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पाकिस्तान के अख़बारों में मुंबई जाँच रिपोर्ट छाई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान से छपने वाले लगभग सभी समाचार पत्रों ने मुंबई हमलों से जुड़ी पाकिस्तान की जाँच रिपोर्ट को प्रमुखता दी है. अख़बारों ने आंतरिक मामलों के सलाहकार रहमान मलिक की उस तस्वीर को भी पहले पन्ने पर छापा है जिसमें उन्हें जाँच रिपोर्ट का विवरण देते हुए दिखाया गया है. अंग्रेज़ी अख़बार डेली डॉन का शीर्षक है - 'थॉ एट लास्ट' यानी आख़िर बर्फ़ पिघल गई. अख़बार ने लिखा है - "इस्लामाबाद और दिल्ली के बीच बढ़ते हुए तनाव के संदर्भ में उस समय बर्फ़ पिघलना शुरु हुई जब आंतरिक मामलों के सलाहकार रहमान मलिक ने स्वीकार किया कि मुंबई हमलों की साज़िश का कुछ हिस्सा पाकिस्तान में रचा गया था." अख़बार ने भारत के उस बयान को भी पहले पन्ने पर जगह दी है जिसमें कहा गया कि प्ररांभिक तौर पर पाकिस्तान का क़दम सकारात्मक है. अख़बार के अनुसार ज़की-उर-रहमान लखवी सहेत छह अभियुक्तों के खिलाफ़ रावलपिंडी की अडयाला जेल में मुक़दमा चलेगा. पाकिस्तान में उर्दू के सब से बड़े अख़बार रोज़नामा 'जंग' का मुख्य शीर्षक है - 'मुंबई हमलों की कुछ मनसूबाबंदी पाकिस्तान में हुई.' अख़बार ने लिखा है - "ज़की-उर-रहमान लखवी सहेत आठ के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया है और छह हिरासत में हैं." अख़बार के अनुसार रहमान मलिक ने कहा - "हमलों में अमरीका, स्पेन, इटली और रूस की भूमि भी इस्तेमाल हुई. पाकिस्तान ने अपने हिस्से का काम कर दिया है. भारत अभियुक्तों के बारे में और सूचना और सबूत प्रदान करे." एक और अंग्रेज़ी अख़बार डेली टाइम्स का शीर्षक है - 'मुंबई अटैक्स पार्शली प्लैंड इन पाकिस्तान,' यानी मुंबई हमलों की योजना आंशिक रूप से पाकिस्तान में बनी. अख़बार के अनुसार रहमान मलिक ने कहा - "जांच को आगे बढ़ाने के लिए भारत से और जानकारी की ज़रूरत है. रिपोर्ट में जो 30 प्रश्न पूछे गए हैं, उसके तुरंत जवाब मिलने चाहिए." अख़बार के अनुसार अमरीका ने पाकिस्तान के इस क़दम की प्रशंसा की है. अमरीका ने कहा है कि पाकिस्तान के इस क़दम से दोनों देशों के बीच बढ़ रहे तनाव को कम करने में मदद मिलेगी. उर्दू अख़बार आजकल का मुख्य शीर्षक है - 'मुंबई हमले: कुछ मनसूबा पाकिस्तान में बना.' अख़बार के अनुसार इस हमलों में तीन नौकाएं इस्तेमाल हुईं, अभियुक्त कराची से मुंबई पहँचे और इस्लामाबाद से पैसा भेजा गया. अख़बार ने प्रतिबंधित संगठन लश्करे तैबा के उस बयान को भी पहले पन्ने पर जगह दी है जिस में कहा गया है कि पाकिस्तान ने अमरीका और भारत को ख़ुश करने के लिए मुक़दमा दर्ज किया गया है. उर्दू भाषा के एक और अख़बार रोज़नामा ऐक्सप्रेस का शीर्षक है -'मुंबई हमले: आठ लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज, भारत से 30 सवाल के जवाब तलब.' अख़बार में रहमान मलिक ने कहा कि भारतीय सूचना मुक़दमा दर्ज करने के लिए काफ़ी नहीं थी, पाकिस्तानी जांच एजेंसी ने दिन-रात मेहनत कर सबूत एकत्र किए और अब भारत सहयोग करे. अख़बार में मुंबई पुलिस के उस बयान को भी पहले पन्ने पर छापा है जिस में कहा गया है कि पाकिस्तान को 16 संदिग्ध लोगों के नाम दिए गए हैं. अधिकतर अख़बारों ने अपने संपादकीय भी इस ख़बर पर लिखे हैं जिनमें कहा गया है कि जांच रिपोर्ट के नतीजों से लगता है कि पाकिस्तान मुंबई हमलों के अभियुक्तों को क़ानून के कटघरे तक पहँचाने में गंभीर है. | इससे जुड़ी ख़बरें आतंकवाद का तंत्र नष्ट करें: मुखर्जी13 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'पाकिस्तान में भी रची गई थी साज़िश'12 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'पाकिस्तान का क़दम सकारात्मक प्रगति'12 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'अमरीकी दबाव में बोल रहा है पाकिस्तान'12 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'पाकिस्तान पर्याप्त क़दम नहीं उठा रहा है'11 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'पाकिस्तान मीडिया का सहारा न ले'10 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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