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श्रीलंका सेना को संघर्षविराम मंज़ूर नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका सरकार ने तमिल विद्रोहियों की ओर से एकतरफ़ा संघर्षविराम की घोषणा को ख़ारिज कर दिया है और सैन्य कार्रवाई जारी रखने का फ़ैसला किया है. श्रीलंकाई के रक्षा सचिव गोताबाया राजपक्षे ने बीबीसी से कहा है कि संघर्षविराम की घोषणा एक मज़ाक है और यह पराजित हो रहे पक्ष ने की है. उन्होंने कहा कि इसका मक़सद स्पष्ट है कि तमिल विद्रोही अपने आपको संगठित करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि संघर्ष विराम की घोषणा करने की बज़ाए विद्रोहियों को आत्मसमर्पण करना चाहिए, हथियार डाल देना चाहिए और बंधक बनाए गए निर्दोष लोगों को छोड़ देना चाहिए. इससे पहले तमिल विद्रोहियों यानी एलटीटीई ने कहा था कि वह तत्काल प्रभाव से सेना के ख़िलाफ़ हमले रोक रहा है. एलटीटीई के प्रवक्ता पुल्ली देवन ने तमिल विद्रोहियों के क़ब्ज़े वाले इलाक़े से बीबीसी को बताया कि क्षेत्र में 'अभूतपूर्व मानवीय संकट' और अमरीका, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ की युद्धविराम की अपील के बाद उन्होंने ये क़दम उठाया है. उधर, श्रीलंका के युद्ध प्रभावित इलाके से आम नागरिकों के निकालने की कोशिश के तहत संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारी जॉन होम्स श्रीलंका पहुँचे हुए हैं. होम्स अपनी यात्रा के दौरान श्रीलंका सरकार पर इस बात के लिए दबाव बनाने का प्रयास करेंगे कि तमिल विद्रोहियों और सेना के बीच संघर्ष में फंसे लोगों तक पहुँचने का विकल्प खुले. | इससे जुड़ी ख़बरें श्रीलंका पर युद्ध रोकने का दबाव बढ़ा25 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस भारत ने श्रीलंका पर दबाव डाला24 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका का कार्रवाई रोकने से इनकार24 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस नारायणन और मेनन श्रीलंका जाएँगे24 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस तमिल विद्रोहियों से आत्मसमर्पण को कहा23 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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