LUNG CANCER की वो बीमारी जिसकी वजह से गई मंत्री अनंत कुमार की जान

फेफड़े का कैंसर

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    • Author, सरोज सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

साल 2018 में कर्नाटक के विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार के दौरान केन्द्रीय संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार को लोगों और पत्रकारों ने कई बार खांसते हुए देखा था. ये मई-जून महीने की बात है.

चुनाव खत्म होते ही, जब अनंत कुमार ने डॉक्टरों से इलाज कराया तो पता चला कि उन्हें फेफड़ों का कैंसर है. फिर सात महीने के भीतर ही ख़बर आई कि संसदीय कार्य मंत्री एनएच अनंत कुमार नहीं रहे.

अनंत कुमार के कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि कैंसर और संक्रमण की वजह से उनका निधन हो गया है. वे पिछले कुछ दिनों से आईसीयू में भर्ती थे और वेंटिलेंटर पर थे.

अनंत कुमार का इलाज बेंगलुरु के श्री शंकरा कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में चल रहा था. इसी अस्पताल में खांसी के इलाज के दौरान उन्हें कैंसर का पता चला था. इसके बाद इलाज के लिए वो अमरीका भी गए थे.

बीस दिन पहले ही वो अमरीका से लौटे थे और शंकरा अस्पताल में ही भर्ती थे.

फेफड़ों के कैंसर की वजह

अनंत कुमार

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फेफड़ों के कैंसर को समझने से पहले जरूरी है ये समझें कि कैंसर में आखिर होता क्या है?

दिल्ली के धर्मशिला कैंसर एंड रिसर्च हॉस्पिटल के डॉक्टर अंशुमन कुमार के मुताबिक, "शरीर में मौजूद सेल यानी कोशिकाओं की एक विशेषता होती है. एक उम्र के बाद वो खुद नष्ट हो जाती हैं. लेकिन कैंसर की बीमारी के बाद शरीर के उस अंग विशेष के सेल की वो विशेषता खत्म हो जाती है. वो कोशिकाएं मरती नहीं बल्कि दो से चार, चार से आठ के हिसाब से बढ़ती हैं. उनके स्वत: नष्ट होने की क्षमता खत्म हो जाती है. शरीर के जिस अंग की कोशिकाओं में ये दिक्कत आने लगती है, उसी अंग को कैंसर की उत्पत्ति की जगह माना जाता है."

डॉक्टर अंशुमन के मुताबिक फेफड़ों के कैंसर की तीन वजह होती हैं. पहली तंबाकू का सेवन या स्मोकिंग. सिगरेट पीने और तंबाकू के सेवन का सीधा संबंध फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों से होता है. इससे लंग कैंसर तक का ख़तरा होता है.

दूसरी वजह है हवा में मौजूद प्रदूषण. डॉक्टर अंशुमन कहते हैं इन दिनों चाहे कारखानों से फैल रहा प्रदूषण हो या फिर डीजल गाड़ियों से निकलने वाला धुंआ, सबसे बेंजीन गैस निकलती है. यही गैस हवा को प्रदूषित करती है जिससे फेफड़ों के कैंसर का ख़तरा होता है.

तीसरी वजह है जेनेटिक यानी अनुवांशिक. यानी शरीर में मौजूद जीन में बदलाव की वजह से भी इस तरह का कैंसर होता है.

प्रदूषण

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अनंत कुमार को किस वजह से हुआ फेफड़ों का कैंसर?

बेंगलुरु के शंकरा अस्पताल के निदेशक डॉक्टर बीएस श्रीनाथ के मुताबिक, "अनंत कुमार किसी भी प्रकार से तंबाकू का सेवन नहीं करते थे. उन्हें सिगरेट, सिगार या शराब पीने का कोई शौक नहीं था. इसलिए अनंत कुमार के कैंसर को पहली वजह से नहीं जोड़ा जा सकता है. न ही जेनेटिक या अनुवांशिक कारणों से उनके कैंसर का कोई लेना देना है."

अनंत कुमार केन्द्रीय मंत्री थे, ज्यादातर वक्त दिल्ली में रहना पड़ता था. दुनियाभर में दिल्ली के ख़तरनाक प्रदूषण के स्तर की चर्चा जोरों पर हैं.

