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बांग्लादेश में मतदान ख़त्म, मतगणना शुरू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बांग्लादेश में सात साल बाद संसदीय चुनावों के लिए मतदान ख़त्म हो गया है और अब मतगणना शुरू हो गई है. कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान हुआ और आम तौर पर मतदान शांतिपूर्ण रहा. क़रीब 70 फ़ीसदी मतदान होने की ख़बर है.
इन चुनावों में लगभग 50 हज़ार सैनिक और छह लाख पुलिसकर्मी सुरक्षा के लिए तैनात किए गए थे. देश भर में 35216 मतदान केंद्र स्थापित किए गए थे. बांग्लादेश के मुख्य चुनाव आयुक्त एटीएम शमसुल हुदा ने मतदान में बड़ी संख्या में शामिल होने के लिए लोगों को धन्यवाद दिया है और कहा है कि अच्छी संसद का गठन होगा. ठंड के बावजूद बांग्लादेश में मतदान के लिए लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं. मतदान के लिए लोगों में काफ़ी उत्साह था. आवामी लीग की नेता शेख़ हसीना ने भी मतदान पर ख़ुशी जताई है और कहा है कि जो भी पार्टी जीतती है, उसका समर्थन करना चाहिए. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की नेता ख़ालिदा ज़िया ने कहा है कि अगर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव हुए हैं तो वे भी नतीजे को स्वीकार करेंगी. प्रमुख मुक़ाबला इस बार भी 300 सीटों वाली संसद के लिए मुख्य मुक़ाबला शेख़ हसीना की आवामी लीग और ख़ालिदा ज़िया के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के बीच है.
बांग्लादेश की राजनीति में दोनों नेताओं ने अपने अपने गठबंधन बनाए है. आवामी लीग के महाजोत में 14 दल शामिल हैं जिसमें पूर्व राष्ट्रपति शेख इरशाद की जातीय पार्टी भी है. दूसरी ओर ख़ालिदा ज़िया के चार दलों के गठजोड़ में जमाते इस्लामी शामिल है. इससे पहले 2001 में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सत्ता में थी जिसके कार्यकाल के समापन पर कार्यकारी सरकार ने सेना की मदद से दो साल तक शासन किया. प्रचार के लिए केवल 16 दिनों का समय था और नेताओं ने देश भर में सभाएं की और सस्ते खाने, भ्रष्टाचार से लड़ने, रोज़गार बढ़ाने जैसे वादे किए. बांग्लादेश की दोनों प्रमुख नेताओं को भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल की सज़ा काटनी पड़ी थी और चुनाव के पहले उन्हें रिहा किया गया था. |
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