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स्पेसएक्सः क्या अंतरिक्ष में मांस पैदा किया जा सकता है?
- Author, जेम्स क्लेटन
- पदनाम, बीबीसी टेक्नोलॉजी रिपोर्टर, उत्तर अमेरिका
जेफ़ बेजोस और एलन मस्क दोनों ही अंतरिक्ष में घर बसाना चाहते हैं. नासा भी मार्स की धूल भरी ज़मीन पर इंसान को भेजने की योजना पर काम कर रहा है. लेकिन अगर इंसान चांद पर या दूसरे ग्रहों पर घर बनाएगा तो वहां वो खाएगा क्या?
अंतरिक्ष में पौधे फल-फूल सकते हैं या नहीं इसे लेकर कई प्रयोग किए जा चुके हैं. और पिछले सप्ताह एक नया प्रयोग शुरु हुआ है जिसमें देखा जा रहा है कि क्या अंतरिक्ष में मांस पैदा किया जा सकता है या नहीं.
प्रयोगकर्ताओं को उम्मीद है कि भविष्य के अंतरिक्ष यात्रियों के लिए ये प्रयोग प्रोटीन का भरोसेमंद स्रोत देने का ज़रिया बन सकता है.
इस प्रयोग का सपना इसराइली कंपनी अलिफ फार्म्स ने देखा है जो सेल से मांस पैदा करने में महारत रखती है. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर जाने वाली पहली निजी अंतरिक्षयात्रियों की टीम ये प्रयोग कर रही है.
इसके आलोचकों का कहना है कि ये तरीका इतना ग़ैर भरोसेमंद है कि अंतरिक्ष यात्री सिर्फ़ इसके भरोसे नहीं रह सकते हैं. उनका कहना है कि अंतरिक्ष में मांस बनाना कभी भी धरती से मांस ले जाने से आसान नहीं होने वाला है.
मांस कैसे पैदा किया जाता है?
इस पैमाने पर सेल से मांस बनाना धरती पर भी आसान नहीं होगा. अलिफ़ फार्म्स ऐसी कई कंपनियों में से एक है जो कृत्रिम मांस बनाने के प्रयोग कर रही. हालांकि वो अंतरिक्ष में ऐसा करने वाली पहली कंपनी है.
कंपनी 'लैब ग्रोन मीट' जैसे वाक्य का इस्तेमाल नहीं करती है लेकिन वास्तव में ये प्रक्रिया किसी पारंपरिक फार्म की तरह बिलकुल भी नहीं दिखती है.
गाय के सेल ( हालांकि ये सेल किसी भी जानवर से लिए जा सकते हैं) को वो चीज़ें दी जाती हैं जो उनके बढ़ने के लिए ज़रूरी हैं जैसे एमिनो एसिड और कार्बोहाइड्रेट. ये सेल तब तक मल्टीप्लाई करते हैं जब तक मसल टिश्यू नहीं बन जाता और अंततः ये ऐसा मांस बन जाते हैं जिसे आप खा सकते हैं. इस प्रक्रिया को कल्टीवेशन या प्रोलिफेरेशन कहा जाता है.
इस मांस को ऐसे टैंकों में बनाया जाता है जो आपको किसी शराब फैक्ट्री में दिखाई देते हैं. मांस बनाने की इस प्रक्रिया में जानवर के जन्म चक्र (पैदा होना, बड़े होना और फिर स्लॉटर होना) को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है.
इसके समर्थकों का कहना है कि ये प्रक्रिया पर्यावरण के लिए फ़ायदेमंद साबित होगी, उदाहरण के तौर पर मीथेन का उत्सर्जन बहुत कम हो जाएगा.
अंतरिक्ष में मांस पैदा करने की क्या ज़रूरत है?
अलिफ़ फार्म्स के स्पेस कार्यक्रम की प्रमुख ज़वीका तामारी कहती हैं कि वैज्ञानिकों को नहीं पता है कि ज़ीरो ग्रैविटी में इस प्रक्रिया को पूरा किया जा सकता है या नहीं.
वो कहती हैं,"हमें पूर्व में हुए प्रयोगों से ये पता चलता है कि माइक्रोग्रैविटी वातावरण में बायोलाजी औरर फीजियोलॉजी बिलकुल अलग तरह से व्यवहार करती हैं. ऐसे में हमें नहीं पता, किसी को भी नहीं पता कि मीट पैदा करने की ये प्रक्रिया अंतरिक्ष में काम करेगी या नहीं."
8 अप्रैल को जब चार अंतरिक्ष यात्रियों ने स्पेसएक्स के रॉकेट में अंतरराष्ट्रीय अंतरक्षि केंद्र के लिए उड़ान भरी तो उनके साथ जूतों के डिब्बे जितना बड़ा एक कंटेनर भी था जिसमें जानवर के सेल और उनके बढ़ने के लिए ज़रूरी हर चीज़ मौजूद थी.
लैरी कोनोर, ईटन स्टिब्बे, मार्क पैथी को कैनेडी स्पेस स्टेशन से लांच किया गया था, उनके साथ पूर्व एस्ट्रोनॉट माइकल लोपेज एलेग्रिया भी हैं. उन्हें 24 अप्रैल को अंतरिक्ष में लौटना था, इसके बाद इन सेल का विश्लेषण किया जाएगा.
क्या फायदेमंद होगा अंतरिक्ष में मांस पैदा करना?
अगर ये प्रयोग कामयाब भी रहा तब भी इससे ये साबित नहीं होगा कि अंतरिक्ष में मांस पैदा किया जा सकता है. यानी तब भी हो सकता है कि ये फायदेमंद ना हो.
