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आईफ़ोन स्लो करने पर एप्पल ने मांगी माफ़ी
पुराने वर्जन वाले आईफ़ोन के प्रोसेसर को धीरे किए जाने को लेकर आलोचना झेल रही एप्पल कंपनी ने माफ़ी मांगी है.
एप्पल का तर्क था कि लिथियम आयन से बनी बैट्री वाले पुराने आईफ़ोन ढंग से चलते रहें, इसलिए ऐसा किया गया.
अब कंपनी का कहना है कि वो बैट्री बदलने के लिए तैयार है और 2018 में एक ऐसा सॉफ्टवेयर लाया जाएगा, जिससे आईफ़ोन यूज़र अपने फ़ोन की बैट्री की लाइफ़ पर नज़र रख सकेंगे.
लंबे वक्त से आईफ़ोन यूज़र्स को ये शक था कि कंपनी नए फोन की ख़रीद बढ़ाने के लिए पुराने फ़ोन को धीमा कर देती थी.
एप्पल पर हुए आठ मुक़दमे
हाल ही में एप्पल ने इस बात को स्वीकार किया है. इसके बाद से अमरीका में एप्पल के ख़िलाफ़ आठ मुक़दमे किए जा चुके हैं.
जिसके बाद कंपनी को काफ़ी आलोचना झेलनी पड़ रही है. एप्पल एक बयान के मुताबिक़, कंपनी ने वॉरेंटी से बाहर हुई बैट्री को बदलने की क़ीमत को 79 डॉलर से घटाकर 29 डॉलर करने का फ़ैसला किया है. ये छूट आईफोन-6 और उसके बाद आए फोन पर लागू होगी.
कंपनी का कहना है, ''एप्पल में उपभोक्ताओं का भरोसा हमारे लिए सब कुछ है. हम इस लक्ष्य से कभी नहीं भटकेंगे. आप लोगों के भरोसे और समर्थन की वजह से ही हम वो काम कर पा रहे हैं, जो हमें पसंद है. हम इस बात को कभी नहीं भूल सकते.''
अपनी सफ़ाई में क्या बोली थी एप्पल कंपनी?
एप्पल ने फ़ोन धीमा करने की बात मानते हुए कहा था, ''लिथियम इयॉन बैट्री के साथ ये दिक्कत सिर्फ़ एप्पल के प्रोडक्ट तक ही नहीं है. पुरानी बैट्री 100 फ़ीसदी पावर सप्लाई नहीं कर पाती है.
- आईफ़ोन 6, आईफ़ोन 6एस और आईफ़ोन एसई के लिए एक फ़ीचर जारी किया गया. इसका मक़सद प्रोसेसर की ज़्यादा पावर की मांग को कंट्रोल करना था.
- ऐसा करने से फ़ोन के अचानक बंद हो जाने का ख़तरा नहीं रहता है.''
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