You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
शुक्रवार को होने वाला चंद्र ग्रहण क्यों है दुर्लभ, भारत में कहां-कहां दिखेगा ये नज़ारा?
5 मई को साल का पहला चंद्रग्रहण लगने वाला है. लेकिन ये पूर्ण नहीं बल्कि पेनुमब्रल चंद्र ग्रहण होगा. असल में चंद्र ग्रहण तीन तरह के होते हैं. पूर्ण चंद्रग्रहण, आंशिक चंद्र ग्रहण और पेनुमब्रल चंद्र ग्रहण.
पेनुमब्रल चंद्र ग्रहण क्या होता है?
ग्रहण लगने से पहले चंद्रमा पृथ्वी की उपछाया में प्रवेश करता है, जिसे अंग्रेजी में पेनुमब्रा कहते हैं.
यह पूर्ण चंद्रग्रहण नहीं होता इसलिए पृथ्वी पर चंद्रमा की छाया न पड़कर, उपछाया मात्र पड़ती है. यानी एक धुंधली-सी छाया नज़र आती है.
पेनुमब्रल चंद्र ग्रहण में चांद के आकार में कोई परिवर्तन नज़र नहीं आता.
यह बिल्कुल सामान्य दिनों की तरह दिखता है लेकिन आप ध्यान से देखेंगे तो इसका रंग हल्का मटमैला नज़र आएगा.
चंद्रग्रहण कैसे होता है?
हम सब जानते हैं कि पृथ्वी परिक्रमण और परिभ्रमण करती है.
परिक्रमण यानी पृथ्वी का सूर्य की परिक्रमा करना और परिभ्रमण यानी अपनी ही धुरी पर घूमना.
सूर्य की परिक्रमा के दौरान जब पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच में आ जाती है तब चंद्रग्रहण लगता है.
कब लगता है चंद्रग्रहण?
पूर्णिमा के दिन जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है तो उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है.
इससे चंद्रमा का छाया वाला भाग अंधकारमय हो जाता है और इस स्थिति में जब हम धरती से चांद को देखते हैं तो वह भाग हमें काला दिखाई पड़ता है.
इसी वजह से इसे चंद्र ग्रहण कहा जाता है.
कैसे देख सकते हैं चंद्रग्रहण?
चंद्र ग्रहण सूर्य ग्रहण के मुक़ाबले ज़्यादा व्यापक स्तर पर दिखाई देता है और इसे पृथ्वी पर रात में कहीं भी देखा जा सकता है.
सूर्य ग्रहण को देखने के लिए खास उपकरणों की ज़रूरत होती है लेकिन चंद्र ग्रहण के साथ ऐसा नहीं है. आप नग्न आंखों से भी चांद को देख सकते हैं.
इसे देखने के लिए टेलीस्कोप का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.
नासा समेत कई संस्थान इस चंद्रग्रहण का लाइवस्ट्रीम और फिर रिकार्डेड वीडियो भी चलाएंगे. आप अपनी सुविधा के अनुसार इन्हें देख सकते हैं.
भारत में अगला पूर्ण चंद्रग्रहण मार्च 2025 में होगा.
पांच मई को होने वाला चंद्र ग्रहण पूरे भारत में दिखेगा बशर्ते आसमान साफ़ हो.
भारत के अलावा शुक्रवार को ये ग्रहण एशिया, ऑस्ट्रेलिया, रूस, उत्तरी अफ़्रीका, रूस और यूरोप के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा.
दोनों अमेरिकी महाद्वीपों में ये ग्रहण नहीं दिखेगा.
सुपरमून, ब्लूमून और ब्लडमून क्या है?
सुपरमूनःसुपरमून वह खगोलीय घटना है जिसके दौरान चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होता है और 14 फ़ीसदी अधिक चमकीला भी. इसे पेरिगी मून भी कहते हैं. धरती से नजदीक वाली स्थिति को पेरिगी (3,56,500 किलोमीटर) और दूर वाली स्थिति को अपोगी (4,06,700 किलोमीटर) कहते हैं.
ब्लूमूनः यह महीने के दूसरे फुल मून यानी पूर्ण चंद्र का मौक़ा भी है. जब फुलमून महीने में दो बार होता है तो दूसरे वाले फुलमून को ब्लूमून कहते हैं.
ब्लडमूनः चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी की छाया की वजह से धरती से चांद काला दिखाई देता है. 31 तारीख को इसी चंद्रग्रहण के दौरान कुछ सेकेंड के लिए चांद पूरी तरह लाल भी दिखाई दिया. इसे ब्लड मून कहते हैं.
ये भी पढ़ें
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)