गूगल पर लगा अब तक का सबसे बड़ा 4.3 अरब यूरो का जुर्माना

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यूरोपीय यूनियन ने गूगल पर रिकॉर्ड 4.3 अरब यूरो (लगभग 344 अरब रुपये) का जुर्माना लगाया है.

यूरोपीय आयोग ने यह फ़ैसला उस दावे की जांच के बाद दिया जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि अमरीकी कंपनी गूगल ने अपने मोबाइल डिवाइस रणनीति के तहत गूगल सर्च इंजन को ग़लत तरीके से और अधिक ताक़तवर बनाया.

यह किसी भी कंपनी पर लगाया गया आज तक का सबसे बड़ा जुर्माना है. हालांकि गूगल इसके ख़िलाफ़ दावा कर सकती है.

कॉम्पिटीशन कमिश्नर मार्गरेट वैस्टेजर ने पहले भी 'शॉपिंग कॉम्पैरिज़न सर्विस' के मामले में गूगल पर 2.4 अरब यूरो का जुर्माना लगाया था. गूगल ने उस आदेश के ख़िलाफ़ अपील की थी, जिस पर सुनवाई अभी भी चल रही है.

इसके अलावा, गूगल के ख़िलाफ़ ऐडसेंस (विज्ञापन प्लेसमेंट) को लेकर भी एक जांच चल रही है. इस मामले में गूगल पर आरोप है कि उसने अपनी शक्तियों का ग़लत इस्तेमाल करके सर्च नतीजों में अपनी ख़रीदारी सर्विस का ज़्यादा प्रचार किया.

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मार्केट लीडर

यूरोपीय आयोग ने पहली बार अप्रैल 2015 में फ़ेयरसर्च की एक शिकायत के बाद एंड्रॉयड की जांच शुरू की थी. फ़ेयरसर्च एक बिज़नेस समूह है जिसके सदस्यों में माइक्रोसॉफ्ट, नोकिया और ओरेकल शामिल हैं.

रिसर्च कंपनी स्टैटकाउंटर के मुताबिक उस वक्त एंड्रॉयड का यूरोपीय हैंडसेट बाज़ार में 64% हिस्सा था जो अब बढ़ कर 74% हो गया है.

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क्या है गूगल पर आरोप?

  • कॉम्पिटीशन कमिश्नर मार्गरेट वैस्टेजर ने आरोप लगाया कि गूगल ने तीन अवैध तरीके अपनाए.
  • नए हैंडसेट में प्लेस्टोर (ऐपस्टोर) तक पहुंचने से पहले गूगल सर्च इंजन को डिफ़ॉल्ट सेट करने और क्रोम ब्राउज़र को प्री-इंस्टॉल करने की ज़रूरत को अनिवार्य बनाने के लिए एंड्रॉयड हैंडसेट और टैबलेट निर्माताओं पर दबाव बनाया.
  • मोबाइल निर्माताओं को एंड्रॉयड के ओपन सोर्स कोड पर आधारित प्रतिद्वंद्वी ऑपरेटिंग सिस्टम वाले मोबाइल फ़ोन को बेचने से रोका.
  • और गूगल सर्च को एकमात्र प्री-इंस्टॉल विकल्प बनाने के लिए मोबाइल निर्माताओं और मोबाइल नेटवर्कों को वित्तीय प्रलोभन दिया.

इसके जवाब में गूगल ने मोबाइल निर्माताओं को किसी भी ऐप को प्रीलोड करने के आरोप से इंकार किया.

गूगल ने यह भी दावा किया कि गूगल सर्च और प्लेस्टोर को एक साथ देने ने उसकी सेवा को मुफ़्त उपलब्ध कराना संभव बना दिया था.

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नियामक गूगल से अब क्या चाहते हैं?

कॉम्पिटीशन कमिश्नर ने कहा कि गूगल ने यह तब किया जब मोबाइल इंटरनेट तेज़ी से बढ़ रहा था. वो यह सुनिश्चित करना चाहता था कि जो सफलता उसे कंप्यूटर के डेस्कटॉप पर विज्ञापन आधारित सर्च सेवा में मिली है वो ही सफलता उसे मोबाइल पर भी मिले.

उन्होंने कहा कि वो समय को वापस तो नहीं मोड़ सकते, लेकिन जुर्माने की बड़ी रकम एंड्रॉयड डिवाइस से पूरे यूरोप में 2011 से हुई उसकी कमाई पर आधारित है.

हालांकि उन्होंने कहा कि गूगल अब उपरोक्त तीनों कार्यों को रोके और लक्ष्यों को लेकर ऐसे किसी भी उपाय को अपनाने से बचे.

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गूगल के पास क्या है विकल्प?

2016 में कंपनी के वैश्विक मामलों के प्रमुख ने ब्लॉग में लिखा, "आयोग के इस नज़रिए का मतलब नएपन में कमी, कम विकल्प, कम प्रतिस्पर्धा और अधिक कीमतें होंगी."

उन्होंने लिखा, कुछ भी हो एप्पल और गूगल की प्रतिद्वंद्वी आईओएस ऑपरेटिंग सिस्टम उपभोक्ताओं को एक विकल्प देती है.

गूगल ने रूस में पहले से ही रियायत दे रखी है, जहां स्थानीय कॉम्पिटीशन नियामक ने ऐसी ही शिकायत कर रखी है.

अब वहां के एंड्रॉयड यूज़र्स को क्रोम ब्राउज़र का पहली बार इस्तेमाल करने पर गूगल, यानडेक्स और मेल.आरयू में से किसी एक को चुनने का विकल्प दिया जाता है.

स्टैटकाउंटर के मुताबिक इस बदलाव के बाद से यानडेक्स की मोबाइल सर्च इंजन में हिस्सेदारी क़रीब 34% से बढ़कर 46% हो गया है.

लेकिन एक क़ानूनी विशेषज्ञ का कहना है कि इस विवाद को सुलझाने में बहुत वक्त लगेगा.

लंदन स्थित कोर्ट के वकील सुजैन रब ने बीबीसी को बताया, "गूगल ने पहले भी यह दिखाया है कि वो अपने क़ानूनी अधिकारों को लेकर बहुत दृढ़ है."

वो कहते हैं, "गूगल ईयू की अदालत में इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील कर सकता है और जैसा कि हमने यूरोपीय आयोग के इंटेल के ख़िलाफ़ मामले में देखा है, ऐसे मुक़दमे महीनों नहीं सालों तक चलते हैं."

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