You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
ये कुत्ते हैं ख़ास लेकिन पालने के लिए सावधानी रखना ज़रूरी
- Author, मनीष पांडे
- पदनाम, न्यूज़बीट रिपोर्टर
छोटे आकार के इन कुत्तों को कई लोग 'क्यूट' यानी आकर्षक बताते हैं. 'पग' कहे जाने वाले ये कुत्ते 'पेट लवर्स' के पसंदीदा हैं. लेकिन सेहत के मामले में ये आम कुत्तों से काफी अलग होते हैं.
'पग' को लेकर हुई एक नई स्टडी के मुताबिक सेहत के लिहाज से इन्हें सामान्य कुत्तों की कैटेगरी में रखना ठीक नहीं होगा.
लंदन के रॉयल वेटरनरी कॉलेज के अध्ययन के मुताबिक दूसरे सामान्य कुत्तों की तुलना में इनकी सेहत काफ़ी कमज़ोर होती है. इस अध्ययन में 4308 पग और 21,835 दूसरे कुत्तों की तुलना की गई थी.
ज़्यादा नाजुक मिज़ाज
ब्रिटेन में जो पग कुत्ते पाए जाते हैं, दूसरे कुत्तों की तुलना में उनके बीमारी से ग्रस्त होने की आशंका ज़्यादा होती है.
पग, बुलडॉग या बॉक्सर्स ब्रैकिसेफलिक कुत्ते होते हैं. वे अपनी खास शक्ल के लिए पाले जाते हैं. हाल के दिनों में ब्रिटेन में पग्स की लोकप्रियता काफी बढ़ी है. ब्रिटेन में 2005 से लेकर 2017 में इनकी लोकप्रियता में पांच गुना इजाफा हुआ है.
पग दूसरे कुत्तों की तुलना में ज्यादा नाजुक मिजाज होते हैं. दूसरे कुत्तों की तुलना में साल में उनके एक से अधिक बीमारियों से ग्रस्त होने की संभावना 1.9 गुना अधिक होती है.
कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में वेटरनरी सर्जन डॉ. माइफेनवी हिल का कहना है कि पग कुत्तों की सेहत के बारे में जो बातें पता चली हैं उनमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है.
वो कहती हैं कि इन कुत्तों का मस्तिष्क एक बहुत छोटी जगह में होता है. दूसरे मुलायम ऊतक भी काफी छोटी जगह में भरे होते हैं.
इससे पग को काफी दिक्कत होती है. इससे उन्हें सांस संबंधी बीमारियां हो जाती हैं. चर्म रोग और पीठ से जुड़ी बीमारियां भी हो जाती हैं.
पग कुत्तों की दिक्कत की वजह
पग में ब्रैकिसेफलिक ऑब्सट्रक्टिव एयरवे सिंड्रोम ( सांस से जुड़ी समस्या) सबसे ज्यादा देखी जाती है. डिजाइनर नस्ल के पग कुत्तों में इसकी आशंका 54 गुना तक बढ़ सकती है.
डॉ. हिल का कहना है कि पग के नथुने चौड़े नहीं होते है. ये इतने संकीर्ण होते हैं जैसे कोई स्ट्रॉ हो. ऐसे में उनके लिए सांस लेना मुश्किल काम होता है.
वह कहती हैं, ''पग की जो आम तस्वीर हमारे इर्द-गिर्द दिखती है, उसमें वो मुस्कुराता और जीभ निकाल कर हांफता हुआ लगता है. लेकिन ये खुश करने वाली तस्वीर नहीं हो सकती.
उनके मुताबिक, ''दरअसल उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही होती है. वे मुंह से सांस लेने की कोशिश करते हैं. क्योंकि वे नाक से सही तरीके से सांस नहीं ले पाते हैं."
पग को स्किनफोल्ड इन्फेक्शन भी हो सकता है. डॉ. हिल का कहना है कि उनमें स्किन ज्यादा होती है. अपने चेहरे के आकार की वजह से उन्हें ज्यादा स्किन की जरूरत होती है. ये स्किन इन्फेक्शन की वजह बन जाती है. उनमें घाव हो जाते हैं खुजलाहट बढ़ जाती है.
उनकी आकर्षक पूंछ, जिसे लोग पसंद करते हैं वो मैलफॉर्म्ड वर्टबा की वजह से स्लिप डिस्क की समस्या पैदा कर सकती है.
हालांकि रिसर्च में ये बताया गया है कि पग में कुछ चीजें कम पाई जाती हैं. जैसे दिल में थरथराहट,आक्रामकता और चोट की आशंका कम रहती है.
आंख मूंद कर न खरीदें
कम्पेनियन एनिमल एप्डिमियोलोजी में एसोसिएट प्रोफेसर और पग्स से जुड़े एक रिसर्च के प्रमुख लेखक डॉ. डेन ओ'नील का कहना है, '' हम जानते हैं कि पग्स के शरीर की संरचना की वजह से इन्हें स्वास्थ्य संबंधी कई दिक्कतें होती हैं. लेकिन लोगों को ये क्यूट लगते हैं.
इसलिए जब भी आप पालने के लिए कुत्ता खरीदने जा रहे हों तो पग की सेहत के इस पहलू के बारे में जरूर सोचें है. पग क्यूट होते हैं, सिर्फ ये सोच कर फैसला न लें.
ब्रिटिश वेटरनरी एसोसिएशन के प्रेसि़डेंट जस्टिन शोट्टन के कहना है, ''पग की सेहत से इतनी ज्यादा जुड़ी समस्याएं होने की वजह से हम ब्रैकिफेसल प्रजाति के कुत्तों को खरीदने की सलाह नहीं देंगे. ''
ध्यान रखना ज़रूरी
डॉ. हिल का कहना है कि पग्स खरीदने हों तो भरोसा रख कर खरीदें. लेकिन इस चीज पर गौर करें कि कहीं इसे सांस लेने में दिक्कत तो नहीं हो रही है. ये देखें कि कहीं इसकी सांस तो नहीं फूल रही है. सांस लेने के वक्त बहुत ज्यादा आवाज तो नहीं हो रही है.
गर्मियों के महीनों में पग्स पालने वालों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए. ऐसे कुत्ते की सांस की नली संकरी होती है. इसलिए इन्हें ज्यादा गर्मी लगती है. इसलिए उन्हें ठंडी जगह पर रखना चाहिए. ऐसे कुत्तों के वजन पर भी ध्यान रखना ज्यादा जरूरी है.
छोटे आकार के होने की वजह से ज्यादा वजन उन्हें और बीमार कर सकता है. डॉ. हिल कहती हैं, '' जानवर भी सोचते हैं और उनकी अपनी भावनाएं होती हैं. हमें कोशिश करनी चाहिए के वे ज्यादा खुशगवार, सेहतमंद और लंबी जिंदगी जिएं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)