|
आंध्र में चिरंजीवी का जलवा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तेलुगू फ़िल्मों के सुपर-स्टार चिरंजीवी भारतीय राजनीति में आने वाले सबसे नए फ़िल्म स्टार हैं. हमने उनके प्रचार के दौरान उनके साथ दो दिन बिताए और देखा की किस तरह जनता उन्हें मिलने को आतुर हैं. जैसे ही चिरंजीवी के चुनाव प्रचार का ट्रक लोगों को नज़र आया, सड़क के किनारे क़तार में खड़ी ज़बरदस्त भीड़ में मानों नई जान आ गई. लोगों ने अपने हीरो का ज़बरदस्त नारों से स्वागत किया. शोर इस क़दर ऊंचा था कि मुझे अपनी ही आवाज़ सुनाई नहीं दे रही थी. आगे बढ़ने वाले कुछ लोगों ने तो सही मानों में चिरंजीवी की गाड़ी के सामने छलांग लगा दी. गाड़ी की सुरक्षा करने वाले चौड़ी भुजाओं वाले नौजवान भीड़ को पीछे हटाने की कोशिश में थे. फूलों का एक बड़ा हार लिए एक समर्थक ने ट्रक की छत पर चढ़ने की कोशिश की ताकि वह यह फूल-माला चिरंजीवी को पेश कर सके. सुरक्षाकर्मी उसे घसीट कर नीचे खींच लाए और उसकी क़मीज़ पीछे से फट गई. उसके बाद उन्होंने उसका वह हार मुझे थमा दिया ताकि मैं चिरंजीवी को दे आगे दे दूँ. ये फूलों की बड़ी सी माला कम से कम पांच किलो की रही होगी. चारों तरफ़ फैले शोर-शराबे के बीच ट्रक की छत पर चिरंजीवी हाथ जोड़े शांत खड़े रहे और लोगों को झुक-झुक कर प्रणाम करते रहे. जब-जब वे ऐसा करते शोर और भी ऊंचा हो जाता. इस चुनाव से 53-वर्षीय चिरंजीवी अपने राजनीतक करियर की शुरुआत कर रहे हैं और उन्होंने भारत के महत्पूर्ण चुनावी राज्य आंध्र प्रदेश में जुनावी लड़ाई को नया आयाम दिया है. 'ग़रीबों को इंसाफ़' पूरे आंध्र प्रदेश से चिरंजीवी को सुनने के लिए हज़ारों की संख्या में लोग उमड़ पड़े...एक अंदाज़े के मुताबिक़ उनकी सबसे बड़ी चुनावी रैली में दस लाख से भी ज़्यादा लोग शामिल हुए थे. मंदिरों के शहर तिरुपति में चिरंजीवी ने अपने हाथ में माइक लेकर आरोप लगाया कि ग़रीबों के लिए सत्तारूढ़ कांग्रेस ने कुछ ख़ास नहीं किया. अश्चर्यजनक ये था कि इसका लोगों ने ख़ासे शोर और नारेबाज़ी के साथ अभिवादन किया. चिरंजीवी ने जब अपनी दूसरी विरोधी पार्टी तेलुगू देशम पर ये कहते हुए निशाना लगाया कि उसने सिर्फ़ अमीरों की परवाह की तो भीड़ ने और ज़्यादा ऊंची आवाज़ में अपनी सहमति जताई.