"कई बार कैंसर की वजह पता नहीं चल पाती. इसी साल जून में उन्हें लंग कैंसर है - इसका पता चला था. राजनीति से जुड़े थे, नेता थे कई जगहों पर उनका आना-जाना लगा रहता था. उन्हें बंद कमरे में रहने की सलाह भी नहीं दी जा सकती थी. लेकिन उनका जब कैंसर डिटेक्ट हुआ तब वो एडवांस स्टेज में था." डॉक्टर श्रीनाथ सीधे इस सवाल का कोई जवाब नहीं देते.

लेकिन अपनी बात खत्म करने से पहले वो आगे कुछ वाक्य और जोड़ते हैं.

"प्रदूषण और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का सीधा संबंध है इससे कोई इंकार नहीं कर सकता है. सलाह जरूर दी जाती है कि फेफड़े से जुड़ी बीमारी वाले प्रदूषण की जगहों से दूर रहे. लेकिन उनके कैंसर का सीधा संबंध था, ये मैं नहीं कहूंगा."

लंग कैंसर के लक्षण और प्रकार

डॉक्टरों के मुताबिक लंग कैंसर दो प्रकार के होते हैं- स्मॉल सेल कैंसर और नॉन स्मॉल सेल कैंसर.

स्मॉल सेल लंग कैंसर तेजी से फैलता है जबकि नॉन स्मॉल सेल लंग कैंसर, स्मॉल सेल लंग कैंसर के मुकाबले कम तेजी से फैलता है.

कैंसर पर जागरुकता के लिए डॉक्टरों की एक पहल है इंडिया अगेंस्ट कैंसर. इस बेवसाइट के मुताबिक:

•अगर तीन हफ्तों तक आपको खांसी है जो ठीक नहीं हो रही.

•बलगम में खून आ रहा हो.

•सीढ़ियां चढ़ने उतरने में सांस फूलने लगती है.

•सीने में दर्द की शिकायत रहती हो.

•या फिर सब कुछ ठीक होने के बाद भी वज़न लगातार घट रहा है.

तो आपको लंग कैंसर के इलाज के लिए डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए. ये लंग कैंसर के शुरूआती लक्षण हो सकते हैं.

लेकिन अगर लंग कैंसर शरीर के दूसरे हिस्से जैसे दिमाग तक फैल चुका है, तो इसकी वजह से शरीर के किसी अंग को लकवा मार सकता है. अगर कैंसर किडनी तक फैल जाए तो हो सकता है कि जॉन्डिस यानी पीलिया की बीमारी हो जाए.

कैंसर

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कैंसर के स्टेज

डॉक्टर अंशुमन कहते हैं कि हर कैंसर की तरह ही फेफड़ों के कैंसर में भी तीन स्टेज होते हैं.

धुम्रपान

शुरुआती स्टेज या अर्ली स्टेज - जब कैंसर की शुरुआत होती है. शरीर के किसी एक अंग में इसकी कोशिकाएं दो दूनी चार के अंदाज़ में जब बढ़ना शुरू होती हैं. इस स्टेज में ऑपरेशन से शरीर का एक लंग या हिस्सा हटाया जा सकता है जिसमें कैंसर के लक्षण पाए गए हों.

इंटरमीडिएट या बीच का स्टेज - जब कैंसर सेल शरीर के एक अंग से दूसरे अंग में फैलने लगते हैं. इस स्टेज में कीमो थेरेपी, रोडियो थेरेपी और ऑपरेशन मिलाकर इलाज चलता है.

एडवांस स्टेज - जब शरीर के दूसरे हिस्सों में कैंसर कोशिकाएं पूरी तरह फैल जाती है. इस स्टेज में मरीज के ठीक होने की गुंजाइश न के बराबर होती है लेकिन कीमो थेरेपी से इलाज चल सकता है.

अनंत कुमार को जब कैंसर का पता चला तो उनको एडवांस स्टेज का फेफड़ों का कैंसर था. लेकिन कीमो थेरेपी से इलाज नहीं चल रहा था. वो केवल दवाइयां ही ले रहे थे. ऐसा डॉक्टर श्रीनाथ का दावा है.

