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दुनिया में हर रोज़ कितने जानवर पैदा होते हैं?
- Author, लिज़ी मेक्नील
- पदनाम, मोर और लैस, बीबीसी रेडियो 4
दुनिया में इंसानों की आबादी क़रीब 7.6 अरब है. यूनीसेफ़ के आंकड़े कहते हैं कि रोज़ाना दुनिया में क़रीब 3 लाख 53 हज़ार बच्चे पैदा होते हैं.
मगर, कभी आप के ज़हन में ये सवाल आया है कि रोज़ाना कितने जानवर धरती पर जन्म लेते हैं?
आख़िर बच्चे पैदा करना तो क़ुदरत का बुनियादी उसूल है. हर जीव सेक्स के ज़रिए नई पीढ़ी को जन्म देता है. परिंदे हों, मधुमक्खियां हों, मक्खियां हों, तितलियां हों, शेर हों, कुत्ते हों, सियार हों या गधे. हर जानवर विपरीत लिंगी के साथ मिलकर बच्चे पैदा करता है.
हाल ही में बीबीसी के More or Less कार्यक्रम में इस सवाल पर चर्चा हुई. इस शो में हमारी ज़िंदगी पर असर डालने वाले आंकड़ों पर चर्चा होती है.
पहला सवाल तो ये बनता है कि जानवर यानी पशु कौन हैं?
ऑक्सफ़ोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी कहती है कि, 'जानवर वो जीव है जो जैविक चीज़ें खाता है, जिसके संवेदनशील अंग होते हैं, तंत्रिका तंत्र होता है और किसी बाहरी असर को वो महसूस कर सकता है'.
इस परिभाषा के हिसाब से स्तनधारी, गैर स्तनधारी, रीढ़वाले और बिना रीढ़ वाले, वो जानवर जो अंडे देते हैं और वो जानवर भी, जो सीधे बच्चे देते हैं.
दुनिया में रोज़ कितने जानवर पैदा होते हैं? इस सवाल की अहमियत हम एक मिसाल से समझने की कोशिश करते हैं.
खरगोश दुनिया भर में सबसे ज़्यादा बच्चे पैदा करने वाले जानवर के तौर पर मशहूर है.
सिर्फ़ ब्रिटेन में पाये जाने वाले जंगली खरगोशों की बात करें तो रोज़ाना उनके 19 लाख 17 हज़ार 808 बच्चे होते होंगे.
और अगर ये सारे बच्चे ज़िंदा बच जाएं, तो सोचिए क्या होगा.
अच्छी बात हो या बुरी बात, मगर, खरगोशों के इन बच्चों में से ज़्यादातर वयस्क होने से पहले ही मर जाते हैं.
खरगोश तो कमोबेश हर देश में पाए जाते हैं. हम हम्बोल्ट पेंगुइन की बात करें, जो सिर्फ़ चिली और पेरू में पाये जाते हैं, तो?
हम्बोल्ट पेंगुइन एक बार में दो अंडे देते हैं. एक जोड़ा पेंगुइन साल में कई बार जोड़े अंडे देते हैं.
हालांकि इन सारे अंडों से बच्चे नहीं पैदा होते. अब तक किए गए तजुर्बे कहते हैं कि हर साल 14 हज़ार 400 हम्बोल्ट पेंगुइन पैदा होते हैं. यानी रोज़ाना केवल 40 हम्बोल्ट पेंगुइन इस दुनिया में आते हैं.
ये संख्या बहुत ज़्यादा तो नहीं है. मगर हम्बोल्ट पेंगुइन जानवरों की ऐसी नस्ल है, जिस पर ख़ात्मे का ख़तरा मंडरा रहा है.
तो, जब हम इन आंकड़ों की तुलना ऐसे जानवरों से करते हैं, जिन पर ख़ात्मे का साया नहीं मंडरा रहा, तो आंकड़े एकदम अलग हो जाते हैं. जैसे कि मुर्गी. विश्व खाद्य संगठन के मुताबिक़ दुनिया भर में रोज़ाना 6.5 करोड़ मुर्गी के बच्चे पैदा होते हैं. ये तादाद बहुत ज़्यादा है.
मधुमक्खियों की बात करें तो गर्म महीनों में रानी मधुमक्खी रोज़ाना 1500 अंडे देती है. जनवरी 2018 में ब्रिटेन की नेशनल बी यूनिट ने गिनती की तो पता चला कि ब्रिटेन में मधुमक्खियों के 2 लाख 47 हज़ार 461 छत्ते हैं. यानी गर्मियों में रोज़ाना सिर्फ़ ब्रिटेन में 37 करोड़, 11 लाख, 19 हज़ार 500 मधुमक्खियां पैदा होती हैं.
हालांकि जानवरों से जुड़े ये आंकड़े पक्के नहीं हैं. लंदन ज़ू इंस्टीट्यूट की मोनिक बोह्म कहती हैं कि हर जानवर की रोज़ाना की पैदाइश का हिसाब लगाना नामुमकिन है. वजह साफ़ है, हमें अभी भी ज़्यादातर जीवों की प्रजनन क्षमता के बारे में पता ही नहीं.
लेकिन क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर एक्सेल रॉसबर्ग कहते हैं कि उनके पास इस सवाल का जवाब हो सकता है. प्रोफ़ेसर रॉसबर्ग कहते हैं कि जो जानवर किसी जानवर का हज़ारवां हिस्सा होता है, उससे हज़ार गुना ज़्यादा पाया जाता है.
इसका मतलब है कि दुनिया में हाथियों से ज़्यादा मधुमक्खियां हैं. साही से ज़्यादा दीमक हैं. चींटीखोरों से ज़्यादा चींटियां हैं.
दुनिया में सबसे ज़्यादा पाये जाने वाले जानवरों में नेमाटोड या गोलकृमि का नाम आता है. मोटे अनुमान के मुताबिक़ हर वर्ग मीटर ज़मीन में तीस लाख नेमाटोड पाए जाते हैं. इनकी एक नस्ल सी. एलीगेन्स हर घंटे पांच अंडे देती है.
अब इसके मुताबिक़ हर रोज़ खरबों गोलकृमि जन्म लेते हैं. और हम अभी सिर्फ़ नेमाटोड की एक प्रजाति की ही बात कर रहे हैं. ज़मीन से लेकर समुद्र तक पाए जाने वाले इस जीव की तमाम नस्लों का हिसाब लगा लें, तो शायद रोज़ाना जन्मने वाले नेमाटोड की संख्या बताने के लिए ज़ीरो कम पड़ जाएंगे.
और ये तो केवल एक जानवर है. इसमें हम्बोल्ट पेंगुइन से लेकर मुर्गी के बच्चों, खरगोशों और मधुमक्खियों की आबादी जोड़ लें तो, हिसाब लगाना मुश्किल हो जाएगा.
आज की तारीख़ में जानवरों की 77 लाख प्रजातियों के बारे में हमें पता है. जबकि अभी समुद्र के 95 फ़ीसद और इसकी तलहटी के 99 फ़ीसद जीवों के बारे में तो हमें पता भी नहीं है.
इसलिए जब तक हम धरती पर पाए जाने वाले हर जानवर के बारे में जान नहीं लेते, तब तक हम इस सवाल का जवाब नहीं दे सकते कि दुनिया में रोज़ाना कितने जानवर पैदा होते हैं.
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