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अगर आपका बच्चा भी दांत पीसता है तो...
अगर आपके बच्चों में भी दांत पीसने की आदत है तो बहुत संभव है कि स्कूल में उन पर धौंस (बुलिंग) जमाया जा रहा हो. यह बात एक नए शोध में सामने आई है.
मुंह के स्वास्थ्य से संबंधित एक चैरिटी ने कहा है कि माता-पिता और स्कूल को इस समस्या के बारे में पता होना चाहिए. यह तनाव और चिंता से गुजर रहें वयस्कों को भी प्रभावित कर सकता है.
दांत पीसने से सिर दर्द, दांत ख़राब होने और आधी-अधूरी नींद की समस्या भी हो सकती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में इजाफा भी देखा गया है.
यह शोध जर्नल ऑफ़ ओरल रिहैबिलिटेशन में प्रकाशित हुआ है. यह शोध ब्राज़ील में तीन सौ से अधिक किशोरों पर किया गया है.
नुकसान
इस शोध के नतीजों के मुताबिक़ स्कूल में बुलिंग के शिकार 13 से 15 साल के बच्चों में दांत पीसने की आदत चार गुना अधिक पाई गई है.
इनमें सोने के दौरान भी दांत पीसने की आदत देखी गई है. बुलिंग के शिकार 65 फ़ीसदी बच्चों में यह आदत देखी गई है जबकि जो बच्चे बुलिंग के शिकार नहीं थे उनमें सिर्फ़ 17 फ़ीसदी में यह आदत देखी गई.
ओरल हेल्थ फाउंडेशन के डॉक्टर नीगेल कार्टर ने कहा, "इस मामले में दांत पीसने से अधिक यह महत्व की बात है कि यह बच्चे की मानसिक स्थिति को दिखाता है और शुरुआती दौर में ही बुलिंग को पकड़ने में हमारी मदद करता है."
उन्होंने बताया कि सोने के दौरान दांत पीसना नुकसानदायक हो सकता है लेकिन अक्सर लोग इस बात को लेकर अनजान रहते हैं कि वो ऐसा कर रहे थे.
दांत पीसने से दांत की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. इससे दांतों में झनझनाहट, दांतों का घीसना, दांत टूटना और चेहरे और जबड़ों में दर्द जैसी शिकायत हो सकती है.
डॉक्टर नीगेल कार्टर बताते हैं कि दांत पीसना चबाने से 40 गुना अधिक ताकत वाली प्रक्रिया होती है.
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