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भिंडरांवाले 'शहीद' घोषित हुए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख़्त ने कट्टरपंथी सिख नेता जरनैल सिंह भिंडरांवाले को छह जून सन 2003 को 'शहीद' घोषित कर दिया. जरनैल सिंह भिंडरांवाले 1984 में तब मारे गए थे जब भारतीय सेना ने ऑपरेशन ब्लूस्टार के तहत चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अमृतसर में स्वर्ण मंदिर परिसर में कार्रवाई की थी. सिखों के एतिहासिक गुरुद्वारों की देखरेख करने वाली निर्वाचित सदस्यों की संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने 19 वर्षों तक इस मामले में चुप्पी साध रखी थी. भिंडरांवाले सिख धर्म और ग्रंथों के बारे में शिक्षा देने वाली संस्था - दमदमी टकसाल से संबंध रखते थे. ये संस्था ये मानने को तैयार नहीं था कि वे ऑपरेशन ब्लूस्टार में मारे गए थे. बेटे को सिरोपा अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर में सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख़्त पर मुख्य ग्रंथी ने जरनैल सिंह भिंडरांवाले की याद में 'अरदास' की. उन्होंनें भिंडरांवाले के बड़े पुत्र ईशर सिंह को सरोपा यानी सम्मान चिन्ह दिया. अकाल तख़्त सिख धर्म की वो सर्वोच्च संस्था है जिसका फ़ैसला सिख धर्म और अकाली राजनीति के बारे में अंतिम माना जाता है और सभी सिखों को इसे मानना होता है. उधर दमदमी टकसाल लगातार दावा करती आई है कि भिंडरांवाले जीवित हैं और उपयुक्त समय पर अपने जीवित होने का प्रमाण देंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें बात ऑपरेशन ब्लूस्टार तक कैसे पहुँची?04 जून, 2004 | भारत और पड़ोस सिख प्रधानमंत्री बनने से कड़वाहट घटेगी?04 जून, 2004 | भारत और पड़ोस जाने कहाँ गए वे लोग...?04 जून, 2004 | भारत और पड़ोस पंजाब की राजनीति पर ऑपरेशन ब्लूस्टार का साया04 जून, 2004 | भारत और पड़ोस बादल समर्थक की जीत12 नवंबर, 2002 | पहला पन्ना अमरिंदर के ख़िलाफ़ प्रस्ताव | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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