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डायबिटीज़ के बारे में ये बातें आपको मालूम हैं
आज विश्व मधुमेह (डायबिटीज़) दिवस है. यह डायबिटीज़ को लेकर जागरूकता लाने के लिए विश्व का सबसे बड़ा अभियान है.
मधुमेह दिवस की शुरुआत डायबिटीज़ के कारण लोगों में बढ़ते स्वास्थ्य संबंधी खतरों की तरफ ध्यान दिलाने के लिए साल 1991 में की गई थी.
भारत में भी डायबिटीज़ एक बड़ी समस्या है और इंटरनेशनल डायबिटीज़ फेडरेशन के मुताबिक साल 2015 में भारत में डायबिटीज़ के 6 करोड़ 91 लाख मामले पाए गए थे.
ऐेसे में डायबिटीज़ से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हम यहां दे रहे हैं.
डायबिटीज़ क्या है?
डायबिटीज़ में किसी व्यक्ति में शुगर का स्तर बहुत बढ़ जाता है. डायबिटीज़ दो तरह का होता है- टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज़
टाइप 1 और 2 में अंतर क्या है?
दोनों तरह का डायबिटीज़ शरीर में मौजूद एक हार्मोन इंसुलिन से जुड़ा हैं. इंसुलिन पैंक्रियाज नाम के अंग से उत्पन्न होता है.
पैंक्रियाज पेट के पीछे होता है. इंसुलिन शरीर में शुगर की मात्रा को नियंत्रित करता है.
टाइप 1 डायबिटीज़ तब होता है जब शरीर में इंसुलिन उत्पन्न करने वाली कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं.
टाइप 2 डायबिटीज़ तब होता है जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन उत्पादित करना बंद कर देता है या कोशिकाएं इंसुलिन पर प्रतिक्रिया नहीं करतीं.
शुगर का स्तर
ऐसे में दोनों तरह के डायबिटीज़ में शुगर का स्तर प्रभावित होता है. हालांकि, दोनों का तरीका अलग-अलग होता है.
बच्चों में बड़ी संख्या में टाइप 1 डायबिटीज़ पाया जाता है लेकिन अब टाइप 2 डायबिटीज़ के मामले भी सामने आ रहे हैं.
सामान्य तौर पर टाइप 2 डायबिटीज़ की समस्या व्यस्कों को ज़्यादा रहती है. हर 10 में से 9 किशारों में टाइप 2 डायबिटीज़ के मामले पाए जाते हैं.
टाइप 2 डायबिटीज़ के ज्यादा मामले होने का कारण यह भी है कि ज्यादा वजन वाले लोगों की संख्या बढ़ी है. मोटापा आगे अन्य बीमारियों का कारण भी बन रहा है.
टाइप 1 डायबिटीज़- मुख्य बातें
- यह पूरी ज़िंदगी बना रहता है.
- ये खाने की आदतों या डाइट के कारण नहीं होता.
- इसका पूरा इलाज नहीं है और इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.
टाइप 1 में क्या होता है?
यह तब होता है जब इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं. इसके कारण शरीर ग्लूकोज़ का इस्तेमाल नहीं कर पाता, जो एक तरह का शुगर है.
ग्लूकोज़ से शरीर को ऊर्जा मिलती है और ग्लूकोज़़ का इस्तेमाल न कर पाने से शरीर कहीं और से ऊर्जा लेता है.
इसके लिए शरीर फैट और प्रोटीन का इस्तेमाल करता है जो शरीर के अन्य हिस्सों में मौजूद होते हैं.
इसलिए ही डायबिटीज़ होने पर लोगों का वज़न कम हो जाता है और वो अस्वस्थ महसूस करते हैं.
टाइप 1 डायबिटीज़ से पीड़ित लोग बार-बार टॉयलेट आने, थकान महसूस होने और प्यास लगने की शिकायत करते हैं.
कैसे होता है इलाज
यह साफ तौर पर नहीं कहा जा सका है कि इंसुलिन का उत्पादन करने वाली कोशिकाएं काम करना क्यों बंद कर देती हैं.
लेकिन, समय-समय पर इंसुलिन के इंजेक्शन लगाकर इसका इलाज किया जा सकता है जिससे शरीर ऊर्जा के लिए ग्लूकोज़ का इस्तेमाल करना जारी रखता है.
टाइप 2- मुख्य बातें
- अधिकतर मामलों में टाइप 2 डायबिटीज़ अत्यधिक शुगर और फैट वाली चीजें ज्यादा खाने और कसरत न करने से होता है.
- कुछ मामलों में ये अन्य कारणों से भी होता है.
- इसका भी पूरा इलाज संभव नहीं है. इससे भी अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.
टाइप 2 में क्या होता है?
टाइप 2 डायबिटीज़ टाइप 1 से ज्यादा पाया जाता है और करीब 85 से 90 प्रतिशत डायबिटीज़ के मरीज इससे पीड़ित मिलते हैं.
हम जो खाने खाते हैं इंसुलिन उससे ग्लूकोज़ बाहर निकालने और शरीर के अन्य अंगों में पहुंचाने मदद करता है. हमारे शरीर को ग्लूकोज़ की जरूरत ऊर्जा के लिए होती है.
इंसुलिन हमारे शरीर में विभिन्न कोशिकाओं को ग्लूकोज़ ग्रहण करने में मदद करता है.
बिना इसके कोशिकाएं ग्लूकोज़ ग्रहण नहीं कर पातीं और वह शरीर में इकट्ठा होता रहता है.
कई लोग अपने खान-पान के कारण लंबे समय तक टाइप 2 डायबिटीज़ से बचे रहते हैं लेकिन बच्चों और युवाओं में यह समस्या बढ़ रही है.
कैसा होता है इलाज
टाइप 2 डायबिटीज़ का पता चलने पर मरीज को खाना-पान में बदलाव और व्यायाम करने की सलाह दी जाती है.
टाइप 2 डायबिटीज़ शरीर में बहुत ज्यादा ग्लूकोज़ इकट्ठा होने से होती है.
ऐसे में ज्यादा फैट और शुगर वाला खाना कम करने और कसरत के जरिए उसे बर्न करने से शरीर में ग्लूकोज़ कम होने में मदद मिलती है.
कुछ मामलों में टाइप 2 के मरीजों को दवाई या अतिरिक्त इंसुलिन भी दिया जाता है.
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