रात में काम करने से हो सकता है गर्भाशय कैंसर

अमरीकी अनुसंधानकर्त्ताओं का कहना है कि रात की शिफ़्ट में काम करने से महिलाओं में गर्भाशय कैंसर का ख़तरा बढ़ जाता है.
तीन हज़ार से अधिक महिलाओं पर किए गए शोध से ये बात सामने आई है. शोध में पाया गया कि रात की शिफ़्ट में काम करने वाली महिलाओं में दिन में काम करने वाली महिलाओं की तुलना में कैंसर का ख़तरा 49 प्रतिशत तक बढ़ जाता है.
अनुसंधानकर्त्ताओं का कहना है कि नींद के लिए ज़िम्मेदार हॉरमोन मिलेटोनिन में गड़बड़ी इसका कारण हो सकता है.
लेकिन विशेषज्ञों का तर्क है कि इस दिशा में और शोध की ज़रूरत हैं क्योंकि इसकी अन्य वजहें भी हो सकती हैं.
इससे पहले भी एक शोध में यह बात सामने आई थी कि शिफ़्ट में काम करने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर का ख़तरा बढ़ जाता है.
गड़बड़ा जाती है प्रणाली
इंटरनेशनल एजेंसी फ़ॉर कैंसर रिसर्च ने भी इस बात को माना है कि शिफ़्ट में काम से शरीर की सामान्य प्रणाली गड़बड़ा जाती है और ये कैंसर की वजह हो सकती है.
ताज़ा शोध में अनुसंधानकर्त्ताओं ने गर्भाशय के कैंसर की एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी 1101 महिलाओं, शुरुआती दौर से गुज़र रहीं 389 महिलाओं और 1832 सामान्य महिलाओं को शामिल किया.
गर्भाशय के कैंसर की एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी एक चौथाई महिलाओं ने माना कि उन्होंने रात्रि पाली में काम किया था जबकि शुरुआती दौर से गुज़र रहीं महिलाओं में से एक तिहाई ने इस बात को स्वीकार किया. सामान्य महिलाओं में पांच में से एक महिला ने रात्रि पाली में काम किया था.
इससे ये बात निकलकर सामने आई है कि दिन के समय काम करने वाली महिलाओं की तुलना में रात के समय काम करने वाली महिलाओं में एडवांस्ड कैंसर का खतरा 24 प्रतिशत और बीमारी शुरू होने का खतरा 49 प्रतिशत बढ़ जाता है.
आगे शोध की ज़रूरत
ये शोध ऑकुपेशनल एंड एनवायरमेंटल मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है और ये 50 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए अहम है.
प्रमुख अनुसंधानकर्त्ता और सिएटल स्थित फ्रैड हचिंसन कैंसर रिसर्च सेंटर के डॉ. प्रवीण भट्टी ने कहा कि इस बारे में अभी और शोध की जरूरत है.
उन्होंने कहा, “इस बारे में अभी व्यापक शोध की ज़रूरत है. हमें ख़ासकर क्रोनोटाइप पर और अधिक जानकारी चाहिए. जैसे कि आपकी शिफ़्ट स्थाई है या फिर बदलती रहती है. ताकि इसे भविष्य में होने वाले शोधों में शामिल किया जा सके.”












