क्या भारत में कभी छिड़ेगी ऐसी बहस?

भारत में 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन पर मुनाफाखोरी के आरोप राजनीतिक नेताओ से लेकर उद्योगपतियों पर भी लगे हैं और पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई की है.
जहाँ भारत में स्पेक्ट्रम आवंटन का विषय आवंटन या नीलामी जैसे मुद्दे में उलझा हुआ है, वहीं ब्रिटेन होने जा रही 4जी स्पेक्ट्रम की नीलामी के आसपास बहस के विषय कुछ और ही हैं.
ब्रिटेन में इस विषय पर बहस हो रही है कि इससे सरकार को मिलने वाले लगभग चार अरब पाउंड का इस्तेमाल किस तरह से किया जाए.
कुछ लोग जहां ब्रिटेन में नीलामी से होने वाली आय को देश की अर्थव्यवस्था बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करने की बात कर रहे हैं, तो कुछ लोग इसे विज्ञान और तकनीकी पर खर्च करने की वकालत कर रहे हैं.
ब्रिटेन में कैंपेन फॉर साइंस एंड इंजीनियरिंग के निदेशक इमरान खान इस राशि का इस्तेमाल विज्ञान-तकनीकी क्षेत्रों के लिए करने के पक्ष में हैं. उनके अनुसार,“हमें इस बात पर बहस करनी चाहिए कि इस पैसे को कहीं और खर्च करने की बजाय विज्ञान और तकनीक पर खर्च करना चाहिए. हमें इस बारे में दूरगामी योजना बनाने की जरूरत है.
तकनीक का इतिहास
इसकी सबसे बड़ी वजह भी हमें 4जी स्पेक्ट्रम तकनीक के इतिहास से ही मिलती है.
स्पेक्ट्रम की नीलामी इसलिए हो रही है ताकि हम मौजूदा रेडियो फ्रिक्वेंसीज को मोबाइल इंटरनेट की गति बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर सकें.
इन रेडियो फ्रिक्वेंसीज की खोज ब्रितानी वैज्ञानिक जेम्स क्लार्क मैक्सवेल ने की थी जिनका करियर ब्रिटेन की उच्च शिक्षा प्रणाली की देन था और उस प्रणाली के इस्तेमाल के बिना वो ऐसी ऐतिहासिक खोज न कर पाते.
मैक्सवेल की इस खोज का सबसे पहले ब्रिटेन में ही व्यावसायिक इस्तेमाल किया गया था. उसके बाद इटली के गुगलीमो मारकोनी ने पोस्ट ऑफिस की मदद से साल 1898 में चेल्म्सफोर्ड में पहली रेडियो फैक्ट्री बनाई.
मैक्सवेल की खोज के करीब 100 साल बाद ब्रितानी वैज्ञानिक सर टिम बर्नर्स ली ने 1990 में वेब की खोज की और आज इसका दायरा इतना बढ़ गया है कि इसी की गति बढ़ाने के लिए 4जी की जरूरत पड़ रही है.

इन उदाहरणों से हमें ये पता चलता है कि विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में उन्नति के लिए सरकारी निवेश बहुत जरूरी है.
अर्थव्यवस्था
दूसरे, तकनीकी क्षेत्र की इस उन्नति से समाज लाभान्वित होता है. समाज में रहने वाले लोगों की जीवन शैली बदल जाती है और साथ ही अर्थव्यवस्था में भी उछाल आता है.
तीसरे, निवेश से लंबी अवधि का सतत विकास प्राप्त होता है. रेडियो इसका बड़ा उदाहरण है. इससे न जाने कितनी और नई तकनीकों का जन्म हुआ जिससे बाजार का दायरा बढ़ा और नौकरियों में इजाफा हुआ. हमारा पुराना अनुभव यही है कि हमने विज्ञान और तकनीक पर जो भी खर्च किया, उसका हमें बहुत फायदा हुआ.
इसके लिए इमरान उदाहरण देते हैं कि पचास साल पहले जिस लेसर तकनीक की खोज की गई, आज डीवीडी से लेकर सर्जरी तक में उसका इस्तेमाल किया जा रहा है.
ऐसा अनुमान है कि ब्रिटेन में वर्ष 2003 में भी मोबाइल टेलीफोन का व्यवसाय लगभग 22 अरब पाउंड का था.
शोध
इसलिए देश में वैज्ञानिक तौर पर शिक्षित कर्मचारी होने चाहिए और ऐसा करने के लिए विज्ञान और गणित के शिक्षक भर्ती किए जाने चाहिए.
ब्रिटेन में ऐसा शोध होना चाहिए और ऐसे वैज्ञानिक होने चाहिए जिन्हें विश्व की बड़ी-बड़ी कंपनियाँ भर्ती करें. ये तभी संभव है जब विश्व की बेहतरीन वैज्ञानिक और शिक्षा सुविधाएँ ब्रिटेन में बनें."
इमरान खान के इस लेख के बाद ब्रिटेन में ये बहस जोर पकड़ रही है कि स्पेक्ट्रम नीलामी से मिलने वाली राशि विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र के बुनियादी ढाँचे में खर्च की जाए, ताकि इससे विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में नए शोध हों और उनका इस्तेमाल देश के विकास में हो सके.












