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ड्राई स्पर्म भी काम का साबित हो सकता है
अंतरिक्ष के भारविहीन वातावरण के क़रीब स्टोर किए गए फ़्रीज़-ड्राई स्पर्म से स्वस्थ चूहे का जन्म हुआ है.
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर एक जापानी टीम ने गुरुत्वाकर्षण को तोड़ने के लिए ऐसा प्रयोग किया है. इस सफल प्रयोग के बाद कहा जा रहा है कि पृथ्वी से अलग ले जाकर स्पर्म का इस्तेमाल करना संभव है.
पृथ्वी पर आपदाओं की सूरत में चंद्रमा पर स्पर्म बैंक बनाया जा सकता है. जापान की इस टीम ने यह बात एक महत्वपूर्ण साइंस जर्नल से कही है. अभी तक यह साफ़ नहीं है कि क्या यह इंसानों के लिए भी काम करेगा.
अंतरिक्ष में ख़ुद को ज़िंदा रखना आसान नहीं है. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर रेडिएशन पृथ्वी के मुकाबले 100 गुना ज़्यादा होता है. अंतरिक्षीय किरणों से हर दिन औसत 0.5 एमएसवी की ख़ुराक मिलती है और यह कोशिकाओं के भीतर डीएनए कोड (जिसमें स्पर्म भी शामिल है) को ख़त्म करने के लिए काफ़ी है.
माइक्रो गुरुत्वाकर्षण भी स्पर्म के लिए अटपटा है. 1988 में जर्मन रिसर्चरों ने कक्ष में साँड़ के वीर्य का एक सैंपल रॉकेट से भेजा था. उन्होंने पाया था कि कम गुरुत्वाकर्षण में स्पर्म ज़्यादा सक्रिय था. हालांकि यह साफ़ नहीं है कि इससे प्रजनन में कितना फ़ायदा होगा.
इसी तरह का एक और प्रयोग अंतरिक्ष में किया गया था. इसमें पाया गया था कि मछली के अंडे से प्रजनन संभव है और सामान्य रूप से 15 दिनों के कक्षीय फ़्लाइट में यह विकसित होता है. इस प्रयोग के माध्यम से बताया गया कि अंतरिक्ष प्रजनन के लिहाज़ से मुश्किल नहीं है.
चूहे का फ़्रीज़ किया ड्राई स्पर्म सैंपल स्पेस स्टेशन पर नौ महीने से स्टोर कर रखा गया था. फिर बाद में इसे पृथ्वी पर एक ख़ास तापमान में रखा गया. इसके बाद इसकी पूरी प्रक्रिया का उल्लेख नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस की रिपोर्ट में किया गया है. हालांकि इस आवाजाही में स्पर्म के डीएनए को थोड़ा नुक़सान पहुंचा था.
फिर भी इससे प्रजनन पर कोई असर नहीं पड़ा और स्वस्थ चूहे का जन्म हुआ. प्रजनन और जन्म दर में कोई फ़र्क नहीं था. हालांकि आनुवांशिक कोड में थोड़ा फ़र्क हो जाता है.
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