जब डॉक्टर उगा सकेगा आपके मुँह में नए दांत?

ब्रिटेन के शोधकर्ताओं का कहना है कि डॉक्टर एक न एक दिन मसूड़े की कोशिकाओं से <link type="page"> <caption> नए दांत उगाने</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/03/120328_face_transplant_sdp.shtml" platform="highweb"/> </link> में कामयाब होंगे. अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि इस तरह से विकसित किए गए नए दांत <link type="page"> <caption> टूटे हुए दांत</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/09/120922_international_us_plus_jail_sm.shtml" platform="highweb"/> </link> की जगह ले सकते हैं.
किंग्स कॉलेज लंदन की टीम ने वयस्कों के मसूड़े के <link type="page"> <caption> ऊतक की कोशिका</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2011/11/111106_lennon_tooth_ac.shtml" platform="highweb"/> </link> को लेकर चूहे की अलग तरह की कोशिका से मिलाकर एक दांत उगाने का प्रयोग किया.
हालांकि डॉक्टरों को इस प्रक्रिया का इस्तेमाल करने में अभी भी <link type="page"> <caption> कई साल लगेंगे</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2011/11/111103_teeth_homosapiens_akd.shtml" platform="highweb"/> </link>.
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह बात साबित हो चुकी है कि इस तरीके से नए दांत ज़रूर बनाए जा सकते हैं लेकिन यह क्लिनिक में इस्तेमाल के लिए बेहद <link type="page"> <caption> महंगा और अव्यवहारिक</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/story/2005/03/050329_lip_piercing.shtml" platform="highweb"/> </link> होगा.
जर्नल ऑफ डेंटल रिसर्च में शोधकर्ताओं ने लिखा है कि वे मानव कोशिका को चूहे में डाल कर <link type="page"> <caption> संकर दांत</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/story/2005/01/050122_pizza_problem.shtml" platform="highweb"/> </link> बनाने में कामयाब रहे और इसकी जड़ मजबूत थी.
अगला कदम
ऐसा पहले भी देखा गया है कि जबड़े में सही कोशिकाओं के अंश को प्रत्यारोपित करने से बेहतर असली दांत तैयार किया जा सकता है.
अगला कदम यह होगा कि नए दांत को उगाने में मददगार साबित होने वाली मानव कोशिकाएं आसानी से उपलब्ध हों जाएं.
इस शोध के प्रमुख प्रोफेसर पॉल शार्प का कहना है कि दांत को उगाने में मददगार कोशिकाएं विज़डम टीथ यानी अकल दाढ़ के मुलायम हिस्से में पाई जा सकती हैं लेकिन उन पर पकड़ बनाना मुश्किल हो जाता है.
उनका कहना है कि एक उम्मीद थी कि एक दिन तकनीक मौजूदा दंत प्रत्यारोपण की प्रक्रिया की जगह ले सकती है लेकिन यह दांत की प्राकृतिक जड़ संरचना को दोबारा तैयार नहीं कर सकती. इसके अलावा जहां दांत लगाया जाता है वहां की <link type="page"> <caption> हड्डियों</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/07/120711_dog_bones_sdp.shtml" platform="highweb"/> </link> पर खाने या जबड़े के हिलने से भी असर पड़ता है.
सस्ता और सरल
वह कहते हैं, “अगर यह तरीका कारगर होता है तो इसका खर्च दंत प्रत्यारोपण के बराबर ही होगा. इसलिए हमें ऐसा करने का एक तरीका ढूंढ़ना होगा जो सरल और सस्ता भी हो.”
कार्डिफ़ यूनिवर्सिटी के हड्डी जीव विज्ञान और ऊतक इंजीनियरिंग के एक विशेषज्ञ प्रोफेसर एलेस्टर सोलन का कहना है कि यह अहम है, लेकिन मरीजों तक इसे उपलब्ध कराने की राह में कई बाधाएं होंगी.
उनका कहना था, “मसूड़े की कोशिकाओं का इस्तेमाल किया गया है और हकीकत यह है कि इससे एक जड़ की संरचना विकसित हो रही है. यह उत्साहजनक कदम है.”