कैंसर

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इलाज के लिए अमरीका क्यों?

चाहे अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे हों या क्रिकेटर युवराज सिंह, कैंसर के इलाज के लिए कोई भी बड़ा नाम देश में इलाज नहीं कराता. सब इलाज के लिए विदेश ही चले जाते हैं.

बेंगलुरु के शंकरा अस्पताल के डॉक्टर श्रीनाथ कहते हैं, "अनंत कुमार को अमरीका जाकर इलाज कराने की सलाह हमने ही दी थी. दरअसल अमरीका ने कैंसर के इलाज से जुड़े कुछ नए ड्रग्स इजाद किए हैं जो भारत में उपलब्ध नहीं हैं. अमरीका में लंग कैंसर के इलाज में कारगर ड्रग्स पर शोध एडवांस स्टेज में हैं. इसलिए हमने उन्हें वहां जाने की सलाह दी थी."

वो कहते हैं, "भारत में फेफड़ों के कैंसर के इलाज के लिए मौजूद ड्रग्स का अनंत कुमार पर कोई असर नहीं हुआ. कैंसर और उससे जुड़े शोध पर भारत में बहुत कमी है. अपने देश में केवल कुछ स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट ही हम दे सकते हैं. एडवांस स्टेज के इलाज के लिए हम सक्षम नहीं है. इसलिए जब हताश हो जाते हैं तो हम खुद ही मरीज़ को दूसरे देश में जाकर इलाज की सलाह देते हैं. अमरीका और यूरोप के शहरों में ऐसे शोध पर खूब पैसा खर्च होता है इसलिए वहां इलाज भी बेहतर होता है."

लेकिन धर्मशिला कैंसर अस्पताल के डॉक्टर अंशुमन के मुताबिक, "भारत में भी हर तरह के कैंसर का इलाज मौजूद है. लेकिन लोग दो वजहों से इलाज के लिए बाहर जाते हैं. एक वजह है लोग अपनी बीमारी को छुपाना चाहते हैं और दूसरी वजह है पैसा. सेलिब्रिटी स्टेटस की वजह से ज्यादातर पैसे वाले भारत में मौजूद इलाज पर भरोसा नहीं कर पाते हैं."

महिलाओं के मुकाबले पुरुषों को ज्यादा होता है लंग कैंसर

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च (NICPR) के कुछ डॉक्टरों और शोधकर्ताओं ने इंडिया अगेंस्ट कैंसर से एक अनोखी पहल शुरू की है.

उनकी बेवसाइट, इंडिया अगेंस्ट कैंसर के मुताबिक पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में फेफड़ों के कैंसर की संभावना कम होती है.

इस बात से डॉक्टर श्रीनाथ भी इत्तेफाक़ रखते हैं. उनके मुताबिक अब तक का ट्रेंड यही रहा है कि पुरुषों में लंग कैंसर के मामले ज्यादा सामने आते हैं. लेकिन महिलाओं में ऐसे मामले अब ज्यादा तेजी से सामने आ रहे हैं.

डॉ. श्रीनाथ कहते हैं कि भारत में दूसरे देशों के मुकाबले कम उम्र में लोग कैंसर के शिकार हो रहे हैं, जो चिंता का विषय जरूर है. हालांकि इसकी वजह अभी मालूम नहीं है.

इंडिया अगेंस्ट कैंसर की बेबसाइट के मुताबिक कैंसर के मरीज की औसत उम्र 54 साल के क़रीब है.

लंग कैंसर ज्यादातर लोगों को तंबाकू का सेवन, सिगरेट पीने और प्रदूषण की वजह से होता है. सिगरेट या तंबाकू की लत अगर आपको है, तो उसे तुंरत छोड़ दें. अगर आप पैसिव स्मोकर भी हैं तो उन जगहों पर मौजूद रहने से पहरेज़ करें जहां आपके दोस्त, सगे संबंधी सिगरेट पीते हों. उन जगहों पर काम करने से थोड़ा परहेज करें जहां प्रदूषण फैलाने वाले गैसों का ख़तरा ज्यादा है.

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