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रविवार, 28 दिसंबर, 2008 को 18:01 GMT तक के समाचार
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बांग्लादेश :कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान शुरु

शेख हसीना और ख़ालिदा ज़िया
इन चुनावों में शेख हसीना और ख़ालिदा ज़िया आमने सामने है

बांग्लादेश में सात साल बाद संसदीय चुनावों के लिए भारी सुरक्षा इंतज़ाम के बीच मतदान शुरु हो गया है.

राजधानी ढाका में मतदान केंद्रों पर लोगों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं और लोग मतदान को लेकर काफ़ी उत्साहित भी हैं.

एक मतदाता का कहना था कि वो वोट डालने आए हैं और इस बात से बहुत खुश हैं क्योंकि मत देकर वो अपने नेता को चुनने वाले हैं और ये देश के लिए बेहतर है.

देश में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग अलग मतदान केंद्र हैं और महिलाएं भी बड़ी संख्या में मतदान करने पहुंची हैं.

मतदान शाम चार बजे तक चलेगा और उसके कुछ समय बाद वोटों की गिनती शुरू हो जाएगी.

इन चुनावों में लगभग 50 हज़ार सैनिक और छह लाख पुलिसकर्मी सुरक्षा के लिए तैनात किए जा रहे हैं.

देश भर में 35216 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं और इन चुनावों में लगभग 8.10 करोड़ मतदाता अपनी मताधिकार का प्रयोग करने जा रहे है.

महिलाएं
बांग्लादेश में बड़ी संख्या में महिलाएं भी मतदान में हिस्सा ले रही हैं
इसमें से एक तिहाई मतदाता ऐसे है जो पहली बार मत डालेंगे.

इस बार भी 300 सीटों वाली संसद के लिए मुख्य मुक़ाबला शेख हसीना की आवामी लीग और ख़ालिदा ज़िया के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के बीच है.

बांग्लादेश की राजनीति में दोनों नेताओं ने अपने अपने गठबंधन बनाए है.

आवामी लीग के महाजोत में 14 दल शामिल हैं जिसमें पूर्व राष्ट्रपति शेख इरशाद की जातीय पार्टी भी है.

दूसरी ओर ख़ालिदा ज़िया के चार दलों के गठजोड़ में जमाते इस्लामी शामिल है.

इससे पहले 2001 में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सत्ता में थी जिसके कार्यकाल के समापन पर कार्यकारी सरकार ने सेना की मदद से दो साल तक शासन किया.

प्रचार के लिए केवल 16 दिनों का समय था और नेताओं ने देश भर में सभाएं की और सस्ते खाने, भ्रष्टाचार से लड़ने, रोज़गार बढ़ाने जैसे वादे किए.

आपको याद होगा की बांग्लादेश की दोनों प्रमुख नेताओं को भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल की सज़ा काटनी पड़ी थी और चुनाव के पहले उन्हें रिहा किया गया था.

इसलिए आशंका व्यक्त की जा रही है की अगर चुनाव का नतीजा स्पष्ट नही आता तो हिंसा हो सकती है.

वैसे भी बांग्लादेश का इस मामले में पुराना रिकॉर्ड यही कहता है.

चुनाव के ठीक पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा की शांति बनाए रखी जाए और राजनीतिक दल नतीजों की परवाह किए बिना साथ मिल कर काम करें.

चुनाव पर नज़र रखने के लिए दो लाख चुनाव पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं जिनमें ढाई हज़ार विदेशी पर्यवेक्षक शामिल हैं.

अब देखना ये है की मतदाता अपनी नेताओं की पुरानी ग़लतियो को माफ़ कर बांग्लादेश में मज़बूत लोकतंत्र लाने के लिए जोरशोर से चुनावों में हिस्सा लेते है या नहीं.

शेख हसीना और ख़ालिदा ज़िया बांग्लादेश चुनाव
चुनाव प्रचार अपनी चरम पर है और राजधानी ढाका पोस्टरों से भरी पड़ी है.
बांग्लादेश में चुनावी पोस्टर सियासी दलों का ब्यौरा
बांग्लादेश के चार मुख्य राजनीतिक दलों का अपना-अपना रोचक इतिहास है.
अल्पसंख्यकों की कहनी
बांग्लादेश के हिंदुओं को संभावित चुनावी हिंसा का डर सता रहा है.
शेख हसीनाहसीना को आज़ादी
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री को इलाज के लिए जेल से रिहा किया गया है.
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