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उन दिनों आने लगा था आत्महत्या का ख़्याल
मासिक धर्म के दौरान होने वाली दिक्कतों में कई महिलाएं को काफ़ी दर्द से गुजरना होता है. कई तो इस दौरान कोई काम नहीं कर पातीं. लेकिन मासिक से पहले की परेशानियां जैसे प्रीमेंसुरल डिस्फ़ोरिक डिसऑर्डर बड़ा रूप ले सकती हैं.
प्रीमेंसुरल डिस्फ़ोरिक डिसऑर्डर (पीएमएस) को लेकर जिस तरह की समस्याएं कई महिलाओं को झेलनी पड़ी है उनसे सालों तक उन्हें मनोचिकित्सा देने के मामले देखने को मिले हैं.
पीएमएस जैसी समस्या की पहचान करना आसान नहीं होता है.
ब्रिटेन की लॉरा 38 साल की हो चुकी हैं लकिन जब वो 17 साल की थी तबके अनुभव बीबीसी से बांटते हुए कहती हैं, ''एक दिन मैं ज़मीन पर गिर पड़ी, मैं बहुत बेचैन हो रही थी, मेरी सांसें फूल रही थीं और मेरी मां को डॉक्टर को बुलाना पड़ा. डॉक्टर ने मुझे शांत करने के लिए दवाएं दीं.''
लॉरा को 20 से 30 साल की उम्र के बीच घबराहट की समस्या रहती थी इसलिए वो स्थाई तौर पर कहीं नौकरी भी नहीं कर पाती थीं.
आत्महत्या तक का ख़्याल
वो कहती हैं, "हर महीने मैं इतनी थक जाती थी कि कम से कम तीन दिन मैं 18 घंटों तक सोती रहती थी. मुझे आत्महत्या के ख़्याल आते थे."
तो कुछ ख़ास दिनों में होने वाली ये दिक्कतें किस वजह से हो रही थीं?
ब्रिटेन के डॉक्टरों के मुताबिक वो प्रीमेनसुरल डिस्फ़ोरिक डिसऑर्डर (पीएमएस) यानी माहवारी से पहले के दिनों में होने वाली समस्या से जूझ रही थीं.
लेकिन जब ये समस्या जब गंभीर रूप ले लेती है तो इसके एक स्वरूप को अमरीका में साइकियाट्रिक एसोसिएशन के मुताबिक पीएमडीडी कहा जाता है.
कई बार पीएमडीडी के लक्षण एक महीने में तीन हफ़्तों तक दिखाई देते हैं.
23 साल की सारा बताती हैं कि जब वो 14 साल की थी तब उन्हें पीएडीडी का सामना करना पड़ा.
वो कहती हैं, ''मैं बहुत घबरा जाती थी, उदास रहती थी और मुझे मनोविकार हो गया जैसे (काल्पनिक) चीज़ें सुनना और देखना. मैं कभी-कभी पागलों के जैसा बर्ताव करती थी.''
सारा को कई बार अस्तपाल में भर्ती कराना पड़ा और कई सालों तक बायपोलर डिसऑर्डर का इलाज भी चलता रहा.
स्त्री रोग विशेषज्ञ प्रॉफ़ेसर जॉन स्टड कहते हैं कि पीएमएस के गंभीर मामलों को पहचानना आसान नहीं होता.
प्रॉफ़ेसर जॉन स्टड कहते हैं कि चूंकि इसके लक्षण का एक साइकल होता है तो मनोचिकित्सक इसे बायपोलर डिसऑर्डर समझते हैं और मरीज़ों को सालों तक थेरेपी दी जाती है.
रात में गुस्से में उठकर प्लेटें तोड़ती थी
35 साल की रेचल बताती हैं कि वो 14 साल की थी तबसे बार-बार उन्हें इतना गुस्सा आता था कि किसी की हत्या करने का ख़्याल आता था.
वो बताती हैं, " मैं अचानक रात में जाग जाती और बिना किसी कारण अपने आपको गुस्से में पाती, मैं प्लेटें तोड़ने लगती."
लेकिन दस साल तक इस परेशानी को झेलने के बाद उनके पूर्व पार्टनर ने उनकी समस्या को पहचाना.
क्या है इलाज़
ब्रिटेन में प्रीमेनसुरल सिंड्रोम की संस्था के प्रमुख डॉ निक पैने कहते हैं कि जब भी ऐसे महिला को देखता हूं तो सोचता हूं कि इसकी समस्या को गंभीरता से लेने में कितना वक्त लग गया होगा.
सारा कहती हैं कि उनके गायनोकोलॉजिस्ट तो इस बात को मानते हैं कि उनकी समस्या माहवारी से पहले की परेशानी से जुड़ी है लेकिन उनके मनोचिकित्सक का अब भी मानना है कि ये हॉर्मोनल गड़बड़ी के साथ बायपोलर डिसऑर्डर है.
प्रॉफ़ेसर स्टड का कहना है कि इसका इलाज संभव है और वो इसके लिए अक्सर एस्ट्रोजन लेने की सलाह देते हैं.
रेचल का कहना है कि उन्हें इलाज से 95 फ़ीसदी फ़ायदा हुआ है.