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अमरीकियों के मोबाइल में अब नहीं झांकेगा एनएसए
अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी एनएसए विदेशी खुफिया लक्ष्यों का उल्लेख करने वाले अमरीकी नागरिकों के संदेशों की निगरानी करना बंद करेगी.
साल 2008 में जारी एक क़ानून के तहत एनएसए को किसी अमरीकी नागरिक की निगरानी के लिए वारंट की ज़रूरत नहीं रह गई थी.
मीडिया में जारी बयान में एनएसए ने कहा कि एक विभागीय समीक्षा में इस कार्यक्रम से जुड़ी समस्याओं और अमरीकी नागरिकों की प्राइवेसी पर इसके असर के बारे में पता चला है.
सर्विलेंस विशेषज्ञों के अनुसार एनएसए का ये फ़ैसला 'बेहद महत्वपूर्ण' है.
हालांकि एनएसए को देश के भीतर निगरानी करने की अनुमति नहीं थी, लेकिन साल 2008 के फॉरेन इंटेलिजेंस सर्विलेंस एक्ट (फ़ीसा) की एक धारा के कारण वो इससे बचने में कामयाब रहा था.
इसकी मदद से वो अमेरिका के नागरिकों के ऐसे फोन कॉल और संदेशों की निगरानी कर सकता था जिनमें देश के बाहर के लोग शामिल हों.
फ़ीसा के इस्तेमाल के लिए एनएसए की व्यापक आलोचना की गई थी क्योंकि ऐसा करने का मतलब था कि बिना वारंट मांगे वो अमरीकी लोगों के भेजे संदेश इकट्ठा कर सकते थे.
अपने बयान में एनएसए ने कहा हा कि तकनीकी सीमाओं, गोपनीयता से जुड़ी समस्याओं और ऐसे निगरानी करने की आ रही मुश्किलों के कारण उन्होंये से फ़ैसला लिया है. उन्होंने ये भी कहा है कि इस तरह एकत्र किए गए डेटा का 'अधिकांश हिस्सा' वो डिलीट कर देगा.
इस साल अमरीकी कांग्रेस एनएसए को फ़ीसा के तहत मिली शक्तियों की समीक्षा करने वाली है और इसका नवीनीकरण करने वाली है. कांग्रेस के कई सदस्यों के इसके लिए एनएसए की आलोचना की है और राजनेता उम्मीद कर रहे हैं कि इस समीक्षा के बाद इसकी शक्तियों को सीमित कर दिया जाएगा.
निगरानी के लिए एनएसए के वारंट संबंधी आवेदनों को देखने वाली अमरीकी संघीय इंटेलिजेंस सर्विलेंस कोर्ट ने भी फ़ीसा जासूसी कार्यक्रम की निंदा की है.
हालांकि एनएसए ने इसका समर्थन करते हुए कहा था कि इससे 'ज़रूरी जानकारी' इकट्ठा करने में मदद मिलती है.
कैटो इंस्टीट्यूट में प्राइवेसी और सर्विलेंस विशेषज्ञ जूलियन सान्चेज़ कहते हैं कि फ़ीसा के कारण इसका दायरा इतना बड़ा हो गया था कि नागरिक स्वतंत्रता का समर्थन करने वाले इसका कड़ा विरोध कर रहे थे.
सान्चेज़ ने रॉयटर्स को बताया, "आम तौर पर निगरानी करने के लिए आप एक व्यक्ति को चिन्हित करते हैं, लेकिन ये तो सभी की निगरानी करना और उसमें से लोगों के नाम निकालना था."
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