बृहस्पति और शनि की चार सौ साल बाद हुई मुलाकात

    • Author, विक्टोरिया गिल
    • पदनाम, विज्ञान संवाददाता, बीबीसी न्यूज़

सौर मंडल के दो ग्रह बृहस्पति और शनि चार सौ साल बाद सोमवार को इतने करीब आए कि दोनों के बीच की दूरी महज 0.1 डिग्री रह गई.

वैज्ञानिकों के मुताबिक इन्हें नंगी आँखों से भी देखा जा सकता है और दूरबीन या टेलीस्कोप से भी.

ये खगोलीय घटना 17 जुलाई 1623 के बाद हो रही है.

इसके बाद ये नजारा 15 मार्च 2080 को दिखाई देगा. इसके अलावा आज साल का सबसे छोटा दिन है.

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का कहना है कि हमारे सौरमंडल में दो बड़े ग्रहों का नजदीक आना दुर्लभ नहीं है.

यूँ तो बृहस्पति ग्रह अपने पड़ोसी शनि ग्रह के पास से हर 20 साल पर गुजरता है, लेकिन इसका इतने नजदीक आना ख़ास है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि दोनों ग्रहों के बीच उनके नज़रिए से सिर्फ 0.1 डिग्री की दूरी रह जाएगी, हालाँकि तब भी ये दूरी करोड़ों किलोमीटर की होगी.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैम्ब्रिज के इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोनॉमी में डॉक्टर क्रोफॉर्ड ने बीबीसी को बताया, “मौसम बहुत अच्छा नहीं लग रहा है इसलिए ये एक क़ीमती मौका है.”

अगर मौसम की स्थिति अनुकूल रहती है तो ये आसानी से सूर्यास्त के बाद दुनिया भर में देखा जा सकता है.

कहाँ और कब दिखेगा

इस घटना का सबसे बेहतरीन नज़ारा सोमवार रात को ब्रिटेन के उत्तरी हिस्से में देखने को मिलेगा क्योंकि वहां आसमान साफ होगा.

ये नज़ारा दक्षिणी इलाक़ों में उतना साफ नहीं दिखाई देगा क्योंकि आसमान में ज़्यादातर बादल छाए रहेंगे.

ग्रहों के खगोलविद डॉक्टर जेम्स ओडोनोह्यू ने ट्वीट करके बताया कि कहां पर और कितने बजे आसमान में बृहस्पति और शनि सबसे नज़दीक होंगे.

क्या ये बेथलेहम का तारा है?

कुछ खगोलशास्त्रियों और धर्मशास्त्रियों का ऐसा ही मानना है.

वर्जिनिया में फेरम कॉलेज में धर्म के प्रोफेसर एरिक एम वैंडेन ईकल ने एक लेख में कहा है कि ये घटना जिस समय हो रही है उसके कारण बहुत से अनुमान लगाए जा सकते हैं कि ‘‘क्या ये वही खगोलीय घटना हो सकती है जैसा कि बाइबल में है, जो घटना ज्ञानी व्यक्तियों को जोसफ, मेरी और नवजात शिशु जीसस के पास लेकर गई थी.’’

यह कहा जाता है कि ईसा मसीह के जन्म के समय आसमान में एक तारा निकला जिसने लोगों को ईसा मसीह के जन्म की सूचना दी और वहां पहुंचने का रास्ता दिखाया. इसे देखकर पूरब से तीन बुद्धिमान राजा भी उनको भेंट देने, उनका सम्मान करने बेथलेहम पहुंचे.

इसे बेथलेहम का तारा या क्रिसमस तारा भी कहा जाता है. इसे एक दैवीय घटना की तरह बताया जाता है.

डॉक्टर क्रोफॉर्ड कहते हैं, ‘‘दो हज़ार साल पहले लोग इस बारे में बहुत कुछ जानते थे कि रात में आकाश में क्या हो रहा है, तो यह असंभव नहीं है कि बेथलेहम का तारा इस तरह दो ग्रहों के पास आने की घटना जैसा हो.’’

कितना दुर्लभ है

सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हुए ग्रहों का एक-दूसरे के नज़दीक आना दुर्लभ घटना नहीं है लेकिन ये घटना कुछ खास है.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ मैनचेस्टर में एस्ट्रोफिजिसिस्ट प्रोफेसर टिम ओब्रायन कहते हैं, ‘‘ग्रहों को एक-दूसरे के नज़दीक देखना बहुत अच्छा लगता है, ऐसा अक्सर होता है लेकिन ग्रहों का इस घटना के जितना नज़दीक आना बेहद अद्भुत है.’’

सौरमंडल में मौजूद दो बड़े ग्रह और कुछ रात में दिखने वाले चमकीले पिंड भी पिछले 800 सालों में इतने नज़दीक नहीं आए हैं.

प्रोफेसर ओब्रायन कहते हैं, ‘‘ये ग्रह दक्षिण-पश्चिम इलाक़े में स्थापित हो रहे होंगे इसलिए आपको आसमान में अंधेरा होते ही वहां से निकलना होगा.’’

‘‘हममें से कोई भी अगले 400 सालों तक धरती पर नहीं रहने वाला है इसलिए मौसम पर नज़र बनाए रखें और मौका मिले तो बाहर आकर इस नज़ारे को देखें.’’

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