चिरंजीवी भारत के फ़िल्म उद्योग में ख़ासे पैसे लेने वाले और क़द्दावर फ़िल्म अभिनेताओं में से एक हैं. तेलुगू फ़िल्म उद्योग ‘टॉलीवुड’ के आज के सबसे बड़े नेता चिरंजीवी ने अपने तीन दशक के फ़िल्मी कैरियर में 100 से अधिक फ़िल्मों में प्रमुख भूमिका निभाई है. उन्होंने अपनी फ़िल्मों में ऐसे अभिनेता का पात्र निभाया है जो ग़रीब और आम लोगों को बचाता है. अब वह फ़िल्मों की अपनी छवि को भारतीय राजनीतिक में भुनाना चाहते हैं. जब हम एक पड़ाव से दूसरे पड़ाव की ओर जा रहे थे तो ट्रक पर खड़े मूँछ वाले फ़िल्मी अभिनेता ने मुझ से कहा, "मैं ग़रीबों के लिए इंसाफ़ चाहता हूँ." उन्होंने कहा, "इस देश में शक्ति सिर्फ़ कुछ लोगों के हाथों में रही है, बाक़ी सारे लोगों को इससे बाहर रखा गया है, अब समय आ गया है कि यह बदले." उन्होंने अपनी नई राजनीतिक पार्टी का नाम ‘प्रजा राज्यम पार्टी’ रखा है जिसका अर्थ ‘जनता राज’ होता है. चिरंजीवी ने कहा, "भारत के अमीर और अमीर होते जा रहे हैं, ग़रीब और भी अधिक ग़रीब होते जा रहे हैं. मैं इस खाई को पाटना चाहता हूँ, इस दूरी को कम करना चाहता हूं." धन की खाई आधुनिक भारत में असमानता बहुत ज़्यादा है. तिरुपति में जहां चिरंजीवी चुनाव प्रचार कर रहे थे उससे नज़दीक ही बंगलौर शहर है जो पिछले कई सालों से भारतीय सूचना तकनीक क्षेत्र का केंद्र बना. वहां काम करने वाले 26 वर्षीय हितेश शर्मा जिन्हें यूनिवर्सिटी छोड़े ज़्यादा दिन नहीं हुए, उस नई पीढ़ी से आते हैं जो नए, आश्वस्त और उभरते हुए भारत को पेश करता है. हितेश शर्मा ने कहा, "मेरा विश्वास है कि भारत का भविष्य काफ़ी उज्वल है. हम लोग जवान और प्रगतिशील हैं. हमारी अर्थव्यवस्था ने वैश्विक मंदी को झेल लिया है. मेरा विश्वास है कि भारत आर्थिक महाशक्ति बनेगा." वहां से कुछ घंटों की दूरी पर एक गांव के कुँए पर 28 वर्षीय सविता पानी भर रही थीं. वह अपनी पीठ पर अपनी 18 महीने की बच्ची मीता को बांधे हुए छह साल की दूसरी बेटी मीता के लिए झोंपड़ी तक पानी ले जाने में जुटी हुई थी. सविता दोनों बच्चियों को अकेले पालने की कोशिश कर रही है. पिछले साल खेतों पर काम करने वाले उसके पति नागराज ने कीट नाशक दवा पी कर आत्महत्या कर ली थी. अपने सूने घर की ज़मीन पर बैठी, हाथ में मृत पति की तस्वीर उठाए सविता ने कहा, "यही मेरा भाग्य है. एक ग़रीब मज़दूर की यही ज़िंदगी है, कोई नहीं जो इन हालात में मेरी मदद कर सके."
वादे लोगों के जीवन के स्तर और उनकी आकांक्षाओं के बीच यही वह बड़ी असमानता है जिसे चिरंजीवी कम करना चाहते हैं. चिरंजीवी या उनकी पार्टी भारत के इस चुनाव में कितना प्रभाव डालेंगे यह स्पष्ट नहीं है. पर्यवेक्षक मानते हैं कि आंध्र प्रदेश में सरकार बनाने में उनकी भूमिका अहम हो सकती है और वह राष्ट्रीय स्तर पर भी किसी गठबंधन के महत्वपूर्ण सहयोगी हो सकते हैं. मुख्य पार्टियों के वोट बांट कर चिरंजीवी लोगों से यह कहने की कोशिश कर रहे हैं कि परंपरागत नेता ग़रीबों के लिए कुछ भी करने में विफल रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'वरुण का भाषण कहीं अधिक विषाक्त था'18 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस कंधमाल: चुनाव के बाद सुधरेंगे हालात?14 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस मीरा सान्याल: नए बदलाव का नया चेहरा11 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस 'सच्चे को चुनो, अच्छे को चुनो'02 अप्रैल, 2009 | मनोरंजन एक्सप्रेस चुनावी अखाड़े में उतरे फ़िल्मी सितारे01 अप्रैल, 2009 | मनोरंजन एक्सप्रेस तेलुगू स्टार चिरंजीवी उतरे मैदान में...26 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस चिरंजीवी ने राजनीति का रुख़ किया17 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||