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रविवार, 06 जून, 2004 को 15:36 GMT तक के समाचार
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ब्लूस्टार की निंदा न होने पर नाराज़गी
स्वर्ण मंदिर
स्वर्ण मंदिर परिसर में कई सिख संगठनों के कार्यकर्ता एकत्र हुए
बीस साल पहले अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में हुई सैनिक कार्रवाई में मारे गए लोगों को याद करने के लिए सिख संगठनों ने रविवार को वहीं एक समारोह का आयोजन किया.

हर साल ऐसा आयोजन होता है और ध्यान रहता है सिखों की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक संस्था अकाल तख़्त के प्रमुख जत्थेदार जोगिंदर सिंह वेदांती के संदेश पर.

रविवार को जत्थेदार वेदांती ने अफ़सोस ज़ाहिर किया कि भारत की संसद में इस कार्रवाई की अब तक निंदा नहीं की गई है और न खेद जताया गया है.

उन्होंने ऑपरेशन ब्लूस्टार की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान एडॉल्फ़ हिटलर के अत्याचारों और कारनामों से की.

उन्हें इस बात पर ख़ास दुख था कि सिखों के सबसे पावन स्थल स्वर्ण मंदिर परिसर पर सैनिक कार्रवाई उसी सरकार ने की जिसके प्रतिनिधियों को सिखों ने चुना था.

जत्थेदार वेदांती
जत्थेदार वेदांती:'सैनिक कार्रवाई उस सरकार ने की जिसे सिखों ने चुना था'

इस आयोजन के दौरान तब की भारत सरकार की तीखी आलोचना तो हुई, साथ ही ऑपरेशन ब्लूस्टार में मारे गए लोगों को '1984 के शहीदों' का दर्जा दिया गया.

इस दौरान कट्टरपंथी सिख नेता जरनैल सिंह भिंडरांवाले के बड़े पुत्र ईशर सिंह को सम्मानित किया गया.

इस समारोह के दौरान सिख संगठनों के कई कार्यकर्ताओं ने अलग सिख राष्ट्र के समर्थन में नारे लगाए.

जब कई कार्यकर्ताओं ने जरनैल सिंह भिंडरांवाले और उनकी विचारधारा के बारे में पुस्तकें और कलैंडर बाँटे तो इन्हें पाने के लिए भीड़ लग गई.

इससे यही पता चलता है कि पंजाब में कट्टरपंथी विचारधारा के अब भी समर्थक हैं.

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