प्राइम टाइम में न दिखाए जाएं जंक फ़ूड के विज्ञापन

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स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य पदार्थों के टीवी विज्ञापन सबसे ज़्यादा बच्चों को प्रभावित करते हैं.
जंक फ़ूड के ख़िलाफ़ अभियान चलाने वाले एक समूह का कहना है कि प्राइम टाइम में जंक फ़ूड वाले टीवी विज्ञापनों पर रोक लगनी चाहिए.
एक्शन ऑन जंक फ़ूड मार्केटिंग ने आईटीवी पर एक्स फ़ैक्टर और चैनल फ़ोर पर सिम्प्सन और होलीहोक्स कार्यक्रमों के प्रसारण के 20 घंटे के प्रसारण के दौरान जारी 750 विज्ञापनों का विश्लेषण किया.
इसमें पाया गया कि दस में से एक विज्ञापन किसी न किसी फ़ास्ट फ़ूड रेस्टोरेंट, मिष्ठान या सुपरमार्केट जंक फ़ूड को प्रोत्साहित करने से संबंधित थे.
लेकिन सरकार का कहना है कि बच्चों में मोटापे का कारण विज्ञापन नहीं हैं.
लीवरपूल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस विश्लेषण में पाया गया कि कुल टीवी विज्ञापन में जंक फ़ूड की हिस्सेदारी 11 प्रतिशत है, जबकि कुल खाद्य पदार्थों के विज्ञापन में आधा जंक फ़ूड से संबंधित होता है.
'हानिकारक' विज्ञापन

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शोधकर्ताओं का कहना है कि सबसे ज़्यादा प्रसारित होने वाले जंक फ़ूड के विज्ञापन आल्दी और मॉरिसन जैसे सुपरमार्केट से आते हैं.
इसके बाद नंबर आता है डोमिनोज और केएफ़सी (केंचुकी फ्राईड चिकन) जैसे खाद्य पदार्थ निर्माता शृंखलाओं का.
लिंट और कैडबरी जैसे चॉकलेट निर्माताओं और क्लोवर और फ़्लोरा बटरी जैसे ब्रांड भी 'हानिकारक' विज्ञापनों की सूची में आते हैं.
शोधकर्ताओं ने एक्स फ़ैक्टर कार्यक्रम के 10 घंटे में प्रसारित विज्ञापनों के साथ ही चैनल फ़ोर पर 2013 में क्रिसमस के दौरान 10 घंटे के प्रसारण का अध्ययन किया.
जंक फ़ूड के ख़िलाफ़ अभियान चलाने वाला समूह एक्शन ऑन जंक फ़ूड मार्केटिंग ने कहा है कि बच्चे अक्सर आठ बजे के आस पास प्राइम टाइम में टीवी देखते हैं.
लेकिन लक्षित विज्ञापनों से बच्चों को बचाने के लिए बना कानून सिर्फ़ बच्चों के कार्यक्रमों पर ही लागू हैं, जोकि अक्सर दिन में प्रसारित होते हैं.
यह संस्था चिल्ड्रेन फ़ूड कैंपेन और ब्रिटिश हॉर्ट फ़ाउंडेशन से भी जुड़ी हुई है.
ब्रिटिश हॉर्ट फ़ाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी साइमन गिलेस्पी कहते हैं, ''अभिभावक यह नहीं चाहते कि उनके बच्चे प्राइम टाइम में हानिकारक खाद्य पदार्थों वाले विज्ञापन के धुआंधार प्रचार के शिकार हों, लेकिन वास्तव में यही हो रहा है.''
''एक स्पष्ट क़ानून के बग़ैर कंपनियां तमाम खेल और प्रतियोगिता के मार्फ़त बच्चों को लुभाने के लिए स्वतंत्र हैं और यह सब कुछ वो अपने उत्पाद के प्रचार के लिए करती हैं.''
अभियान चलाने वाले चाहते हैं कि जंक फ़ूड विज्ञापनों पर रोक को रात नौ बजे तक बढ़ाया जाए.
क़ानून

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रॉयल कॉलेज में बाल स्वास्थ्य एवं पीडियाट्रिक्स विभाग के प्रोफ़ेसर मिश ब्लेयर कहते हैं, ''बच्चों का व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए दोहन नहीं होना चाहिए और कम उम्र में मोटापे की बढ़ती समस्या में मदद के लिए विज्ञापन उद्योग को भी अपनी ज़िम्मेदारी समझनी चाहिए.''
सरकार का कहना है कि बच्चों की खाने की आदत को प्रभावित करने में विज्ञापन महज़ एक कारक है, लेकिन उसने इस मामले पर नज़र बनाए रखने की बात कही है.
हालांकि, एडवर्टाइजिंग एसोशिएशन को इस अभियान में लॉबिंग की गंध आ रही है. एसोसिएशन का कहना है कि लॉबिंग विज्ञापन का मुखौटा लगाकर सामने आई है और वर्तमान में लागू क़ानून अपना काम ठीक कर रहे हैं.
लेकिन, इंग्लैंड में एक सामान्य धारणा बन गई है कि देश के क़रीब एक तिहाई बच्चे मोटापे का शिकार हैं और इसलिए परिजनों और बच्चों में स्वास्थ्यवर्धक भोजन के लिए प्रोत्साहित किया जाना महत्वपूर्ण हो गया है.
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