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संजय दत्त मामले में फ़ैसला सुरक्षित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सुप्रीम कोर्ट ने फ़िल्म अभिनेता संजय दत्त की लखनऊ लोक सभा सीट से चुनाव लड़ने की अनुमति संबंधी याचिका पर फ़ैसला सुरक्षित रखा हैय सीबीआई की दलील सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले में फ़ैसला सुरक्षित रखने का फ़ैसला किया. सीबीआई संजय दत्त की अपील का विरोध कर रही है. संजय दत्त की ओर से हरिश सालवे ने कहा कि संजय को केवल आर्म्स एक्ट के तहत उनके इक़बालनामे के आधार पर दोषी पाया गया था और उन्हें टाडा के तहत गंभीर आरोपों से बरी कर दिया था. सीबीआई ने संजय दत्त को छह साल की सज़ा सुनाए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में उनकी ज़मानत याचिका का विरोध नहीं किया था. वर्ष 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में एक विशेष अदालत ने 'आर्म्स एक्ट' के तहत संजय दत्त को छह साल की सज़ा सुनाई थी. संजय दत्त इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद से जेल से बाहर हैं. जानकारों का कहना है कि संगीन अपराधों में चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिलती है लेकिन संजय दत्त टाडा कोर्ट से बरी हो चुके हैं इसलिए उन्हें लोक सभा चुनाव लड़ने की अनुमति मिल सकती है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्दू को एक मामले के बावजूद लोक सभा चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी थी. |
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