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चंद्रयान-2 की तकनीकी कारणों से लॉन्चिंग टाली गई, जल्द होगी नई तारीख़ की घोषणा
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने तकनीकी कारणों से चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग को टाल दिया है.
इसरो सोमवार रात 2 बजकर 51 मिनट पर श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) से चंद्रयान-2 को लॉन्च करने वाला था. इसरो ने कहा है कि वह जल्द ही नई तारीख़ का ऐलान करेगा. इसकी जानकारी उसने ट्वीट कर दी.
उसने ट्वीट में लिखा है कि यह फ़ैसला सावधनी बरतते हुए लिया गया है.
चंद्रयान-1 की कामयाबी के बाद इसरो ने चंद्रयान-2 की योजना बनाई थी और यह चंद्रयान-2 चंद्रमा की उस सतह पर जाएगा जहां आज तक कोई देश नहीं पहुंच पाया है. चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा.
चंद्रयान-2 भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए बेहद महत्वपूर्ण समझा जा रहा है. इसकी अहमियत को ध्यान में रखते हुए इसकी लॉन्चिंग के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी श्रीहरिकोटा में मौजूद थे.
इसरो ने कहा है कि उसका लक्ष्य चांद को समझना और भारत एवं मानवता के लिए खोज करना है.
कैसे लॉन्च होना था चंद्रयान-2
3.8 टन वज़नी चंद्रयान-2 को 640 टन वज़न के जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट द्वारा अंतरिक्ष में ले जाया जाना था. इस रॉकेट को 'बाहुबली' नाम भी दिया गया था. इसे भारत का सबसे ताक़तवर रॉकेट कहा जाता है जो तकरीबन 15 मंज़िला इमारत जितना ऊंचा है.
इस रॉकेट को तीसरी बार किसी मिशन में इस्तेमाल किया जाना था.
चंद्रयान-2 का सबसे ख़ास मक़सद चंद्रमा की सतह पर पानी की खोज करना है. लॉन्चिंग के तक़रीबन दो महीने बाद 3.84 लाख किलोमीटर की यात्रा पूरी करके चंद्रयान-2 चांद पर पहुंचेगा.
'मेड इन इंडिया' है चंद्रयान-2
चंद्रयान-2 में ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर हैं. एक ख़ास बात इस मिशन की यह भी है कि इसके ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर भारत में ही बने हैं.
भारत अगर इस मिशन में क़ामयाब होता है तो वह चांद की सतह पर सॉफ़्ट लैंडिंग करने वाले देशों की फ़हरिस्त में शामिल हो जाएगा. अब तक चांद की सतह पर अमरीका, रूस और चीन सॉफ़्ट लैंडिंग कर चुके हैं.
चंद्रमा पर पहुंचने के बाद चंद्रयान-2 का रोवर जिसे 'प्रज्ञान' नाम दिया गया है वह पृथ्वी के 14 दिनों तक परीक्षण करेगा.
चंद्रयान-2 के अलावा भारत का अगला सबसे बड़ा मिशन गगनयान है. जिसके तहत 2022 तक मानव को अंतरिक्ष में भेजना है.
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