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शुक्रवार, 05 जून, 2009 को 17:21 GMT तक के समाचार
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'विरोध जताना था...हम आतंकवादी नहीं'

तेजिंदर पाल सिंह
इस 58 वर्षीय व्यक्ति के गुस्से और कड़वाहट में लगभग 28 साल में कोई ख़ास अंतर नहीं आया
भारतीय पंजाब में 1981 में जब अकाली दल ने पंजाब और सिखों की माँगे उठाईं और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई थी, तब सितंबर 1981 में तेजिंदर सिंह और उनके साथियों ने रोष प्रकट करते हुए इंडियन एयरलाइंस के विमान का अपरहण किया.

ऑपरेशन ब्लूस्टार के 25 साल पूरे होने पर जब हमने उनसे बात की तो भारत की सरकार के प्रति इस 58 वर्षीय व्यक्ति के गुस्से और कड़वाहट में लगभग 28 साल में कोई ख़ास अंतर नहीं आया था.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "मैं कारोबारी आदमी था कोई आंतकवादी नहीं. सिखों के साथ भेदभाव और अत्याचार से मजबूर होकर मैंने और साथियों ने विमान का अपरहण किया था."

तेंजिंदर पाल सिंह कहते हैं, "आप इसे हाइजैकिंग कह लें या विरोध जताने का एक तरीक़ा....यह इस इसलिए किया गया था कि पंजाब को उसका हक़ नहीं दिया जा रहा था उसी बात को पूरी दुनिया के सामने लाने का यह एक तरीक था और यहीं हमारा मक़सद था."

ज़ुल्म और अत्याचार

 हम कोई आतंकवादी नहीं थे. आप इसे हाइजैकिंग कह लें या विरोध जताने का एक तरीक़ा....यह इस इसलिए किया गया था कि पंजाब को उसका हक़ नहीं दिया जा रहा था और उसी बात को पूरी दुनिया के सामने लाने हमारा मक़सद था
तेजिंदर सिंह

उन्होंने बताया कि दल खालसा संगठन की ओर से विमान अपहरण की योजना बनाई गई और उन्हें बताया गया कि इस अभियान में उनके कुछ साथी भी होंगे.

तेंजिंदर कहते हैं, "विमान अपहरण के सिलसिले में मैं 29 सितंबर 1981 को दिल्ली पहुँचा और हाइजैकिंग की योजना को आख़िरी शक्ल दी गई. हमारे साथी हमें हवाई अडेडे पर ही मिले. हिदायत दी गई थी कि यात्रियों पर न हमला करना है न उन्हें नुकसान पहुँचाना है. हमें अच्छा व्यवहार करने को कहा गया था."

वो कहते हैं कि उनके सभी दस साथियों को अलग-अलग ड्यूटी पर लगाया गया था और किसी ने कार्रवाई का विरोध नहीं किया. उन्हें ड्यूटी सौंपी गई थी कि कोई व्यक्ति कॉकपिट तक नहीं पहुँचना चाहिए.

तेजिंदर का कहना है, "हमारा किसी व्यक्ति से कोई झगड़ा नहीं था, सरकार से रोष था. इसलिए अपहरण किया गया था."

विमान को दिल्ली से अमृतसर होते हुए श्रीनगर जाना था. लेकिन हाईजैकिंग के बाद विमान लाहौर पहुँच गया. फिर महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों को विमान से बाहर जाने दिया गया.

उनका कहना है कि पाकिस्तान में कंमाडो ऑपरेशन हुआ. धोड़ी बहुत धक्कामुक्की के बाद अपहरण करने वाले लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया फिर उन्होंने 14 साल की जेल काटी और रिहा होने के बाद कुछ साल के लिए कनाडा चले गए.

वे कहते हैं कि उन्हें अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है और वे अपनी अलग राष्ट्र की माँग पर कायम हैं. उनका मानना है कि सिख क़ौम को कुछ समय के लिए रोका जा सकता है लेकिन सदा के लिए नहीं.

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