ताकि पति को पता न चले...

 बुधवार, 29 अगस्त, 2012 को 08:20 IST तक के समाचार
सर्जरी

पिछले वर्षों में ऐसी सर्जरी करवाने वाली लड़कियों की संख्या बढ़ी है

हरियाणा के छोटे शहर शाहबाद की रहने वाली एक 23-वर्षीय लड़की नहीं चाहती थी कि उसके पति को पता चले कि वो शादी से पहले ही यौन संबंध बना चुकी हैं.

वो कहती हैं, ''शादी तय हो चुकी थी. एक अजीब तरह का डर था कि अगर पति को पता चल गया तो पता नहीं क्या होगा. हमारे समाज में शादी से पहले कौमार्य भंग होने को अच्छा नहीं माना जाता. डर था कि शादी का अंजाम क्या होगा और फिर मेरे मां-बाप क्या सोचेंगे?''

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उन्होंने इस सर्जरी के बारे में सुना था जिससे वो अपनी 'वर्जिनिटी' या कुंवारापन दोबारा हासिल कर सकती हैं.

इंटरनेट पर थोड़ी मशक्कत के बाद अपने दोस्त के साथ वो पहुंच गई डॉक्टर के पास. वे बताती हैं, ''डॉक्टर ने मुझसे कुछ सवाल किए, जैसे कि मैं किस उम्र से सेक्स कर रही हूँ आदि और फिर मुझे सर्जरी का समय दे दिया.''

इस सर्जरी को डॉक्टरी भाषा में 'हाइमनोप्लास्टी सर्जरी' कहा जाता है. ये सर्जरी करा लेने के बाद उन्हें अब शादी को लेकर कोई चिंता नहीं है.

भारत तरक्की भले ही कर रहा है लेकिन कौमार्य को अभी भी बहुत महत्व दिया जाता है और इसकी वजह से कई बार शादी टूटने की नौबत आ जाती है.

बढ़ता चलन

"बड़ी मामूली सर्जरी है. एक घंटे के बाद वे चलकर अपने घर जा सकती हैं"

डॉ तेजिंदर भट्टी

सर्जरी करने वाले मोहाली स्थित फोर्टिस अस्पताल में सीनियर कंसंलटेंट और प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉक्टर कृष्ण कपूर कहते हैं कि इस सर्जरी का चलन काफी बढ़ रहा है.

उनका कहना है, ''पहले केवल बड़े शहरों से ही लोग इस तरह की सर्जरी करवाने आते थे. लेकिन अब इंटरनेट आदि के माध्यम से बढ़ रही जानकारी की वजह से छोटे शहरों की लड़कियां भी सर्जरी करवाने लगी हैं.''

उनका कहना है कि लगभग तीन साल पहले वे हर वर्ष 10 से 15 हाइमनोप्लास्टी सर्जरी किया करते थे करते थे लेकिन अब वे हर साल 30-35 सर्जरी करते हैं.

शादी के क़रीब

प्लास्टिक सर्जन डॉक्टर तेजिंदर भट्टी भी मानते हैं कि लोगों में जानकारी बढ़ने से ऐसी सर्जरी को करवाने वाली लड़कियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है.

उनका कहना है कि सर्जरी कराने वाली लड़कियों की उम्र आम तौर पर 22-27 साल के बीच होती है.

लगभग सभी मामलों में वे अपने दोस्त या बॉयफ्रेंड के साथ यह सर्जरी कराने जाती हैं और उनके घर वालों को इसके बारे में पता नहीं होता.

"कोई भी वैज्ञानिक प्रगति महिलाओं की भलाई के लिए होनी चाहिए न कि उनके शोषण के लिए. लेकिन देखा यह जा रहा है कि विज्ञान का इस्तेमाल उनके शोषण के लिए ज्यादा हो रहा है चाहे वो गर्भपात हो या वजाइना-टाइटनिंग यानी योनि का ढीलापन ख़त्म करना हो"

प्रोफ़ेसर नंदिनी सुंदर

डॉ भट्टी कहते हैं कि वो यह सलाह देते हैं कि शादी से कुछ सप्ताह पहले ही यह सर्जरी कराएं.

वो बताते हैं, ''बड़ी मामूली सर्जरी है. एक घंटे के बाद वे चलकर अपने घर जा सकती हैं.''

डॉक्टर कपूर कहते हैं, ''इसके बाद दो दिन का विश्राम करना होता है और थोड़ा बहुत परहेज़ भी.''

इस सर्जरी का खर्च आमतौर पर 30,000 से 50,000 रुपए के बीच आता है.

'नकारात्मक'

दिल्ली विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर कहती हैं कि वे इसे काफी नकारात्मक चलन के रुप में देखती हैं.

उनका कहना है कि जिस तरह से समाज बदल रहा है, उसमें यौन संबंध बनना कोई बड़ी बात नहीं है, अगर पुरुषों को इससे कोई परेशानी नहीं है तो महिलाओं को इसे छिपाने की ज़रूरत क्यों है.

वे कहती हैं, ''कोई भी वैज्ञानिक प्रगति महिलाओं की भलाई के लिए होनी चाहिए न कि उनके शोषण के लिए. लेकिन देखा यह जा रहा है कि विज्ञान का इस्तेमाल उनके शोषण के लिए ज्यादा हो रहा है चाहे वो गर्भपात हो या वजाइना-टाइटनिंग यानी योनि का ढीलापन ख़त्म करना हो."

अपना कौमार्य वापस पाने वाली लड़की की इस बारे में कुछ अलग राय है.

वे कहती हैं, ''दरअसल कई चीजें कहने में अच्छी लगती हैं लेकिन हकीकत बहुत अलग है. मुझे नहीं लगता कि अगर मैं अपने पति को इस बारे में बताऊंगी तो वो मुझे अपनाएगा.''

बहरहाल व्यावहारिक चिंता के आगे सिद्धांत कमज़ोर पड़ रहा है.

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