ब्लॉग- सिगरेट पीना जुर्म की तरह लगता था...जिसका अंजाम बुरा ही होगा

    • Author, ज़ुबैर अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

इन दिनों मुझे ऐसा लग रहा है कि मेरा कोई अपना सगा मर गया है और उसके मरने के ग़म में मैं शोक मना रहा हूँ. लेकिन हक़ीक़त तो ये है कि मेरा अपना सगा कोई नहीं मरा है.

इसके बावजूद मैं "ट्रेजेडी किंग" बना फिर रहा हूँ. कभी-कभी मुझे खुद पर तरस आ रहा होता है तो कभी ऐसा लगता है कि सारा ज़माना मेरे ख़िलाफ़ है.

इन दिनों मुझे भीड़ में भी तन्हाई का एहसास हो रहा है. मूड काफी ख़राब चल रहा है. दफ्तर में किसी से बात करने का दिल नहीं करता. घर पर खोया-खोया रहता हूँ.

दरअसल इन दिनों मैं जिस मानसिक स्थिति से गुज़र रहा हूँ उसे अंग्रेजी में "विथड्रावल सिंपटम" कहते हैं यानी पुरानी लत को वापस पाने की चाह.

आसान नहीं लत छोड़ना

मैंने दो हफ़्ते पहले सिगरेट की 30 साल पुरानी लत छोड़ी है. एक दम अचानक से. और वो भी निकोटिन पैच जैसी किसी बाहरी मदद के बग़ैर. लेकिन सच तो ये है कि अचानक से 30 साल पुरानी आदत को छोड़ना मेरे लिए भारी पड़ रहा है.

हर लम्हे सिगरेट पीने का मन करता है. ख़ास तौर से हर खाने के बाद. या फिर उस समय जब दोस्तों की महफ़िल में किसी टॉपिक पर गरमा-गर्म बहस हो रही होती है. लेकिन ऐन वक़्त पर खुद को रोक लेने में अब तक क़ामयाब हूँ. आगे की कोई गारंटी नहीं.

सच तो ये है कि मैं इस लत को सालों से छोड़ने की कोशिश कर रहा था. मुझे सिगरेट पीना हमेशा किसी जुर्म की तरह लगता था. ऐसा लगता था कि मैं एक ऐसी लत का आदी हो गया हूँ जिसका अंज़ाम बुरा ही होगा.

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हज़ारों बार धूम्रपान को लात मारने की कोशिश की लेकिन ऐसा कर नहीं पाया. शायद लत या एडिक्शन इसी का नाम है. धूम्रपान भी नशीले पदार्थ की तरह है. जुआ और शराब की तरह है.

एक बार इसके आदी हो जाएँ तो इसे छोड़ना आसान नहीं है. घर में माँ कहे, या बीवी या बेटी, आपके लिए इस लत को छोड़ना असंभव हो जाता है.

छोड़ने की चाह

लेकिन कहते हैं जहाँ चाह है वहाँ राह है. जैसा कि मैंने अर्ज़ किया कि धूम्रपान को छोड़ने की चाह तो हमेशा से थी. राह भी मालूम थी, लेकिन अब तक इसे छोड़ने में नाकाम रहा था.

दो हफ्ते पहले मैं मौसम बदलने के कारण बुख़ार और खांसी का शिकार हुआ. इस कारण तीन दिनों तक सिगरेट को हाथ नहीं लगाया. ऐसा मेरे साथ पहली बार हुआ था.

पहले बुखार हो या सर्दी या खांसी धूम्रपान में कमी नहीं होती थी लेकिन इस बार मामला अलग था. मैंने दिल में सोचा अगर मैं तीन दिनों तक सिगरेट के बग़ैर रह सकता हूँ तो धूम्रपान की ज़रूरत ही क्यों?

मेरे पास सिगरेट का एक पूरा पैकेट पड़ा है, नया लाइटर भी इसके साथ रखा है, लेकिन पिछले दो हफ्ते में मैंने उस तरफ़ नज़र भी नहीं दौड़ाई है.

पूरी तरह से छुटकारा

क्या मैंने पूरी तरह से इस लत से छुटकारा पा लिया है? ऐसा कहना समय से पहले होगा. लेकिन इसके आसार ज़रूर नज़र आ रहे हैं.

एक उदाहरण: धूम्रपान करने वाले साथी जब मेरे नज़दीक आते हैं तो उनके मुंह से और उनके कपड़ों से सिगरेट की बदबू आती है. मुझे ये बदबू बुरी लगती है.

मैं दिल में सोचने लगता हूँ क्या दो हफ्ते पहले तक मेरे कपड़ों और मुंह से भी इसी तरह की बदबू आती थी? ये सोच कर और भी बुरा लगता है.

आज मुझे इस लत को छोड़ने के कई फायदे नज़र आ रहे हैं. पहला ये कि अंदर से मैं अब अधिक स्वस्थ महसूस करता हूँ.

खाने के दौरान ज़ायक़े को महसूस करने लगा हूँ. साथ ही रोज़ 250 रुपये की बचत हो रही है.

अगर आप भी मेरी स्थिति में हैं. या पुरानी लत को छोड़ने के कगार पर हैं तो अपने मज़बूत इरादे पर क़ायम रहें.

हम सब एक ही मिट्टी से बने हैं. अगर एक बुरी लत छोड़ सकता है तो दूसरा भी ऐसा कर सकता है.

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