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मुकेश अंबानी की वजह से 'जियो या मरो' का सवाल
- Author, आशुतोष सिन्हा
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
जियो के आने से मोबाइल फ़ोन के बाजार में भूचाल-सा आ गया है. मुफ्त ऑफर देने के बाद जियो को 10 करोड़ ग्राहक मिलने में बस कुछ ही महीने लगे. अब जियो लोगों से पैसे देने को कह रहा है.
लेकिन जो बदलाव कुछ महीने में जियो के कारण हुआ है उससे कोई भी कंपनी या ग्राहक अछूते नहीं रहे हैं. आइए जियो के कारण आए पांच बड़े बदलावों के बारे में आपको बताते हैं.
सस्ता डेटा
मोबाइल सर्विस इस्तेमाल करने वालों के लिए डेटा अब बहुत ही सस्ता हो गया है. जियो के आने के पहले एक गीगाबाइट डेटा के 28 दिन के इस्तेमाल के लिए कंपनियां करीब 250 रुपये ग्राहकों से लेती थीं. मुफ्त डेटा देकर जिओ ने सबसे पहले लोगों को अपनी ओर खींचा और अब उन्हें 303 रुपए में वो सब कुछ मिलेगा जो लोगों को चाहिए. देश के किसी भी नेटवर्क पर कॉल फ्री होगा और डेटा के इस्तेमाल पर कोई सीमा नहीं होगी. ये ऑफर एक साल के लिए मान्य होगा.
डेटा, वॉइस में फर्क नहीं
दूसरी टेलीकॉम कंपनियों के वॉइस कॉल के लिए पैसे लेने वाले प्लान अब ख़त्म हो सकते हैं. जियो ने कॉल और डेटा दोनों के लिए एक प्लान पेश करके पूरे टेलीकॉम सेक्टर के लिए नया मॉडल दिया है. दुनिया भर में टेलीकॉम कंपनियां ऐसी स्कीम देती हैं और जियो अब उसी तरीक़े को देश में ला रहा है.
हैंडसेट हुए आधुनिक
जियो के लॉन्च के थोड़ा पहले से बाज़ार में कैसे स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों ने सिर्फ 4जी हैंडसेट बनाना शुरू कर दिया था. जियो के आने से 4जी वोल्ट हैंडसेट की बिक्री बहुत तेज़ी से बढ़ रही है. सैमसंग जैसी कुछ कंपनियों ने अब सिर्फ 4जी और 4जी वोल्ट हैंडसेट बेचने का फ़ैसला किया है. इससे वॉइस कॉल करते समय वो डेटा का रूप लेता है जिससे ज़्यादा नेटवर्क पर ज़्यादा लोग कॉल कर सकते हैं.
नेटवर्क पर पैसे खर्च
मोबाइल सर्विस देने वाली सभी कंपनियां अपने नेटवर्क को 4जी वोल्ट के लिए बनाने में पैसे खर्च कर रहे हैं. एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया अपने नेटवर्क को अपग्रेड कर रहे हैं. उसके बाद उन पर भी सभी 4जी वोल्ट हैंडसेट काम करेंगे, जो अभी सिर्फ जियो के नेटवर्क पर काम करते हैं. अपने नेटवर्क पर पैसे खर्च किए बिना कोई भी कंपनी जियो से टक्कर नहीं ले पाएगी.
दूसरी कंपनियों पर लगी सेंध
टेलीकॉम कंपनियों की हालत ऐसी हो गई है कि छोटी कंपनियों के लिए बढ़ने के रास्ते बंद हो रहे हैं. इसलिए एमटीएस, रिलायंस कम्युनिकेशन और एयरसेल अब हाथ जोड़कर एक होने की बात कर रहे हैं. वोडाफोन अपने शेयर भारतीय शेयर बाजार में लिस्ट कराने की सोच रहा था, पर अब उस पर विचार नहीं किया जा रहा है. अब वोडाफोन और आइडिया भी एक होने की सोच रहे हैं.
सरकारी कंपनियां खस्ता हाल
सरकारी टेलीकॉम कंपनी एमटीएनएल की हालत पहले से खस्ता थी. अब अपने कर्मचारियों को तनख़्वाह देने के लिए उसे बैंक से क़र्ज़ लेना पड़ रहा है. बीएसएनएल को अब ग्राहकों से पैसे जुटाने के लिए तरह तरह की स्कीम को घोषणा करनी पड़ रही है लेकिन ग्राहकों के आगे उसकी दाल नहीं गल रही है.
अगर रिलायंस को उसके 10 करोड़ ग्राहक हर महीने 303 रुपए देने को तैयार हो जाएंगे तो उसके लिए तीन हज़ार करोड़ रुपए इकट्ठे हो जाएंगे. उसके बाद वो आइडिया सेलुलर के बराबर हो जाएगी. उसके बाद वो एयरटेल और वोडाफोन से टक्कर लेने की सोच सकता है.
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