एक और ग्रह 'जहाँ पानी होने की संभावना'

खगोल शास्त्रियों के अनुसार सूरज की तरह पृथ्वी के सबसे नज़दीक मौजूद तारे के पांच ग्रह हैं. उनमें से एक ऐसा है जहां पानी होने की संभावना है और जहां जीवन मुमकिन है.
ये जानकारी एस्ट्रोनॉमी और एस्ट्रोफ़िज़िक्स के एक ऑनलाइन पेपर में छपी है. ताउ सेटी नाम के तारे के पाँच ग्रहों के बारे में, ग्रह खोजने के लिए जुटाई जा रही मौजूदा जानकारी से ही पता चला है.
इस तरह ये तारा अब अल्फ़ा सेंटौरी की तरह धरती के पास का एक तारा बन गया है जिसके पास अपने ग्रह हैं.
दोनों ही मामलों ये पाया गया कि इन ग्रहों के बारे में जानकारी टेलिस्कोप से नहीं मिली बल्कि इनके बारे में पता मेज़बान 'तारे' के प्रकाश पर इनके असर के कारण चला है.
एक तारे के इर्द-गिर्द ग्रह गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में चक्कर लगाते रहते हैं. लेकिन इस दौरान मुख्य तारे में भी थोड़ी बहुत हलचल होती रहती है.
मुख्य तारे की हल्की-फुल्की गतिविधि उसके द्वारा छोड़ी जा रही रोशनी के रंगों में हो रहे बदलावों के तौर पर पृथ्वी से दिखती है.
इस बदलाव को मापना एक मुश्किल और पेचीदा काम है क्योंकि सितारे की रोशनी अन्य कई कारणों से भी बदलती रहती है.
इसलिए ये बेहद ज़रुरी होता है कि इन सब वजहों के बीच उस बदलाव को ही मापा जाए जो ग्रह के कारण होता है.
शोध
अब हर्टफोर्डशायर विश्वविद्यालय के ह्यू जोंस और उनके सहयोगियों ने अपने 'नॉइज़ मॉडलिंग' पर और काम किया जिससे तारे की रोशनी में ग्रहों की वजह से होने वाली मामूली से मामूली हरकत को पकड़ा जा सके और उसके आँकड़ों का अध्ययन हो सके. इस काम की शुरुआत ताउ सेटी से हुई है.
बीबीसी से बातचीत करते हुए प्रोफ़ेसर जोंस ने कहा, ''ये एक ऐसा तारा है जिसके बारे में हमारे पास काफी जानकारी है, जितना कि किसी और तारे के बारे में नहीं है.''
ये एक अच्छा उदाहरण है कि, हम कितनी बारीक़ चीज़ों पर नज़र रख सकते हैं और मामूली से मामूली संकेत पकड़ सकते हैं.
इस टीम ने अपना ये काम ग्रहों की खोज में लगे अभियानों हार्प्स, आप्स और हाइरेज़ से मिले आंकड़ों की मदद से शुरु किया था.

इस तकनीक को विकसित करने के लिए कुछ नकली ग्रहों को भी इस पूरी प्रक्रिया में शामिल किया गया. इस तरह ये देखा गया कि तारों को लेकर जो आँकड़े थे उनमें इन नकली ग्रहों के संकेतों की वजह से क्या असर हुआ.
फिर इस पर ध्यान दिया गया कि किस तरह बाक़ी संकेतों को कम करके नक़ली ग्रहों की वजह से होने वाले परिवर्तनों को ज़्यादा से ज़्यादा उभारकर सामने लाया जाए.
प्रोफ़ेसर जोंस के अनुसार, ''ऐसा करके हमने एक ऐसी रणनीति बनाई जिससे हमें नक़ली ग्रहों के संकेत जानने का मौक़ा मिला लेकिन ये सब करते हुए हमने पाया कि हमें असली संकेत भी मिल रहे थे.''
ताउ-सेटी के पांचों ग्रहों में से कुछ पृथ्वी की आकार के दोगुने या छह गुने तक हैं. इनमें से एक का नाम 'एचडी 10700ई' है. ताउ सेटी से उसकी दूरी सूर्य से पृथ्वी की दूरी से आधी है.
अब चूंकि ताउ-सेटी का आकार सूरज से कम और मद्धिम है, इससे वहां जीवन होने की संभावना बढ़ जाती है.
अब तक जो भी आँकड़े मिले हैं, मुमकिन है कि वहां और भी ग्रह मौजूद हों.
ये भी पूरी तरह से स्पष्ट है कि हम चाहे जिस तरफ देखें और हमें तारों के चारों तरफ ग्रह नज़र आएंगे. इस सूची में अब तक 854 ग्रह शामिल हैं.
और ये संख्या हर नए अध्ययन के साथ बढ़ती जा रही है.












