आईबीएम की फ़िल्म में 'एटम की ऐक्टिंग'

आईबीएम की फिल्म में परमाणुओं को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे कोई बच्चा गेंद से खेल रहा हो
इमेज कैप्शन, आईबीएम की फिल्म में परमाणुओं को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे कोई बच्चा गेंद से खेल रहा हो

आईबीएम के शोधकर्ताओं ने ताँबे की सतह पर परमाणुओं को कुशलतापूर्वक नियंत्रित करके दुनिया की सबसे छोटी फिल्म तैयार की है.

इसके लिए स्टॉप मोशन एनिमेशन ने कार्बन के कुछ परमाणुओं का इस्तेमाल किया. उन्हें एक पतले सिरे के साथ घुमाया गया, जिसे स्कैनिंग टनलिंग माइक्रोस्कोप (एसटीएम) कहते हैं.

इंसान के एक बाल के बराबर फैलाव के लिए फिल्म में 1,000 से ज्यादा फ्रेम का इस्तेमाल किया गया.

परमाणुओं के इस असाधारण करतब को गिनिज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने प्रमाणित किया है.

मकसद

यह आईबीएम के प्रयासों का एक उदाहरण है, जिसके तहत वह एकल परमाणुओं पर आधारित अगली पीढ़ी के डेटा स्टोरेज समाधान तैयार कर रहा है.

आईबीएम के वैज्ञानिकों ने कई ऐसी तकनीक तैयार की हैं, जिनका इस्तेमाल परमाणु या आणविक प्रणाली में किया जा सकता है.

इन्हीं कोशिशों के क्रम में उन्होंने एटॉमिक फोर्स माइक्रोस्कोप नाम की मशीन का इस्तेमाल करते हुए एकल अणुओं की तस्वीर तैयार की.

इतना ही नहीं वे अणुओं के बीच परमाणु बांड की तस्वीर लेने में कामयाब रहे.

अनोखा खिलाड़ी

दुनिया की सबसे छोटी फिल्म को इसी स्टूडियों में तैयार किया गया, जो आश्चर्यजनक रूप से ठंडा है.
इमेज कैप्शन, दुनिया की सबसे छोटी फिल्म को इसी स्टूडियों में तैयार किया गया, जो आश्चर्यजनक रूप से ठंडा है.

नई फिल्म का शीर्षक ‘ए ब्वॉय एंड हिज एटम’ है और इसमें आईबीएम के आविष्कार एसटीएम का इस्तेमाल किया गया है, जिसके वैज्ञानिक को 1986 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला था.

यह डिवाइस चमत्कारिक रूप से सतह पर नुकीली धातु की सुई पर विद्युत आवेश के प्रवाहित होने के जरिए काम करती है. क्वांटम भौतिकी प्रभाव (टनेलिंग) में सतह पर नोंक के बीच अंतर के कारण आवेश “अंतर के बीच छलांग” लगा सकता है.

90 सेकेंड की इस फिल्म के 242 फ्रेम दरअसल परमाणुओं की दी गई एक व्यवस्था के साथ इस “टनलिंग करेंट” का मानचित्र है. इसमें एक लड़के को “गेंद” से खेलते हुए दिखाया गया है, जो दरअसल एक परमाणु से बना है और ट्रैम्पोलाइन पर नाच रहा है.

इस कवायद को पूरा करने में चार वैज्ञानिकों को दो सप्ताह लगे और इसे यू-ट्यूब वीडियो के जरिए समझाया गया है.

उन्होंने बताया कि वास्तव में यह कोशिश किसी खास वैज्ञानिक खोज के लिए नहीं थी. यह फिल्म बच्चों और अन्य लोगों में गणित, विज्ञान और तकनीक के बारे में कौतुहल पैदा करने के लिए है.