डायनासोरों की मशहूर भगदड़, जो हुई ही नहीं!

करीब एक अरब साल पुरानी, डायनासोरों की भगदड़ की एकमात्र कहानी, ख़तरे में है. ऑस्ट्रेलिया के लार्क क्वैरी में चट्टानों पर सौ से भी ज़्यादा डायनासोरों के पैरों के निशान हैं, जिन्हें दुनिया डायनासोर की भगदड़ के नाम से जानती है.
इस कहानी पर कुछ वैज्ञानिकों ने सवाल उठा दिए हैं.
इन सवालों के बारे में बताने से पहले आपको भगदड़ के बारे में बताना ज़रूरी है.
करोड़ों साल पहले उत्तर पूर्वी ऑस्ट्रेलिया के इस इलाके में पानी का एक कुंड था.
सौ से ज़्यादा छोटे डायनासोर, जिनका आकार मुर्गे से लेकर ऑस्ट्रिच के बराबर था, यहां आराम से पानी पी रहे थे.
पदचिन्हों के निशान
अचानक एक मांसभक्षी डायनासोर झाड़ियों के पीछे से निकलता है और अपने दांत और पंजे चमकाता हुआ इन छोटे डायनासोरों की तरफ़ बढ़ता है.
छोटे-छोटे डायनासोर अपनी जान बचाकर भागते हैं और उनके पैरों के निशान कोमल ज़मीन पर पड़ जाते हैं. यही डायनासोरों की भगदड़ है.
मध्य क्वींसलैंड के लार्क क्वैरी में स्थित डायनासोर भगदड़ राष्ट्रीय स्मारक में एक टूर गाइड जॉन टेलर कहते हैं, "इस घटना में बस पांच मिनट ही लगे होंगे, और यह समय की यात्रा में यह पलक झपकने भर की देरी है."
एक विशाल चट्टान पर बने पदचिन्हों के जीवाश्म दिखाते हुए वह कहते हैं, "आपके सामने जिस घटना के चिन्ह हैं वह आपको पूरी दुनिया में कहीं नहीं मिलेंगे."
हर साल पूरी दुनिया से हज़ारों लोग इस जगह को देखने आते हैं. वर्ष 2004 में इसे ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय धरोहरों की सूची में शामिल कर लिया गया है.
इन पदचिन्हों को 1970 में एक खदान प्रबंधक ने देखा था- जिसने सोचा कि यह पक्षियों के पैरों के निशान हैं.
'गलत निष्कर्ष'

वर्ष 1970 में इनकी पहचान डायनासोरों के पदचिन्हों के रूप में की गई और फिर इस इलाके की खुदाई की गई.
तीन से चार हज़ार पदचिन्ह ढूंढने के लिए 60 टन से ज़्यादा पत्थर निकाले गए.
वर्ष 1984 में वैज्ञानकों ने निष्कर्ष निकाला कि यह निशान डायनासोरों की भगदड़ की वजह से बने हैं.
लेकिन अब इस निष्कर्ष पर सवाल उठने लगे हैं.
क्वींसलैंड विश्वविद्यालय में जीवाश्व विज्ञान के छात्र और युवा वैज्ञानिक एंथनी रोमिलियो और उनके साथी लेखकों ने इस निष्कर्ष को ग़लत क़रार दिया है.
जनवरी में जनरल ऑफ़ वेर्टेब्रेट पैलिअन्टोलॉजी या कशेरुकी जीवाश्म विज्ञान पर जनरल में छपे शोधपत्र में रोमिलियो और उनके साथी वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि लार्क क्वैरी में कभी भगदड़ हुई ही नहीं थी.
रोमिलियो का कहना है कि भगदड़ का निष्कर्ष निकालने वाले वैज्ञानिकों ने तथ्यों की ग़लत व्याख्या कर दी.
'तैर रहे थे'
वह कहते हैं कि भगदड़ की कहानी में आने वाले विशाल हमलावर डायनासोर, मांसभक्षी था ही नहीं.
मांसभक्षी डायनासोरों के पैर लंबे, पतली उंगलियों वाले थे जबकि शाकाहारी डायनासोरों के पैर छोटी उंगलियों वाले और काफ़ी चौड़े थे.
रोमिलियो कहते हैं कि लार्क क्वैरी में पैरों के निशान शाकाहारियों वाले हैं.
उनके अनुसार इसके शाकाहारी डायनासोर मुटाब्रासॉरस होने की संभावना ज़्यादा है.
वह कहते हैं कि छोटे डायनासोरों को शाकाहारी डायनासोर से डरकर भागने की बिल्कुल भी ज़रूरत नहीं थी.
रोमिलियो के अनुसार वे भाग ही नहीं रहे थे वे तो तैर रहे थे.
वैज्ञानिकों ने पैरों के निशान के बीच दूरी का निष्कर्ष यह निकाला था कि छोटे डायनासोर भाग रहे थे.
पर्यटन पर असर

लेकिन रोमिलिया को तर्क है कि क्योंकि वह जानवर तैर रहे थे इसलिए पानी के अंदर मिट्टी में उनके पैरों के निशान दूर-दूर हैं.
उनके अनुसार डायनासोर किसी मांसभक्षी से बचने के लिए भाग नहीं रहे थे बल्कि नदी में कई दिन या कई हफ़्तों तक तैरते रहे थे.
रोमिलियो के निष्कर्ष से जीवाश्म विज्ञानियों के बीच एक नई बहस खड़ी हो गई है.
कुछ मानते हैं कि रोमिलियो की बात में दम है तो कुछ इसकी आलोचना भी करते हैं.
क्वींसलैंड संग्रहालय में मुख्य डायनासोर विशेषज्ञ स्कॉट हॉकनल कहते हैं कि सिर्फ़ पद चिन्ह देखना ही काफ़ी नहीं है.
यह भी देखना होगा कि कीचड़ में डायनासोर के पैर पड़ने से क्या प्रभाव पड़ा.
वह कहते हैं, "जब आप पदचिन्हों को देखते हैं तो यह बड़ा, गोल पंजा लगता है, लेकिन दरअसल कीचड़ के पंजे तले मसले जाने से ऐसा हुआ है, क्योंकि जानवर जोर से कीचड़ में पैर पटक रहा है."
शानदार कहानी
वह एक स्पॉटलाइट की मदद से बड़े पदचिन्हों में से एक के जटिल ढांचे को दिखाते हैं, "वह तिकोना आकार देख रहे हैं, वह पंजे का निशान है. ऐसा निशान सिर्फ़ एक जानवर के पैर से बनता है और वह एक मांसाहारी डायनासोर है."
रोमिलियो के भागने की बजाय तैरने वाले तर्क पर हॉकनल कहते हैं पानी के अंदर कीचड़ में पैरों के निशान टिकते ही नहीं.
वह कहते हैं, "मैं किसी कमज़ोर वैज्ञानिक क्रिया को एक शानदार कहानी के आड़े नहीं आने दूंगा."
टुअर गाइड जॉन टेलर तैरने वाले निष्कर्ष पर अभी यकीन नहीं करते.
लेकिन वह कहते हैं कि अगर उसके पक्ष में तर्क आए तो वह अपनी कहानी भी बदल देंगे.
चाहे वैज्ञानिक कुछ भी सोचते हों उन्हें नहीं लगता कि इससे पर्यटन पर कोई फ़र्क पड़ेगा.
लार्क क्वैरी डायनासोर के पैरों के निशान वाला दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे प्रभावशाली स्थान तो है ही.












