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भारतीय मूल के सुंदर पिचाई के हाथ आएगा गूगल का कंट्रोल
गूगल के सह-संस्थापक लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन गूगल और एल्फाबेट कंपनी के अध्यक्ष का अपना पद छोड़ने वाले हैं.
पेज ओर सर्गेई गूगल की मुख्य कंपनी एल्फ़ाबेट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और अध्यक्ष के तौर पर अपने पद से इस्तीफ़ा देंगे.
कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा है कि दोनों कंपनियों का काम उनके बाद भारतीय मूल के सुंदर पिचाई संभालेंगे.
पिचाई फिलहाल गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं, वो एल्फ़ाबेट के भी मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पद संभालेंगे.
लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन का कहना है कि वो मानते हैं कि वक्त आ गया है जब उन्हें अपने परिवारिक दायित्व निभाने हैं. हालांकि दोनों कंपनी के बोर्ड में रहेंगे.
21 साल पहले यानी 1998 में सिलिकॉन वैली (कैलिफ़ोर्निया) की एक गराज में गूगल बनी थी. इसके बाद 2015 में कंपनी में कई बड़े बदलाव किए गए और एल्फ़ाबेट को इसकी मूल कंपनी के रूप में बनाया गया. गूगल आज दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार है.
एल्फाबेट का काम था कि केवल सर्च के दायरे से आगे आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की तरफ पैर पसारती गूगल के काम को "अधिक पारदर्शी और अधिक ज़िम्मेदार" बनाया जाए.
एल्फाबेट के अस्तित्व में आने के बाद पेज और सर्गेई ने इसका कार्यभार संभाला. उनका कहना था कि नई परियोजनाओं की तरफ ध्यान देने के लिए उन्होंने गूगल से मूल कंपनी से जाने का फ़ैसला किया.
लेकिन मंगलवार को एक ब्लॉग में लिखा 46 साल के पेज और सर्गेई ने एल्फाबेट से दूरी बनाने के फ़ैसले की घोषणा की.
बयान में उन्होंने कहा कि वो "सीधे तौर पर बोर्ड के सदस्य के तौर पर कंपनी से जुड़े रहेंगे, कंपनी के शेयरहोल्डर बने रहेंगे" लेकिन कंपनी के "प्रबंधन में बदलाव करने का प्राकृतिक वक्त आ गया है".
"हम कभी कंपनी के प्रबंधन की भूमिका में नहीं थे और हमें लगता है कि कंपनी को चलाने के कोई और बेहतर तरीका हो सकता है. अब न एल्फाबेट और गूगल को दो-दो मुख्य कार्यकारी अधिकारी चाहिए न ही अध्यक्ष चाहिए."
पेज और सर्गेई का कहना है कि दोनों कंपनियों को चलाने के लिए सुंदर पिचाई से बेहतर व्यक्ति कोई नहीं हो सकता.
47 साल के पिचाई का जन्म भारत में हुआ है. उनकी पढ़ाई भी यहीं हुई है जिसके बाद वो आगे की पढ़ाई करने के लिए स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और फिर पेन्सिल्वेनिया यूनिवर्सिटी चले गए. 2004 में पिचाई ने गूगल कंपनी ज्वाइन की.
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