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आपके शरीर में आयरन कम है, ये कैसे पता चलता है
क्या आप अक्सर थकान और सांस लेने में तकलीफ़ महसूस करते हैं?
या कभी आपके दोस्तों ने आपसे कहा है कि आपकी त्वचा मुरझाई हुई सी लगती है.
अगर ऐसा है तो आपके ख़ून में आयरन की कमी हो सकती है जो इस दुनिया में पोषण से जुड़ी सबसे आम समस्या है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, दुनिया भर में लगभग 30 फ़ीसद लोग एनीमिया से जूझ रहे हैं.
ये एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की लाल रक्त कोशिकाओं में खनिज पदार्थों की कमी हो जाती है जिसकी वजह से कोशिकाओं तक कम मात्रा में ऑक्सीजन पहुंच पाती है.
लेकिन इस स्थिति की जांच और इलाज स्वयं नहीं करना चाहिए क्योंकि इस तरह के लक्षण न सिर्फ़ दूसरी समस्याओं के संकेत हो सकते हैं, बल्कि अतिरिक्त आयरन खाने से आपके लीवर को भी नुक़सान पहुंच सकता है.
डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?
• बेहद थकान और ऊर्जा की कमी होने पर
• सांस लेने में तकलीफ़ होने पर
• दिल की धड़कन बढ़ने पर
• त्वचा पर पीलापन आने पर
ब्रितानी नेशनल हेल्थ सर्विस और मायो क्लीनिक के मुताबिक़, ये एनिमिया के सबसे आम लक्षण हैं.
लेकिन कुछ दूसरे लक्षण भी हैं -
• सिरदर्द और चक्कर आना
• जीभ पर सूजन या दर्द होना
• बालों का ज़्यादा झड़ना
• कागज़ जैसी गैर-खाद्य पदार्थों को खाने की इच्छा होना
• मुंह में छाले पड़ना
• नाख़ूनों का ख़राब होना
• पैरों को बार-बार हिलाने की आदत होना
एनीमिया होने की वजह?
किसी भी शख़्स को एनीमिया होने की कई वजहें हो सकती हैं.
लेकिन इसकी मूल वजह डाइट में आयरन की कमी होना है क्योंकि हमारा शरीर अपने आप ये खनिज पैदा नहीं कर सकता. लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आपके शरीर में आयरन की कमी न हो और आयरन युक्त चीज़ें खाकर अपनी कमी की पूर्ति करना चाहते हैं तो आपको ये समझना होगा कि आपका शरीर हर तरह का आयरन ग्रहण नहीं कर सकता.
आयरन हेम और नॉन-हेम दो प्रकार का होता है. हेम आयरन लाल मांस, लिवर, अंडे और मछली से मांस-मछली से मिलता है जिसे आसानी से हज़म किया जा सकता है.
इसके साथ ही गहरे हरे रंग वाली पत्तेदार सब्ज़ियों जैसे पालक और दालों में भी आयरन पाया जाता है, लेकिन समस्या ये है कि ये नॉन-हेम किस्म का आयरन होता है.
इसका मतलब ये होता है कि आप सब्ज़ियों से मिले आयरन को ज़्यादा हज़म नहीं कर सकते. इसके साथ ही खनिज पदार्थों से युक्त ब्रेड और ब्रेकफ़ास्ट सिरियल जैसे ओट्स आदि में भी आयरन होता है, लेकिन ये भी हज़म करने वाले स्वरूप में नहीं होता है.
कॉफ़ी पीने से पहले इंतज़ार करें...
आप जिस तरह से अपना खाना तैयार करते हैं और उसके साथ आप क्या पीते हैं, उससे फ़र्क पड़ जाता है कि आप उसके साथ कितना आयरन ले रहे हैं.
इस बात को समझने के लिए बीबीसी ने न्यूट्रीशन साइंटिस्ट पॉल शार्प से बात की. पॉल शार्प ने किंग्स कॉलेज लंदन में इंसान की पाचन प्रक्रिया को समझने के लिए कुछ प्रयोग किए थे.
इस टेस्ट में भोजन पचाने में शामिल एंज़ाइम्स के असर और आंत की कोशिकाओं में होने वाले वाले केमिकल रिऐक्शन को दिखाया गया ताकि ये पता लगाया जा सके कि शरीर कितना आयरन ग्रहण कर पाता है.
पॉल शार्प ने अपने इस टेस्ट में ये दिखाया कि अगर आप नाश्ते के साथ संतरे का जूस लेंगे तो सिर्फ़ अनाज खाने की तुलना में आप अधिक आयरन लेंगे.
ऑरेंज जूस में विटामिन सी होता है और इससे शरीर के लिए खाने के साथ आयरन लेना आसान हो जाता है. लेकिन अगर आप सुबह के नाश्ते में अनाज के साथ कॉफ़ी पीते हैं तो आप कम आयरन ले पाएंगे.
सवाल उठता है कि ऐसा क्यों होता है? पॉल शार्प कहते हैं कि कॉफ़ी में पॉलीफ़ेनोल्स नाम का एक केमिकल होता है. इससे आयरन की घुलनशीलता कम हो जाती है. इसलिए अगर आप नाश्ते में संतुलित आहार ले रहे हों तो उसके साथ एक छोटा ग्लास ऑरेंज जूस लेना या फिर संतरा खाना आयरन के लिहाज से फ़ायदेमंद रहेगा.
अगर आप ऐसा करते हैं तो आपको नाश्ते के बाद कॉफ़ी लेने के लिए कम से कम 30 मिनट इंतज़ार करना चाहिए.
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हरे पत्ते वाली सब्ज़ियां
लेकिन तब क्या होगा जब आप आयरन अधिक प्राकृतिक स्रोतों से ग्रहण कर रहे हों?
पत्तागोभी आयरन का एक अच्छा स्रोत है, लेकिन हमें समझ में आया कि गर्म करने से इसके आयरन में कमी आ सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि संतरे की तरह ही पत्तागोभी में विटामिन सी अधिक मात्रा में होता है. जब आप इसे उबालते हैं तो विटामिन सी पानी में चला जाता है.
इसिलिए अगर आपको पूरा न्यूट्रीशन चाहिए तो इसे कच्चा या फिर स्टीम कर खाएं. आयरन और विटामिन सी से भरी दूसरी सब्ज़ियों के साथ भी ऐसा ही करना चाहिए.
लेकिन पालक इस मामले में अलग है. शार्प ने पाया कि उबालने से पालक 55 प्रतिशत अधिक इस्तेमाल लायक आयरन रिलीज़ करता है.
"पालक में ऑक्सेलेंट होते हैं जो आयरन को बांधते हैं."
शार्प बताते हैं, "जब हम पालक को उबालते हैं, तो वो पानी में ऑक्सेलेट छोड़ते हैं, और मौजूद आयरन के सोखे जाने की संभावना बढ़ जाती है.
आटा कैसा हो?
सबसे अच्छा ब्रेड सोरडो ब्रेड (जिसमें यीस्ट नहीं बनता) होता है. गेहूं में फ़ाइटिक एसिट होता है जिससे शरीर का आयरन सोखना कम हो जाता है.
सोरडो ब्रेड को बनाते समय ये ध्यान देना चाहिए कि फ़र्मेंटेशन की प्रक्रिया में फ़ाइटिक एसिड में टूट जाए ताकि बचा हुआ आयरन सोखे जाने के लिए मौजूद रहे.
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