|
गणतंत्र दिवस परेड: हाथी नहीं रहा साथी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की राजधानी दिल्ली में इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में पिछले 30 साल की परंपरा तोड़ते हुए हाथियों को शामिल नहीं किया जाएगा. जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं के विरोध के कारण अधिकारियों ने ऐसा निर्णय लिया है. पिछले वर्ष परेड के दौरान दो हाथियों ने उपद्रव मचाया था जिस कारण सुरक्षा को लेकर भी चिताएँ जताई जा रही थीं. तीन दशकों में ऐसा पहली बार होगा जब रंग-बिरंगे और सजे-धजे हाथी परेड में नहीं दिखेंगे. आम तौर पर बहादुरी के लिए जिन बच्चों को सम्मानित किया जाता है उन्हें इस परेड में हाथियों पर घूमाया जाता था. हाथियों का उत्पात रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता डी मोहंती ने बीबीसी को बताया कि दो हाथियों ने जब पिछले वर्ष राष्ट्रपति के मंच के नज़दीक पहुँचने पर उत्पात मचाया था तबसे सुरक्षा को लेकर 'गंभीर' चिंताएँ जताई जा रही थी. उन्होंने कहा, "साथ ही जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता पिछले चार वर्षों से हाथियों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की माँग कर रहे थे. इन दोनों ही कारणों से सरकार ने इस वर्ष से हाथियों का इस्तेमाल नहीं करने का निर्णय लिया है." परेड में शामिल हाथियों को दो हज़ार रुपए प्रति दिन प्रति हाथी के किराए पर परेड में शामिल किया जाता है और बहादुर बच्चे परेड के दौरान हाथी की सवारी करते हैं. अधिकारियों का कहना है कि इस बार बच्चों को सेना की खुली जीप में ही घुमाया जाएगा. उत्सवों के दौरान, ख़ास तौर पर केरल में, हाथियों के उत्पात के कारण पहले कई लोगों की मौत हो चुकी है. |
इससे जुड़ी ख़बरें कड़ी सुरक्षा के बीच मना गणतंत्र दिवस26 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस आज़ाद भारत का घूमता आईना13 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस न उम्र की सीमा, न रोज़गार का बंधन30 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस हाथी ने सात लोगों को कुचलकर मारा29 मई, 2008 | भारत और पड़ोस महावत को मिला हाथी की मौत का मुआवजा21 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||