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अपने दम पर अंतरिक्ष में जाने की बात ही कुछ और है: राकेश शर्मा
भारत की आज़ादी की 72वीं वर्षगांठ के मौक़े पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से दिए अपने भाषण में घोषणा की है कि 2022 में देश की किसी बेटी या बेटे को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा.
प्रधानमंत्री की इस घोषणा को भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा कैसे देखते हैं? बीबीसी हिन्दी रेडियो के संपादक राजेश जोशी ने यही सवाल राकेश शर्मा से पूछा. पढ़िए, राकेश शर्मा से पूरी बातचीत.
30 वर्षों से ज़्यादा समय से मुझे इसका इंतज़ार था. बाक़ी भारतीयों की तरह मैं भी उत्सुकता से बैठा हुआ था. मुझे सुकून मिला कि 2022 में भारत अपनी तकनीक से अंतरिक्ष में दस्तक देगा. अब तकनीक हमारी होगी और पिछले 30 सालों से मैं यही कह रहा हूं. भले मैं अंतरिक्ष में जाने वाला पहला भारतीय था, लेकिन अपने वैज्ञानिकों और तकनीक के दम पर जाने की बात ही कुछ और है.
अंतरिक्ष की यात्रा चुनौतीपूर्ण होती है और दिल कुछ ज़्यादा ही तेज़ धड़कता है. ये रिस्की काम है. इससे पहले मेरा कोई अनुभव नहीं था. स्पेस में जाने के बाद इंदिरा गांधी ने मुझसे पूछा था कि अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है तो मैंने कहा था कि 'सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा'.
मैं एयरफ़ोर्स का पायलट था. पायलटों में से ही मुझे अंतरिक्ष में जाने के लिए चुना गया था. अब की तकनीक में काफ़ी बदलाव आया है.
इंसान का अंतरिक्ष में जाना अब कोई नई बात नहीं रही. हिन्दुस्तान अगर इंसान को भेज भी देता है तो क्या हासिल होगा?
हासिल यही होगा कि विज्ञान का दायरा और आगे बढ़ेगा. हम प्रयत्न करना ही बंद कर देंगे तो क्या मिलेगा. ये सिर्फ़ पहुंचने की बात नहीं है. इसके बहाने हम तकनीक का भी विकास करते हैं. हम ये काम केवल विज्ञान के लिए ही नहीं करते हैं, बल्कि इसके और भी फ़ायदे होते हैं.
आप ये मत भूलिए हमारी सभ्यता का भविष्य अंतरिक्ष में ही है. पृथ्वी पर संसाधनों की कमी लगातार बढ़ रही है और हमें भविष्य में कहीं और बसना पड़ सकता है. हमारी तादाद लगातार बढ़ती जा रही है. ऐसे में हमें किसी और जगह की तलाश करनी होगी.
राकेश शर्मा आजकल क्या कर रहे हैं?
आईआईटी में जाता हूं. आईआईएम में घूमता हूं. मोटिवेशनल लेक्चर देता हूं. जो भी अनुभव पाया है उसे साझा करता हूं.
जब तक संभव होगा करता रहूंगा. जब आपको कोई काम दिया जाता है तो उस वक़्त सारा फोकस काम पर होता है. अंतरिक्ष के बारे में हमें बहुत कम ज्ञान है. हम हर दिन नई चीज़ों की तलाश करते हैं.
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