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चौथे चरण में 55 फ़ीसदी मतदान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के चौथे चरण में 55 प्रतिशत मतदान हुआ है. बारामूला विधानसभा क्षेत्रों को छोड़ कर चुनाव बहिष्कार की अपीलों का कोई असर नहीं देखा गया. घाटी और जम्मू में मतदान पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा है. बारामूला के विधानसभा क्षेत्रों को छोड़ कर बडगाम, रयासी और उधमपुर के सभी मतदान केंद्रो पर सुबह से शाम तक लंबी-लंबी क़तारे देखी गई और मतदाताओं में उत्साह भी देखा गया. रविवार को राज्य के 18 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान हुआ और इस चरण में बारामूला के भी सात विधानसभा क्षेत्रों के लिए वोट डाले गए. अलगावादियों का गढ़ रहे गुल अर्नास विधान सभा क्षेत्र में सबसे अधिक 65 प्रतिशत मतदान हुआ जबकि सोपोर में सबसे कम केवल 12 प्रतिशत मतदान हुआ. बारामूला में असर बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन के अनुसार बारामूला के कई मतदान केंद्रों पर अत्यंत धीमा मतदान हुआ और अलगाववादियों के बहिष्कार का असर देखा गया. ग़ौरतलब है कि पिछले तीन चरणों में मतदान का प्रतिशत काफ़ी अच्छा रहा था और अलगाववादियों के चुनाव बहिष्कार का प्रभाव नहीं देखा गया था. हालांकि चौथे चरण में अपेक्षा के विपरीत सिर्फ़ बारामूला में चुनाव बहिष्कार का प्रभाव देखा गया. चौथे चरण के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए जिसके तहत केंद्रीय सुरक्षा बलों की 119 कंपनियां तैनात की गई. जबकि स्थानीय पुलिस की 108 कंपनियों ने सुरक्षा व्यवस्था में मदद की. अधिकारियों के अनुसार बारामूला, बडगाम, रयासी और उधमपुर विधानसभा सीटों के क़रीब 1836 मतदान केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा पहले से ही कर दी गई थी और सभी 18 सीटों के सभी मतदान केंद्रों को संवेदनशील माना गया था. मतदान से पहले हमला शुक्रवार को चुनाव प्रचार ख़त्म होने से पहले चरमपंथियों ने नेशनल कांफ्रेस के नेता शेख मुस्तफ़ा कमाल पर जानलेवा हमला किया था लेकिन वो बाल बाल बच गए. बारामूला ज़िले में भी चरमपंथियों ने कुछ हिंसक कार्रवाईयां की है. हालांकि अब तक हुए तीन चरणों में चरमपंथियों के चुनाव बहिष्कार के आह्वान के बावजूद कश्मीर घाटी में लोग बड़ी संख्या में मतदान करने पहुंचे हैं. चौथे चरण के मतदान में 18 विधानसभा सीटों के लिए 256 उम्मीदवार मैदान में थे जबकि 2002 में हुए पिछले चुनावों में यह संख्या 132 थी. इस दौर में पूर्व उपमुख्यमंत्री मुज़फ्फर हुसैन बेग़, पूर्व मंत्री मोहम्मद दिलावर मीर ( पीडीपी), अब्दुल ग़नी वकील ( कांग्रेस), नेशनल कांफ्रेंस के सांसद अब्दुल रशीद शाहीन, शेख़ मुस्तफ़ा कमाल और अब्दुल रहीम के भाग्य का फ़ैसला होना है. मुख्य मुक़ाबला, नेशनल कांफ्रेस और पीडीपी के बीच माना जा रहा है और चौथे चरण से पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने व्यापक चुनाव प्रचार किया था. | इससे जुड़ी ख़बरें दूसरे चरण के मतदान से पहले हिंसा22 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस वफ़ादारी में वोट नहीं डालने की कशमकश23 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस जम्मू-कश्मीर: 65 फ़ीसदी से ज़्यादा मतदान23 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस जम्मू-कश्मीर: तीसरे चरण में ख़ासा मतदान30 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस जम्मू कश्मीर में तीसरे चरण का मतदान30 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस तीसरे चरण में भी भारी मतदान30 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस चौथे चरण के चुनाव के लिए प्रचार ख़त्म05 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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