BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शुक्रवार, 04 जून, 2004 को 13:11 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
सिख प्रधानमंत्री बनने से कड़वाहट घटेगी?

स्वर्ण मंदिर
1998 में सोनिया गाँधी ने पहली बार कहा था कि वे सिखों का दुख समझ सकती हैं
सन 1984 में ऑपरेशन ब्लूस्टार के तहत स्वर्ण मंदिर परिसर में हुई सैनिक कार्रवाई के बाद काँग्रेस और सिख समुदाय के रिश्तों में दरार पैदा हो गई.

सिखों के सबसे पवित्र स्थल पर सैनिक कार्रवाई से सिखों की भावनाओं को ठेस पहुँची और बहुत से उदारवादी सिखों के मन में भी भारत सरकार और काँग्रेस के प्रति कड़वाहट पैदा हो गई.

इसके बाद सिख समुदाय के ख़िलाफ़ भड़के दंगों ने तो इस रिश्ते में ऐसी दरार पैदा की कि वर्षों तक हर चुनाव में काँग्रेस पार्टी इस विषय में 'स्पष्टीकरण' देती रही.

इंदिरा की तुलना अब्दाली से

बहुत सारे सिख धार्मिक और राजनीतिक नेता काँग्रेस के साथ-साथ ख़ास तौर पर नेहरू-गाँधी परिवार को अपना निशाना बनाते रहे हैं.

 अकाली और कट्टरपंथी सिख ऑपरेशन ब्लूस्टार और दंगों के मुद्दे बार-बार उठाते आए हैं लेकिन कम से कम कुछ समय के लिए उनके लिए ऐसा करना मुश्किल हो जाएगा
डॉक्टर प्रमोद कुमार

यहाँ तक की सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख़्त से हुए भाषणों में प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की तुलना अफ़ग़ान हमलावर अहमद शाह अब्दाली से भी की गई है.

लेकिन पर्यवेक्षकों का मानना है कि अब काँग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता के रूप में मनमोहन सिंह के देश का प्रधानमंत्री पद संभालने से काँग्रेस पार्टी और सिख समुदाय के रिश्ते बेहतर होंगे.

इसका संकेत सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख़्त के जत्थेदार जोगिंदर सिंह वेदांती की बीबीसी से हुई बातचीत से लगाया जा सकता है.

उन्होने बीबीसी को बताया, "ऑपरेशन ब्लूस्टार को तो भुलाया नहीं जा सकता. लेकिन एक काबिल सिख को प्रधानमंत्री बनाने से लगता है कि बीते वर्षों में काँग्रेस का सिखों के प्रति जो रुख़ रहा है उसमें परिवर्तन आया है."

उनका कहना है कि इससे सिखों के काँग्रेस से रिश्ते बेहतर होंगे.

 ऑपरेशन ब्लूस्टार को तो भुलाया नहीं जा सकता. लेकिन एक काबिल सिख को प्रधानमंत्री बनाने से लगता है कि बीते वर्षों में काँग्रेस का सिखों के प्रति जो रुख़ रहा है उसमें परिवर्तन आया है
अकाल तख़्त के जत्थेदार

ऑपरेशन ब्लूस्टार पर अफ़सोस

उधर वरिष्ठ अकाली नेता और पूर्व मंत्री मनजीत सिंह कलकत्ता का मानना है, "देश की स्वतंत्रता से लेकर काँग्रेस के सिखों के प्रति रुख़ से सिखों में उस पार्टी के प्रति शक़ रहा है जो 1980 के दशक में और मज़बूत हुआ."

लेकिन वे ये भी कहते हैं, "काँग्रेस के ताज़ा कदम से सिखों में काँग्रेस के प्रति विश्वास बढ़ेगा और नेहरू-गाँधी परिवार के साथ भी रिश्ते बहुत बेहतर होंगे.

सिखों का विश्वास जीतने के लिए पहली बार सोनिया गाँधी ने 1998 में चंडीगढ़ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए 'ऑपरेशन ब्लूस्टार' और सिख विरोधी दंगों पर अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए कहा था कि वे सिखों का दुख समझ सकती हैं.

फिर उन्होंने पहली अमृतसर में स्वर्ण मंदिर जाने पर भी ऐसी ही भावना व्यक्त की थी.

ग़ौरतलब है कि इस यात्रा के दौरान कट्टरपंथी सिखों के साथ टकराव को टालने के लिए वे 'ऑपरेशन ब्लूस्टार' के दौरान पूरी तरह ध्वस्त हुए अकाल तख़्त पर नहीं गई थीं.

लंबे समय से पंजाब और सिखों से संबंधित धार्मिक और राजनीतिक गतिविधियों पर नज़र रखने वाले डॉक्टर प्रमोंद कुमार का मानना है कि मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री नियुक्त होने से स्थिति में परिवर्तन आ सकता है.

उनका कहना है, "अकाली और कट्टरपंथी सिख 'ऑपरेशन ब्लूस्टार' और दंगों के मुद्दे बार-बार उठाते आए हैं लेकिन कम से कम कुछ समय के लिए उनके लिए ऐसा करना मुश्किल हो जाएगा."

उनका कहना है कि विचारधारा के तौर पर आम सिखों से काँग्रेस विरोधी नारों पर ज़्यादा समर्थन मिलना अब मुश्किल हो जाएगा.

उनका मानना है कि यदि मनमोहन सिंह के शासनकाल के दौरान पंजाब को फ़ायदा होता है तो इसका प्रभाव सिखों के काँग्रेस के प्रति रुख़ पर होगा.

ध्यान रहे कि इस लोकसभा चुनाव में काँग्रेस को पंजाब की 13 लोकसभा सीटों में से केवल दो ही सीटें मिल पाई हैं.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>