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विजयन के ख़िलाफ़ मुक़दमे की अनुमति | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केरल के राज्यपाल ने एसएनसी लवलीन मामले में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के नेता पिनरई विजयन के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की अनुमति दे दी है. केंद्रीय जाँच एजेंसी (सीबीआई) का कहना था कि इस मामले में विजयन के ख़िलाफ़ सबूत हैं. दूसरी ओर सत्तारूढ़ वाम मोर्चा सरकार का कहना था कि सीपीएम नेता के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने लायक सबूत नहीं हैं, इसलिए इसकी अनुमति नहीं मिलनी चाहिए. ये पूरा मामला वर्ष 1998 में कनाडा की कंपनी एसएनसी लवलीन को राज्य में तीन पनबिजली परियोजनायों का ठेका देने से जुड़ा हुआ है. सीबीआई का कहना है कि कंपनी को ठेका देने में अनियमितता बरती गई और इसमें तत्तकालीन राज्य सरकार में मंत्री रहे विजयन की भूमिका थी. सीबीआई ने जाँच के बाद कहा कि इस मामले में सरकारी कोष को भारी घाटा उठाना पड़ा. केरल के राज्यपाल आरएस गवई ने सीबीआई के अधिकारी प्रेम कुमार को मुक़दमा चलाने की अनुमति वाला पत्र सौंप दिया है. सीपीएम का कहना है कि ये पूरा मामला ही राजनीति से प्रेरित है. हालाँकि विश्लेषकों के मुताबिक सीपीएम का एक खेमा ख़ुद विजयन के ख़िलाफ़ है. दरअसल पिछले कुछ समय से मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन और सीपीएम के राज्य सचिव पिनरई विजयन के बीच मतभेद की बात सामने आ रही है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'हमेशा ग़लत पक्ष में रहे हैं वामपंथी'11 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस मंगलौर में मारपीट का आरोप, दो ग़िरफ़्तार07 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस बंगलौर विस्फोट के सिलसिले में गिरफ़्तारी07 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस सबरीमाला के कर्मचारी पहन सकेंगे कच्छा23 मई, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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