अंधेरे को चीर कर देख पाएगा इंसान

विज्ञान की क्षमताएं
इमेज कैप्शन, वैज्ञानिक प्रगति से इंसानी क्षमताएं बढ़ रही हैं

मनुष्यों की ऐसी प्रजाति जो बिना थके काम कर सके और हर छोटी या बड़ी बात को याद कर सके. ये विज्ञान का फिक्शन लग सकता है लेकिन ऐसा संभव है.

विशेषज्ञों का मानना है कि मानवीय क्षमताओं पर इतनी तेज़ी से शोध हो रहा है कि इस तरह की धारणाएं सच हो सकती हैं, जिसके लिए हमें तैयार रहना होगा.

हालांकि याददाश्त खोने की बीमारी और अति सक्रिय बच्चों के लिए बाज़ार में कई तरह की दवाएं हैं ताकि मानसिक कमज़ोरी को दूर किया जा सके.

विशेषज्ञों का अनुमान है कि पंद्रह सालों में कुछ ऐसे छोटे उपकरण उपलब्ध होंगे जो मानव जीवन के सभी अनुभवों की रिकॉडिंग कर सकेंगे और जिन्हें हम अपनी याददाश्त खोने के बाद पलट कर देख सकेंगे.

चीर देगा अंधेरा

विशेषज्ञों का कहना है कि मशीनीकृत अंगों और इंजीनियरिंग में प्रगति से मनुष्य अंधेरे में भी देख पाएगा.

लेकिन जानकार ये चेताते हैं कि इस प्रगति की बड़ी कीमत भी चुकानी होगी जो केवल वित्तीय ही नहीं होगी.

चार पेशेवर संस्थान- द एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंस, द ब्रिटिश एकेडमी, द रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग और द रॉयल सोसाइटी में काम करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी क्षमताओं में होने वाली प्रगति से मनुष्यों के प्रदर्शन और सहायता एजेंसियों में सुधार तो होगा लेकिन इनके इस्तेमाल से गंभीर नैतिक, दार्शनिक, नियामक और आर्थिक मुद्दें उठेंगे.

इन चारों संस्थानों ने एक साझा रिपोर्ट में चेताया है कि इस तकनीकी विकास से होने वाले संभावित नुकसान पर तुरंत बहस करने की जरूरत है.

स्थायी समिति की अध्यक्ष प्रोफ़ेसर जेनीवरा रिचर्डसन का कहना है, ''कई तरह की तकनीकों का विकास हो रहा है और कुछ मामलों में तो इनका इस्तेमाल भी हो रहा है, ऐसे में हमारे काम करने के तरीकों को बदलने की संभावना है जो खराब भी हो सकता है और बढ़िया भी.''

तकनीकी विकास

जैसे-जैसे लोग उम्रदराज होते जाएंगे, मनुष्यों से बुढ़ापे में भी काम करने की उम्मीद की जाएगी.

लोग अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए अलग-अलग तरह की दवाओं का सेवन करते हैं.
इमेज कैप्शन, लोग अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए अलग-अलग तरह की दवाओं का सेवन करते हैं.

ऐसे में इस तकनीकी विकास से बुजुर्ग भी जवानों के बराबर काम कर सकेंगे.

लेकिन न्यू कास्ल की एक संस्था में प्रोफ़ेसर जैकी लीच स्कली का कहना है कि जो लोग तकनीकी विकास की इस लीक में शामिल नहीं होंगे उनके हाशिए पर जाने का खतरा होगा.

कई सर्वेक्षण बताते है कि परीक्षाओं के दौरान अपनी मस्तिष्क क्षमता को बढ़ाने के लिए छात्र स्मार्ट पिल का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में ये सवाल उठाता है कि क्या यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को इस बात पर जोर नहीं देना चाहिए कि छात्र ऐसी दवाओं का इस्तेमाल न करे, जैसा कि खिलाड़ियों को प्रतिबंधित दवाएं लेने से रोका जाता है.

कई लोग ये दवाएं इंटरनेट से खरीदते हैं और ये खतरनाक होता है क्योंकि उन्हें ये भी पता नहीं होता कि वे किस दवा का सेवन कर रहे हैं.

साथ ही इन दवाओं के लंबे समय बाद स्वास्थ्य पर होने वाले प्रभाव का पता भी नहीं चल पाता.

एक मेडिकल रिसर्च काउंसिल के डॉक्टर रॉबिन लवेल बेडज का कहना, "इस तरह का तकनीकी विकास अच्छा है लेकिन हमें उतनी ही सावधानी भी बरतनी होगी ताकि हम इस तकनीकी विकास का फायदा उठा सकें और इसके नुकसान से बच सकें."