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मीडिया को दिशानिर्देशों पर आपत्ति | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के वरिष्ठ पत्रकारों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक पत्र लिखकर घटनाओं के लाइव कवरेज के दिशानिर्देशों पर आपत्ति जताई है. सोमवार को प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में कहा गया है कि मीडिया लोकतंत्र का प्रहरी है और यदि सरकार इसे नियंत्रित करने लगेगी तो इससे लोकतंत्र को आघात लग सकता है. इसमें कहा गया है कि मीडिया को अपनी ज़िम्मेदारी का अहसास है और वो अपने दायित्वों और देश हित के प्रति जागरूक हैं. साथ ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने इस दिशा में स्वंय ही क़दम उठाए हैं इसलिए नए दिशानिर्देशों को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया जाना चाहिए. इस पत्र पर हस्ताक्षर करनेवालों में राजदीप सरदेसाई (सीएनएन-आईबीएन), बरखा दत्त (एनडीटीवी), क़मर वहीद नक़वी (आजतक), आशुतोष (आईबीएन-7), अजीत अंजुम (न्यूज़24), दीपक चौरसिया (स्टार न्यूज़) आदि शामिल हैं. उल्लेखनीय है कि मुंबई हमलों के दौरान मीडिया की आलोचनाओं के बाद न्यूज़ ब्राडकॉस्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) ने ऐसी घटनाओं की कवरेज के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए थे. एनबीए ने कहा था कि किसी भी ऐसे मामले की लाइव रिपोर्टिंग नहीं होनी चाहिए जिसमें लोग बंधक हों. इतना ही नहीं टीवी चैनलों से कहा गया है कि किसी मामले की पुरानी तस्वीर दिखाए जाने पर उसमें तारीख़ लिखी होनी चाहिए. उल्लेखनीय है कि मुंबई हमलों के दौरान जिस तरह से मीडिया ने इस घटना की कवरेज की, उसकी कड़ी आलोचना हुई थी. |
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