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एक ही परिवार में तीसरे मर्द को ब्रेस्ट कैंसर
ब्रेस्ट कैंसर वो बीमारी है जिसके बारे में माना जाता है कि इससे केवल महिलाओं को जूझना पड़ता है. ब्रिटेन का एक परिवार इस लिहाज से अपवाद कहा जा सकता है.
कूपर परिवार के दो लोगों की मौत ब्रेस्ट कैंसर से हो चुकी है और जाइल्स कूपर इस कड़ी में तीसरे शख्स हैं जो इससे पीड़ित हैं.
पहले पिता और फिर चाचा की मौत के बाद जाइल्स कूपर को अपने सीने में गांठ का पता चला.
इलाज के दौरान जाइल्स की दो बार मैस्टेक्टॉमी की गई जिसमें सर्जरी के जरिए इस गांठ को हटा दिया गया.
जाइल्स अब भी सार्वजनिक तौर पर अपनी छाती पर ऑपरेशन के निशान दिखाने से घबराते हैं.
सर्जरी के अपने अनुभव के बारे में जाइल्स कहते हैं, "सर्जरी से पहले बेहोश करने वाले डॉक्टर ने मुझसे कहा कि मैं 20 सालों में पहली बार ब्रेस्ट कैंसर के किसी पुरुष मरीज को सुलाने जा रहा हूं. यह मेरे लिए ख़तरे की घंटी जैसा था."
'कैंसर रिसर्च यूके' के मुताबिक ब्रिटेन में हर साल तकरीबन 400 ऐसे मामले सामने आते हैं जिनमें ब्रेस्ट कैंसर के मरीज पुरुष होते हैं जबकि महिलाओं की संख्या 55 हज़ार के करीब है.
जाइल्स ने ब्रेस्ट कैंसर सपोर्ट ग्रुप का सहारा लिया है. सपोर्ट ग्रुप से मिल रही मदद के बारे में उन्होंने बताया, "वहां कमरे में 12 लोग थे. सब बहुत प्यारे थे लेकिन वे महिलाएं थीं. उनमें से ज्यादातर ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित थीं. उस जमात में बेशक मैं इकलौता पुरुष था."
वह आगे कहते हैं, "मैं दो सालों से ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हूं और मैं अभी तक किसी ऐसे पुरुष से नहीं मिला हूं जिसे ये समस्या हो."
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