लोकल सुपरमार्केट भी सेल से बने मीट से भरे पड़े नहीं होते हैं और उसके कारण हैं. हालांकि इस इंडस्ट्री में करोड़ों ड़ॉलर का निवेश हो चुका है लेकिन ये ऐसा खाना है जिसे बड़े पैमाने पर पैदा करना आसान नहीं है.
अलिफ फार्म इसराइल में रेस्त्रां में मीट देने के लिए इसराइल में अनुमति का इंतज़ार कर रही है. ये ऐसा भोजन है जो अभी धरती पर भी स्थापित नहीं हुआ है, अंतरिक्ष की बात ही बहुत दूर की है.
अंतरिक्ष में मांस पैदा करने की कई व्यवहारिक चुनौतियां हैं. इनमें सबसे पहली है स्टेरिलिटी की.
बर्कले में कैमिकल इंजीनियर डेविड हमबर्ड कहते हैं, "जानवरों के सेल बहुत लंबे समय में उगते हैं."
हमबर्ड कहते हैं, "यदि सेल के कल्चर में बैक्टीरिया या फंगस आ जाते हैं तो वो ऐनिमल सेल के मुकाबले में बहुत तेज़ी से बढ़ेंगे और उस पर हावी हो जाएंगे. ऐसे में आप ऐनिमल सेल नहीं पैदा कर रहे होंगे."
हालांकि अलिफ़ फार्म्स का कहना है कि स्टेरिलीटी की समस्या का समाधान कर लिया जाएगा, ख़ासकर अंतरिक्ष में जहां बहुत सीमित पैमाने में मीट पैदा किया जाएगा. लेकिन मंगल पर रह रह रहे समुदाय में अगर कुछ दूषित होता है तो ये भयावह होगा. ये धरती पर सूखा पड़ जाने जैसा होगा.
अलिफ़ फार्म्स का तर्क है कि अंतरिक्ष में खाना पहुंचाना बहुत महंगा है.
इसे लेकर आंकड़े अलग-अलग हैं लेकिन नासा ने साल 2008 में अनुमान लगाया था उसके मुताबिक धरती की कक्षा में सिर्फ़ एक पाउंड (आधा किलो से कम) वज़न भेजने पर ही दस हज़ार डॉलर से अधिक ख़र्च होते हैं. मंगल ग्रह पर इतना ही भोजन भेजने पर इससे कई गुणा अधिक पैसा ख़र्च होगा.
तमारी कहती हैं, "मंगल ग्रह धरती से करोड़ों किलोमीटर दूर है. ऐसे में वहां अपना भोजन पैदा करना बहुत फ़ायदेमंद होगा."
हालांकि हमबर्ड इस संभावित फ़ायदे से सहमत नहीं हैं.
वो कहते हैं, "ये सेल जो स्वयं खाने योग्य पदार्थों से पैदा होते हैं. इनमें शुगर, एमिनो एसिड और पानी लगता है. ऐसे में पैदा होने वाले मांस की कैलोरी वैल्यू इस पर आई लागत से कम ही होगी."
"सबसे अच्छी स्थिति में आप कुल कैलोरी वैल्यू का 25 प्रतिशत ही प्राप्त कर सकेंगे और उसे खा सकेंगे. ऐसे में सवाल ये है कि आप उतनी कैलोरी अंतरिक्ष में लेकर ही क्यों जाएंगे और 75 प्रतिशत को यूं ही ख़र्च कर देंगे."
लेकिन लंबी अवधि के अंतरिक्ष मिशन की योजना बनाते हुए कई और चीज़ों का ध्यान रखा जाता है, जैसे की अंतरिक्षयात्री की सुरक्षा.
केरेन नाइबर्ग पूर्व अंतरिक्ष यात्री हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर पांच महीने बिताए हैं. वो अब अलिफ़ फार्म्स के ए़़डवायज़री बोर्ड में हैं. वो कहती हैं कि यात्री के शारीरिक स्वास्थ्य में भोजन की अहम भूमिका है.
वो कहती हैं, "खाना सफेद बैग में होता है जिसे हमें मिल्क पाउडर और ऐसी ही दूसरी चीज़ों की तरह हाइड्रेट करना पड़ता है. मैं लहसुन और ओलिव ऑयल की महक को मिस कर रही थी, क्योंकि ये हमारे पास होता ही नहीं है. ऐसे में कोई भी चीज़ जो हमें एक तरह से धरती पर ले जाए, मुझे लगता है कि अच्छी ही होगी."
नाइबर्ग मानती हैं कि यदि अंतरिक्ष यात्रियों को लंबे समय तक धरती से दूर रहना हो तो उनके लिए ताज़ा सब्ज़िया और दूसरी खाद्य सामग्री बहुत अहम है.
निश्चित तौर पर अगर इंसान लंबे समय तक मंगल ग्रह पर रहना चाहता है तो अंतरिक्ष यात्रियों को सेहतमंद और स्वादिष्ट भोजना कराना अहम हो जाएगा.
अंतरिक्ष में मांस पैदा हो सकता है, इसे साबित करना एक बात है लेकिन इसे भरोसेमंद और खाद्य सामग्री का विकल्प बनाना बिलकुल ही अलग बात है.
अलिफ़ फार्म्स की उम्मीदें बहुत बड़ी हैं. लेकिन कंपनी के लिए बड़ा सवाल ये है कि क्या धरती पर मांस को बड़े पैमाने पर पैदा किया जा सकता है या नहीं.
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