You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में गिरा चीनी स्पेस स्टेशन का मलबा
आख़िर वो घड़ी आ ही गई, जिसका इंतज़ार किया जा रहा था.
चीन और अमरीका से मिल रही रिपोर्टों के मुताबिक़ बंद पड़ा चीनी स्पेस स्टेशन 'द तियांगोंग-1' दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में धरती के वायुमंडल में पहुंचते ही बिखर गया.
खगोलविज्ञानी जोनाथन मैकडॉवल ने ट्वीट किया कि 'द तियांगोंग-1' ग्रीनविच मानक समय के अनुसार सुबह के 8 बजकर 16 मिनट पर धरती के वायुमंडल में दाखिल हुआ.
10 मीटर के डैने (विंगस्पैन) और आठ टन वजन वाले 'द तियांगोंग-1' को साल 2011 में अंतरिक्ष प्रयोगों के लिए लॉन्च किया गया था.
माना जा रहा है कि अंतरिक्ष के लिए बनाई गई और धरती के वायुमंडल में लौटने वाली मनुष्य निर्मित ज़्यादातर चीज़ों से ये कहीं बड़ी थी.
चीन ने 'द तियांगोंग-1' के साथ अपना संपर्क खो दिया था और इस वजह से इसके गिरने पर उसका कोई नियंत्रण नहीं रह गया था.
जानकार ये भी आशंका जता रहे थे कि अंतरिक्ष स्टेशन किसी आबादी वाले इलाके के ऊपर भी गिर सकता है.
द तियांगोंग-1 है क्या?
चीन ने साल 2001 में अंतरिक्ष में जहाज भेजना शुरू किया और परीक्षण के लिए जानवरों को इसमें भेजा. इसके बाद 2003 में चीनी वैज्ञानिक अंतरिक्ष पहुंचे.
सोवियत संघ और अमरीका के बाद चीन ऐसा करने वाला तीसरा देश था.
साल 2011 में द तियांगोंग-1 के साथ चीन का स्पेस स्टेशन कार्यक्रम की शुरुआत हुई. एक छोटा स्पेस स्टेशन वैज्ञानिकों को कुछ दिनों के लिए अंतरिक्ष ले जाने में सक्षम था. इसके बाद 2012 में चीन की पहली महिला यात्री लियू यांग अंतरिक्ष गईं.
इसने तय समय के दो साल बाद मार्च 2016 में काम करना बंद कर दिया था.
साल 1979 में लगभग 80 टन वजन वाला स्काईलैब स्पेस स्टेशन भी कुछ हद तक अनियंत्रित तरीके से धरती पर गिरा था. उस वक्त ऑस्ट्रेलिया के कुछ इलाकों में इसके टुकड़े पाए गए थे लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ था.