चंद्रयान 2 सफलता पूर्वक चंद्रमा की कक्षा में पहुंचा

भारतीय अंतरिक्ष मिशन चंद्रयान 2 पृथ्वी की कक्षा से निकलने के बाद मंगलवार की सुबह सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कर गया.

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने एक बयान जारी कर कहा है कि इस जटिल ऑपरेशन के बाद अंतरिक्ष यान को चंद्रमा के ध्रुवों के ऊपर अंतिम कक्षा में प्रवेश कराया जाएगा, जहां चंद्रमा की सतह से इसकी दूरी 100 किलोमीटर होगी.

अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ट्वीट करके इसरो ने बताया है कि चंद्रयान 2 आने वाले 7 सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा.

तीन लाख 84 हज़ार किलोमीटर की दूरी तय करके चांद की कक्षा में पहुंचा है. ये चंद्रयान 2 के लिए काफ़ी जटिल ऑपरेशन था.

लैंड करने से पहले चंद्रयान 2 के लूनर कैप्चर मिशन में सफलता हासिल करना काफ़ी अहम था क्योंकि ज़रा सी चूक एक बड़ा ख़तरा पैदा कर सकता था.

विज्ञान से जुड़े मामलों के जानकार पत्रकार पल्लव बागला ने बीबीसी संवाददाता गुरप्रीत सैनी कहा कि 'अगर चंद्रयान की रफ़्तार कम होती तो चांद की गुरुत्वाकर्षण शक्ति यान को पूरी ताक़त से अपनी ओर खींचता और ऐसी स्थिति में चंद्रयान 2 चंद्रमा की सतह से टकराकर चकनाचूर हो सकता था.'

लूनर कैप्चर मिशन में सफलता के बाद अब चंद्रयान 2 को चांद की सतह पर उतारना एक बड़ी चुनौती होगी.

बागला का कहना है कि अगर ये मिशन सफल हो जाता है तो इसके बाद चंद्रयान 2 को चांद की और कई कक्षाओं में ले जाया जाएगा. इसमें रॉकेट फ़ायर किए जाएंगे.

फिर धीरे-धीरे उसकी ऑर्बिट को 100 किलोमीटर किया जाएगा. इसके बाद ऑर्बिट को 20 किलोमीटर किया जाएगा. इसके बाद लूनर लैंडर को यान से हटाकर चांद की सतह की ओर छोड़ा जाएगा.

लेकिन इसरो से पहले दुनिया की दूसरी अंतरिक्ष एजेंसियां भी इस मिशन को अंजाम दे चुकी हैं.

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