज़मीनी परिक्षण किया गया था और पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही उड़ान को हरी झंडी दी गई थी.
कार्बन फाइबर से बने इस विमान का विशाल पंख 72 मीटर का है जो एक बोइंग 747 विमान की तुलना में काफ़ी बड़ा है, लेकिन फिर भी इस विमान का वज़न केवल 2.3 टन ही है.

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पंखों के सबसे ऊपरी भाग पर 17,000 सौर बैटरियाँ लगी हुई हैं जो चार बिजली के मोटरों को 140 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से चलाती हैं.
दिन के वक़्त सौर बैटरियों की मदद से लिथियम बैटरियों को चार्ज किया जाएगा, जिसका इस्तेमाल रात के वक्त विमान चलाने में किया जा सकता है.
पहले सौर संचालित विमान ने कई तरह के रिकॉर्ड बनाए थे: 26 घंटे लंबी उड़ान, अंतरमहाद्वीपीय यात्रा का रिकॉर्ड वग़ैरह.
स्वचालित सौर ऊर्जा संचालित ड्रोन हफ़्तों तक हवा में रह सकते हैं.
ये रिकार्ड पिछले साल मई, जून और जुलाई में बर्ट्रेंड पिकार्ड और आंद्रे बोर्शबर्ग की अमरीका की अंतरमहाद्वीपीय यात्रा के दौरान बने थे.
लेकिन वैश्विक उड़ान को पूरा करने की कठिनाई और जटिलता ने उस प्रयास को छोटा कर दिया क्योंकि वैश्विक उड़ान के दौरान अटलांटिक और प्रशांत महासागरों को पार करना होगा. उन्नत संस्करण को इस यात्रा को पूरा करने में पांच दिन और रात लग सकते हैं.
इस विमान के कॉकपिट में केवल एक विमान चालक ही आ सकता है. इसके अंदर आराम करने के लिए भी एक सीट है.
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