गोली खाइए, और शुक्राणुओं को 'नजरबंद' कीजिए

- Author, जेम्स गालाघेर
- पदनाम, स्वास्थ्य एवम् विज्ञान संवाददाता, बीबीसी न्यूज
वो वक्त नजदीक आ रहा है जब पुरुष अपनी महिला साथी के गर्भ ठहर जाने की आशंका से परे सेक्स जीवन का भरपूर आनंद उठा पाएंगे.
इस बात की संभावना इसलिए जताई जा रही है क्योंकि आस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा तरीका खोज लिया है, जिससे <link type="page"><caption> सेक्स संबंध</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/09/120925_denmark_sperm_ss.shtml" platform="highweb"/></link> पर असर डाले बगैर वीर्य स्खलन को कुछ देर के लिए स्थगित किया जा सकेगा.
जानवरों के साथ किए गए परीक्षण में पाया गया कि सेक्स के दौरान बन रहे <link type="page"><caption> शुक्राणुओं</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/05/120530_vicky_donor_sperm_donation_sy.shtml" platform="highweb"/></link> का "भंडारण" किया जा सकता है.
इस शोध के परिणाम राष्ट्रीय विज्ञान एकेडमी की पत्र-पत्रिकाओं में छपें.
शुक्राणुओं का भंडार
पुरुष गर्भनिरोधक गोलियों की तलाश में जुटे वैज्ञानिकों के बीच काफी दिनों से <link type="page"><caption> निष्क्रिय शुक्राणुओं</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/03/130316_international_palestinians_sperm_smuggling_pa.shtml" platform="highweb"/></link> की भूमिका पर विचार विमर्श हो रहे हैं.
मोनाश विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं में से एक डॉ. सबातिनो वेंचुरा बताते हैं, "शुक्राणुओं को निष्क्रिय करने के लिए जिन दवाइयों का इस्तेमाल किया गया उनके साइड इफेक्ट्स काफी ख़तरनाक पाए गए."
इस बात की भी आशंका रही कि ये दवाइयां पुरुषों की प्रजनन क्षमता और सेक्स की इच्छा पर भी बुरा प्रभाव डाल सकती हैं. यही नहीं, ये शुक्राणुओं के उत्पादन में स्थायी बदलाव ला सकते हैं.

मगर मोनाश की टीम इस मसले पर अलग ढंग से सोचती है. आमतौर पर स्खलन से ठीक पहले शुक्राणु वीर्यकोष से शुक्रवाहिकाओं की मदद से बाहर निकलते हैं.
टीम ने कुछ चूहों अपने प्रयोग किए. उन्होंने इन चूहों की अनुवांशिक बुनावट को कुछ इस तरह बदला कि वे शुक्रवाहिकाओं से शुक्राणु निकालने में असमर्थ हो गए.
डॉ. वेनचुरा ने बीबीसी को बतायाः "शुक्राणुओं को एक जगह इकट्ठा किया गया ताकि जब चूहे स्खलित हों तब वहां कोई शुक्राणु उत्सर्जित करने के लिए उपलब्ध ना हो. इस तरह गर्भ ठहरने की नौबत नहीं आई."
उन्होंने आगे बताया, "इस तरीके के उलट शुक्राणुओं को वापस वीर्यकोष में लाया जा सकता है. यह काम हम दवाओं के ज़रिए कर सकते हैं. इसके लिए हमें संभवतः दो दवाओं की ज़रूरत है."
जैविक नसबंदी
अब तक शोध समूहों ने चूहों की प्रजनन क्षमता को बाधित करने के लिए उनके डीएनए में बदलाव कर वैसे दो प्रोटीनों के बनने पर रोक लगाई जिसकी ज़रूरत शुक्राणुओं की आवाजाही के लिए ज़रूरी होती है.
शोधकर्ताओं को अब उन दो दवाओं की ज़रूरत है जो इसी तरह का प्रभाव डालें. उनका विश्वास है कि इसमें से पहली दवा तो पहले से ही बनी हुई है जिसका इस्तेमाल दशकों से लोग प्रोस्टेट के आकार को प्रभावित करने के लिए करते आ रहे हैं.
हालांकि, इन शोधकर्ताओं को दूसरी दवा की तलाश करने में काफी मशक्कत करनी होगी. शायद इसमें दशक लग जाएं.
इन सब में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला प्रोटीन रक्त वाहिकाओं को नियंत्रित करने में भी अहम माना जाता है. इसके कारण रक्तचाप और दिल की धड़कन भी प्रभावित होती है.
जबकि वर्तमान प्रयोग में इस्तेमाल किए गए चूहों के रक्तचाप में रत्ती भर का ही बदलाव पाया गया. इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि स्खलित वीर्य की मात्रा पर भी असर पड़ सकता है.
शेफील्ड विश्वविद्यालय के एंड्रोलॉजी विभाग में वरिष्ठ व्याख्याता डॉ. अलान पेसी ने बीबीसी को बतायाः "यह काफी अच्छा शोध है. इसमें पुरुषों की लगभग जैविक नसबंदी हो जाती है. यह दवा शुक्राण्ओं को बाहर निकलने से रोक देती है."
वे कहते हैं, "ये अच्छा विचार है. अब देखना ये है इसका लोगों पर क्या असर होता है."
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